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पूर्वी उप्र के लोगों ने मौका मिलने पर पूरी दुनिया में अपनी काबिलियत साबित की : योगी

प्रकाशित: 12-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
पूर्वी उप्र के लोगों ने मौका मिलने पर पूरी दुनिया में अपनी काबिलियत साबित की : योगी
गोरखपुर (उप्र), (भाषा)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि गुलामी के दौर से लेकर आजादी के बाद तक लगातार पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में पलायन करने वाले लोगों ने अवसर मिलने पर अपनी काबिलियत और कड़ी मेहनत के बल पर पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में एक समाचार चैनल के कार्पाम में कहा, चाहे मुगल काल हो, अंग्रेजों का शासन हो या आजादी के बाद का समय... यह क्षेत्र लगातार उस त्रासदी का शिकार रहा है। यही वह क्षेत्र है, जहां बीमारी और बंधुआ मजदूरी के कारण बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने कहा, अगर आप मॉरिशस, फिजी या दुनिया के दूसरे देशों में जाएं तो पाएंगे कि वहां मजदूर बनकर गए लोगों में बड़ी संख्या पूर्वी उत्तर प्रदेश के इसी क्षेत्र से थी। ऐसा नहीं है कि उनमें काबिलियत की कमी थी। जब भी उन्हें अवसर मिला, उन्होंने अपनी योग्यता और कड़ी मेहनत के दम पर खुद को साबित किया। आदित्यनाथ ने कहा कि इसी मिट्टी में जन्मे या जिनके पूर्वज यहां जन्मे थे, ऐसे लोग आज दुनिया के अलग-अलग देशों में राष्ट्राध्यक्ष के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, अगर यहां का कोई व्यक्ति मॉरिशस या फिजी में राष्ट्राध्यक्ष बन सकता था तो क्या वह इस क्षेत्र की बीमारी, बेरोजगारी और बाढ़ जैसी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता था? वे कर सकते थे। लेकिन उन्हें मंच नहीं मिला, उन्हें कभी प्रोत्साहित नहीं किया गया। वर्ष 1947 से पहले की स्थिति को समझा जा सकता है, जब देश औपनिवेशिक शासन के अधीन था, लेकिन 1947 के बाद किसने रोका था? उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने जिस शासन व्यवस्था को अपनाया, वह संसदीय लोकतंत्र था। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सत्तारूढ़ दल और विपक्ष, दोनों से मिलकर बनता है और यह तभी मजबूत होता है जब दोनों इसे मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते हैं। आदित्यनाथ ने कहा, यह जनता की उम्मीदों को पूरा करने का आधार है। दूसरे शब्दों में, सामाजिक सीढ़ी के सबसे निचली पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज प्रशासन तक पहुंचनी चाहिए। विपक्ष को अपनी रचनात्मक भूमिका निभाते हुए जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा, और अगर उस जिम्मेदारी को निभाते हुए कोई कहे कि मैं लोगों की बात नहीं सुनूंगा, तो क्या उनके लिए लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना संभव है?