मानसून सत्र का 29 दिन बाद भी सत्रावसान नहीं, परिसीमन पर रहस्य क्यों : कांग्रेस
प्रकाशित: 12-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (वीअ)। कांग्रेस ने संसद के हालिया मानसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं किए जाने का हवाला देते हुए पावार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस विषय पर गोपनीयता और रहस्य क्यों बना हुआ है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि मोदी सरकार परिसीमन से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने से इनकार कर रही है, जबकि इस विषय पर व्यापक स्तर पर सहमति की देश को जरूरत है। उन्होंने कहा कि मार्च, 2026 के मध्य से सभी विपक्षी दल लगातार इस बैठक की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया, भारतीय गणराज्य की बुनियाद से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर इतनी गोपनीयता और रहस्य क्यों? रमेश ने संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर कहा कि संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच का अंतर 29 दिन पहुंच गया है, जबकि 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिन था। उन्होंने कहा कि 2026 के मानसून सत्र के मामले में यह अंतर दिन-ब-दिन बढ़ रहा है और इसके जल्द सत्रावसान की कोई स्पष्ट संभावना नहीं है। उनका कहना है कि आम तौर पर कार्यवाही स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच तीन-चार दिन का अंतर होता है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि मोदी सरकार परिसीमन से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने से इनकार कर रही है, जबकि इस विषय पर व्यापक स्तर पर सहमति की देश को जरूरत है। उन्होंने कहा कि मार्च, 2026 के मध्य से सभी विपक्षी दल लगातार इस बैठक की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया, भारतीय गणराज्य की बुनियाद से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर इतनी गोपनीयता और रहस्य क्यों? रमेश ने संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर कहा कि संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच का अंतर 29 दिन पहुंच गया है, जबकि 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिन था। उन्होंने कहा कि 2026 के मानसून सत्र के मामले में यह अंतर दिन-ब-दिन बढ़ रहा है और इसके जल्द सत्रावसान की कोई स्पष्ट संभावना नहीं है। उनका कहना है कि आम तौर पर कार्यवाही स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच तीन-चार दिन का अंतर होता है।