गैंगस्टर एक्ट मामले में अभियुक्त को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा, 16 साल पुराने मामले में आया कोर्ट का फैसला
प्रकाशित: 12-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
बांदा,(वीअ)। करीब 16 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट श्रीपाल सिंह ने 11 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। दोषी अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह पुत्र स्व. सुरेन्द्र प्रताप सिंह निवासी काशीराम कॉलोनी, थाना कोतवाली नगर को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी की ओर से वर्ष 2014 में मु0अ0सं0 475/2014 के तहत धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी ािढयाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 में मुकदमा दर्ज कराया गया था। अभियोजन के अनुसार अभियुक्त संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़ा था। गिरोह के सदस्य संगठित रूप से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होकर आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे। अभियोजन ने गिरोह की गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भय का माहौल बने रहने तथा लोगों के शिकायत और गवाही से कतराने की बात भी न्यायालय के समक्ष रखी। अभियुक्त के आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार किया गया। सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन और आवश्यक अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। मामले की विवेचना उप निरीक्षक कमलेश सिंह यादव ने की। विवेचना के दौरान आपराधिक इतिहास, गैंग चार्ट, एफआईआर, जीडी कायमीनामा, आधारभूत मुकदमों से संबंधित अभिलेख एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
न्यायालय ने 17 अगस्त 2015 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से छह मौखिक गवाहों का परीक्षण कराया गया। इसके साथ गैंग चार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति सहित महत्वपूर्ण अभिलेखीय साक्ष्य न्यायालय में सिद्ध कराए गए। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से अभियुक्त की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता और गैंग से उसका संबंध प्रमाणित होता है तथा गैंगस्टर एक्ट के आवश्यक तत्व भी सिद्ध होते हैं। साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद विशेष न्यायालय ने अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह को धारा 3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी ािढयाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी करार दिया। न्यायालय ने उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास और छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मुकदमे की प्रभावी पैरवी में विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह, पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ एवं अमित का सहयोग रहा। सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट श्रीपाल सिंह ने 11 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। दोषी अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह पुत्र स्व. सुरेन्द्र प्रताप सिंह निवासी काशीराम कॉलोनी, थाना कोतवाली नगर को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी की ओर से वर्ष 2014 में मु0अ0सं0 475/2014 के तहत धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी ािढयाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 में मुकदमा दर्ज कराया गया था। अभियोजन के अनुसार अभियुक्त संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़ा था। गिरोह के सदस्य संगठित रूप से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होकर आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे। अभियोजन ने गिरोह की गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भय का माहौल बने रहने तथा लोगों के शिकायत और गवाही से कतराने की बात भी न्यायालय के समक्ष रखी। अभियुक्त के आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार किया गया। सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन और आवश्यक अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। मामले की विवेचना उप निरीक्षक कमलेश सिंह यादव ने की। विवेचना के दौरान आपराधिक इतिहास, गैंग चार्ट, एफआईआर, जीडी कायमीनामा, आधारभूत मुकदमों से संबंधित अभिलेख एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
न्यायालय ने 17 अगस्त 2015 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से छह मौखिक गवाहों का परीक्षण कराया गया। इसके साथ गैंग चार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति सहित महत्वपूर्ण अभिलेखीय साक्ष्य न्यायालय में सिद्ध कराए गए। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से अभियुक्त की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता और गैंग से उसका संबंध प्रमाणित होता है तथा गैंगस्टर एक्ट के आवश्यक तत्व भी सिद्ध होते हैं। साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद विशेष न्यायालय ने अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह को धारा 3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी ािढयाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी करार दिया। न्यायालय ने उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास और छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मुकदमे की प्रभावी पैरवी में विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह, पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ एवं अमित का सहयोग रहा। सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया।