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18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक: मोदी के नेतृत्व में दिल्ली घोषणापत्र सर्वसम्मति से पारित

प्रकाशित: 14-09-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक: मोदी के नेतृत्व में दिल्ली घोषणापत्र सर्वसम्मति से पारित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में आयोजित 18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में दर्ज हो गई है। 12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में संपन्न इस शिखर सम्मेलन में ‘न्यू दिल्ली घोषणापत्र 2026' बिना किसी आपत्ति के सर्वसम्मति से पारित हुआ। यह उपलब्धि भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण है और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित अब तक की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय बैठकों में गिनी जा रही है। विषय था-“ँल्ग्त्dग्हु दि Rाsग्त्गहम, घ्हहदन्atग्दह, ण्ददजूग्दह aह् एल्staग्हंग्त्ग्tब्''। रात भर चली बातचीत के बाद भी सभी सदस्य एक स्वर में खड़े हुए, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी जीत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण की अधिक मजबूत और निर्णायक शक्ति बनाने का आ"ान किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों का सबसे बड़ा भार दक्षिण पर है, पर निर्णयों की कतार में वह पीछे खड़ा रहता है। इसलिए “विशेषाधिकार के पिरामिड'' को “साझेदारी के मंच'' में बदलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि वैश्विक दक्षिण केवल नियम लेने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला बने। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता; पाठ आधारित वार्ता की समयसीमा और ठोस परिणाम जरूरी हैं। चीन और रूस ने भारत तथा ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में बड़ा दायित्व देने के समर्थन को दोहराया। समुद्री सुरक्षा पर मोदी जी ने नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव रखा। आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता, 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले की कड़ी निंदा, सीमा-पार आतंक और आतंक वित्तपोषण घोषणापत्र में प्रमुखता से आए।
घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और कार्बन बॉर्डर उपायों का विरोध, विश्व व्यापार संगठन में सुधार, स्थानीय मुद्रा में व्यापार और सीमा-पार भुगतान तंत्र को तेज करने का संकल्प, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला, विकास व कर सहयोग तथा पश्चिम एशिया में अधिकतम संयम और संवाद का आ"ान भी शामिल है। भारत की अध्यक्षता में विकास व वृद्धि पर एक टास्क फोर्स बनाने का फैसला हुआ। ब्रिक्स ने कहा कि यह मंच किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अधिक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के पक्ष में है।
भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत का संकेत भी इस बैठक का बड़ा संदेश रहा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को ब्रिक्स की सफल मेजबानी पर बधाई दी और कहा कि ब्रिक्स उभरते बाजारों तथा विकासशील देशों के लिए दुनिया का सबसे प्रभावशाली सहयोग मंच बन चुका है। सात वर्षों बाद शी की भारत यात्रा और घंटे भर की द्विपक्षीय वार्ता में उन्होंने कहा कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार हैं; दोनों एक-दूसरे के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं। सीमा पर शांति, रणनीतिक दीर्घकालिक दृष्टि और संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन तथा जी-20 में समन्वय पर सहमति बनी। चीन अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स की सराहना करते हुए जी-7 पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विश्व जीडीपी का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ब्रिक्स देशों ने दिया, जबकि तथाकथित जी-7 का योगदान मात्र 29 प्रतिशत रहा। वैश्विक विकास में ब्रिक्स की हिस्सेदारी आधे से अधिक रही, जी-7 की केवल 18 प्रतिशत। पुतिन ने पूछा कि इसे ‘ग्रेट सेवन' क्यों कहा जाता है।
भारत जैसे महाशक्ति द्वारा आयोजित यह 18वीं ब्रिक्स बैठक सर्वसम्मति, सुधार एजेंडा और भारत-चीन संवाद के कारण एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। इसकी गूंज इस्लामाबाद के उन गलियारों तक पहुंची है जहां पहलगाम की निंदा को असहज माना गया, और वाशिंगटन के उन केंद्रों तक जहां बहुध्रुवीय व्यवस्था तथा व्यापार-भुगतान के वैकल्पिक रास्ते अब नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। वैश्विक दक्षिण अब केवल दर्शक नहीं, नियम और दिशा तय करने वाला मंच बनने की ओर बढ़ रहा है।
-आदित्य नरेन्द्र