वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

डेथ के बाद कौन चलाएगा फेसबुक-इंस्टाग्राम अकाउंट? डिजिटल वसीयत लिख सकेंगे लोग, जानें क्या है प्लान

प्रकाशित: 28-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
डेथ के बाद कौन चलाएगा फेसबुक-इंस्टाग्राम अकाउंट? डिजिटल वसीयत लिख सकेंगे लोग, जानें क्या है प्लान
फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, लिंक्डइन, टेलीग्राम आदि डिजिटल एसेट्स हैं, जो प्राइवेट होते हैं। इनमें बाहर के लोगों को तो क्या, अपने माता-पिता तक को दखल देने की परमिशन नहीं होती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर आपकी मौत हो जाए तो अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का क्या होगा? क्या देश में इसके लिए कोई कानून या नियम है? इसक जवाब है हां, केंद्र सरकार एक खास कानून बनाने की तैयारी में है।
फिजिकल एसेट की तरह सौंपे जाएंगे डिजिटल एसेट
किसी व्यक्ति की एक्सीडेंटल या नेचुरल डेथ होने पर फिजिकल एसेट्स जैसे जमीन, पैसे और गहने पत्नी या बच्चों के नाम हो जाते हैं। लेकिन क्या डिजिटल एसेट्स भी परिवार के नाम पर ट्रांसफर किए जा सकते हैं? इसके मद्देनजर केंद्र सरकार एक डिजिटल एसेट्स के लिए डिजिटल वारिस कानून बनाने जा रही है। इसे डिजिटल वसीयत भी कहा जाएगा। इस कानून के तहत डिजिटल एसेट्स परिवार के सदस्यों को सौंपे जा सकेंगे।
डिजिटल वसीयत लिखने के नियमों की मांग उठ रही
डिजिटल प्राइवेसी लॉ के अनुसार, सोशल मीडिया अकाउंट्स को किसी को सौंपा नहीं जा सकता। लेकिन काफी समय से लोग डिजिटल वसीयत लिखने के लिए कानून या नियम बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि उनके दुनिया से जाने के बाद भी उनके डिजिटल एसेट्स उनकी याद बनकर सुरक्षित रहें। वर्तमान में डिजिटल एसेट्स हासिल करने के लिए कोर्ट की परमिशन लेनी पड़ती है, लेकिन इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी गाइडलाइन बना रही है, जिन्हें डिजिटल वसीयत कहा जाएगा।
डिजिटल वसीयत कानूनी और मौत के बाद मान्य होगी
डिजिटल वारिस के नयम लागू होने के बाद डिजिटल एसेट्स के लिए कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रियजनों के डिजिटल एसेट्स आसानी से उनके नाम पर ट्रांसफर हो सकेंगे। यह प्रक्रिया वैसी ही होगी, जैसी गहनों, घर, पैसे या जमीन ट्रांसफर करने के लिए अपनाई जाती है। लोग पहले ही डिजिटल वसीयत लिखकर उसे सहेजकर रख सकते हैं, ताकि मौत के बाद उसे लागू किया जा सके। डिजिटल वसीयत पूरी तरह से कानूनी होगी, लेकिन वह मौत होने के बाद ही मान्य होगी। इसमें सोशल मीडिया अकाउंट्स, क्रिप्टो एसेट्स, डिजिटल स्टोरेज आदि शामिल होंगे।