आईबीबीआई का व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला प्रािढया के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
प्रकाशित: 14-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटर से जुड़ी दिवाला समाधान प्रािढया के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है।
इनमें गारंटर के संबंधित पक्षों को भुगतान योजना पर मतदान से बाहर रखना शामिल है। इसके अलावा, आईबीबीआई ने समाधान प्रािढया के दौरान व्यक्तिगत गारंटर की संपत्तियों का मूल्यांकन अनिवार्य करने और पुनर्भुगतान योजना पर लेनदारों के विचार-विमर्श को बैठक के रिकॉर्ड में दर्ज करने की व्यवस्था करने का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित संशोधनों में दिवाला समाधान प्रािढया के दौरान ऐसे लेनदेन की पहचान कर उनकी जानकारी देने का भी प्रावधान है, जिन्हें नियमों के तहत चुनौती देकर रद्द कराया जा सकता है। इनमें किसी खास लेनदार को प्राथमिकता देकर किया गया लेनदेन, संपत्ति का कम मूल्य पर किया गया सौदा, धोखाधड़ी वाला लेनदेन और अनुचित या अत्यधिक शर्तों पर लिया गया ऋण शामिल है। ये प्रस्ताव एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवाला मामले की पृष्ठभूमि में आए हैं। इस मामले में एक समझौता योजना के तहत लेनदारों को चंद्रा की निजी संपत्ति से करीब 6.5 करोड़ रुपये ही मिलने का प्रस्ताव था, जबकि उनके खिलाफ करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावे थे। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने एक सितंबर को चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या उनका हस्तांतरण करने से रोक दिया था और मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किए थे। यह मामला अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष भी है। असहमत लेनदारों ने पुनर्भुगतान योजना को चुनौती दी है। आईबीबीआई ने 12 सितंबर को जारी एक चर्चा पत्र में व्यक्तिगत गारंटर से जुड़ी दिवाला प्रािढया के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया। इनमें गारंटर से जुड़े संबंधित पक्षों को पुनर्भुगतान योजना पर मतदान से बाहर करना शामिल है। फिलहाल, व्यक्तिगत गारंटर से जुड़ा कोई सहयोगी पुनर्भुगतान योजना पर मतदान नहीं कर सकता है। आईबीबीआई ने अब सुझाव दिया है कि गारंटर से जुड़े संबंधित पक्ष का मतदान हिस्सा शून्य माना जाए। साथ ही, समाधान पेशेवर द्वारा तैयार की जाने वाली लेनदारों की सूची में अलग से यह बताया जाए कि कोई लेनदार गारंटर का संबंधित पक्ष है या नहीं। आईबीबीआई ने कहा कि उचित मूल्य, संपत्तियों से वास्तव में प्राप्त की जा सकने वाली राशि और मूल्यांकन रिपोर्ट को पुनर्भुगतान योजना के साथ लेनदारों के सामने विचार के लिए रखा जाना चाहिए। इससे लेनदार पुनर्भुगतान योजना का तथ्यों के आधार पर और व्यावसायिक रूप से उचित आकलन कर सकेंगे। नियामक ने यह भी प्रस्ताव किया है कि समाधान पेशेवर को लेनदारों की बैठक के कार्यवृत्त में पुनर्भुगतान योजना पर लेनदारों के बीच हुई चर्चा और उनके फैसले के कारण दर्ज करना होगा। यदि पुनर्भुगतान योजना के तहत मिलने वाली राशि लेनदारों के स्वीकार किए गए दावों या गारंटर की संपत्तियों से मिलने वाली अनुमानित राशि से काफी कम है, तो आईबीबीआई ने प्रस्ताव किया है कि लेनदारों को यह स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा कि उन्होंने दिवाला प्रािढया शुरू करने के बजाय पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देना बेहतर विकल्प क्यों माना।
इनमें गारंटर के संबंधित पक्षों को भुगतान योजना पर मतदान से बाहर रखना शामिल है। इसके अलावा, आईबीबीआई ने समाधान प्रािढया के दौरान व्यक्तिगत गारंटर की संपत्तियों का मूल्यांकन अनिवार्य करने और पुनर्भुगतान योजना पर लेनदारों के विचार-विमर्श को बैठक के रिकॉर्ड में दर्ज करने की व्यवस्था करने का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित संशोधनों में दिवाला समाधान प्रािढया के दौरान ऐसे लेनदेन की पहचान कर उनकी जानकारी देने का भी प्रावधान है, जिन्हें नियमों के तहत चुनौती देकर रद्द कराया जा सकता है। इनमें किसी खास लेनदार को प्राथमिकता देकर किया गया लेनदेन, संपत्ति का कम मूल्य पर किया गया सौदा, धोखाधड़ी वाला लेनदेन और अनुचित या अत्यधिक शर्तों पर लिया गया ऋण शामिल है। ये प्रस्ताव एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवाला मामले की पृष्ठभूमि में आए हैं। इस मामले में एक समझौता योजना के तहत लेनदारों को चंद्रा की निजी संपत्ति से करीब 6.5 करोड़ रुपये ही मिलने का प्रस्ताव था, जबकि उनके खिलाफ करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावे थे। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने एक सितंबर को चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या उनका हस्तांतरण करने से रोक दिया था और मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किए थे। यह मामला अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष भी है। असहमत लेनदारों ने पुनर्भुगतान योजना को चुनौती दी है। आईबीबीआई ने 12 सितंबर को जारी एक चर्चा पत्र में व्यक्तिगत गारंटर से जुड़ी दिवाला प्रािढया के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया। इनमें गारंटर से जुड़े संबंधित पक्षों को पुनर्भुगतान योजना पर मतदान से बाहर करना शामिल है। फिलहाल, व्यक्तिगत गारंटर से जुड़ा कोई सहयोगी पुनर्भुगतान योजना पर मतदान नहीं कर सकता है। आईबीबीआई ने अब सुझाव दिया है कि गारंटर से जुड़े संबंधित पक्ष का मतदान हिस्सा शून्य माना जाए। साथ ही, समाधान पेशेवर द्वारा तैयार की जाने वाली लेनदारों की सूची में अलग से यह बताया जाए कि कोई लेनदार गारंटर का संबंधित पक्ष है या नहीं। आईबीबीआई ने कहा कि उचित मूल्य, संपत्तियों से वास्तव में प्राप्त की जा सकने वाली राशि और मूल्यांकन रिपोर्ट को पुनर्भुगतान योजना के साथ लेनदारों के सामने विचार के लिए रखा जाना चाहिए। इससे लेनदार पुनर्भुगतान योजना का तथ्यों के आधार पर और व्यावसायिक रूप से उचित आकलन कर सकेंगे। नियामक ने यह भी प्रस्ताव किया है कि समाधान पेशेवर को लेनदारों की बैठक के कार्यवृत्त में पुनर्भुगतान योजना पर लेनदारों के बीच हुई चर्चा और उनके फैसले के कारण दर्ज करना होगा। यदि पुनर्भुगतान योजना के तहत मिलने वाली राशि लेनदारों के स्वीकार किए गए दावों या गारंटर की संपत्तियों से मिलने वाली अनुमानित राशि से काफी कम है, तो आईबीबीआई ने प्रस्ताव किया है कि लेनदारों को यह स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा कि उन्होंने दिवाला प्रािढया शुरू करने के बजाय पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देना बेहतर विकल्प क्यों माना।