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क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार न बनाएंः मोदी

प्रकाशित: 14-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार न बनाएंः मोदी
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का दुनियाभर में आम लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने तथा मानवता के हित में आगे बढ़ने के लिए ब्रिक्स देशों को सहयोग और समावेशी विकास के माध्यम से मजबूत होकर उभरना होगा।
भारत द्वारा आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आगाह किया कि इससे साझा प्रगति और समृद्धि की राह में बाधा आ सकती है। मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों का ब्रिक्स पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि इस मंच पर उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है और उनके लिए समाधान थोपे नहीं जाते, बल्कि उन्हें साझेदार बनाकर समाधान तैयार किए जाते हैं। ग्लोबल साउथ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। लगभग 49.5 प्रतिशत वैश्विक आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स का वार्षिक शिखर सम्मेलन लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला, स्टार्टअप और पांमक रोगों से निपटने सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अहम परिणामों के साथ संपन्न हुआ। मोदी ने कहा, हमारी परिस्थितियां और वास्तविकताएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन आपसी सहयोग के माध्यम से हम सभी मिलकर आगे बढ़ सकते हैं और मानवता के कल्याण के लिए काम कर सकते हैं। हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के हित में हो। मोदी ने यह टिप्पणी ब्रिक्स समूह के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में की। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा विभाजित भू-राजनीतिक माहौल से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों की लचीलापन बढ़ाने की क्षमता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के एजेंडे को चार स्तंभों - लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि इन चार स्तंभों के आधार पर भारत ने ब्रिक्स के माध्यम से समावेशी वैश्विक विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स के भीतर विकसित किए गए समाधानों का लाभ केवल इस समूह तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप अपनाने योग्य और सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि आप सभी के सहयोग और समर्थन से हम अपनी साझा सोच को ऐसे सहयोग में बदलने में सफल रहे हैं, जिसमें सभी पक्षों को लाभ हो। मोदी ने कहा, आज दुनिया में संघर्ष और तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और इसका आम लोगों के जीवन पर लगातार नकारात्मक तथा दूरगामी प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा, महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने दिखाया है कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।