दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष का चुनाव ना होना खड़े कर रहा है कई सवाल
प्रकाशित: 14-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
कृष्ण देव पाठक
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के गठन की प्रािढया अभी भी अटकी हुई है उसका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अभी होता नजर नहीं आ रहा है जबकि दिल्ली सरकार द्वारा 29 जुलाई को जब अपने चार सदस्य नामित किए गए थे उसे समय लगा था कि शायद अगस्त के पहले सप्ताह में चुनाव कार्पाम घोषित कर जल्द चुनाव कर लिए जाएंगे लेकिन यह स्थिति अभी भी वही की वही है डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन व अन्य कामों में दिक्कतें आ रही है लेकिन इसका जवाब देने को कोई तैयार नहीं है।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल का गठन जब दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी पहली बार विधानसभा चुनाव जीत कर 1993 में सत्ता में आई थी उसके बाद किया गया था और उसके बाद जब 2025 में फिर सत्ता में आई तब इसे भंग कर दिया गया और इसमेंकी शिकायतों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह की सिफारिश पर उसे समय के उपराज्यपाल वीके सक्सेना आने से भंग कर दिया था लेकिन उसके बाद आज तक सिर्फ इस विषय में कुछ ठोस नहीं हुआ मेडिकल काउंसिल के चुनाव के बीच में एक रपट जरूर आई थी उसे भी राजनीति से प्रेरित कहा गया था लेकिन उसके बाद अभी तक कुछ नहीं हुआ जिन गिरीश त्यागी के ऊपर रजिस्ट्रार रहते हुए आरोप लगे थे गिरीश त्यागी वही गिरीश त्यागी मेडिकल काउंसिल के सदस्य का चुनाव भी रिकॉर्ड वोट से चुनाव जीत चुके हैं हालांकि उसके बाद अन्य सदस्यों के हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी समर्थकों का कब्जा हो गया चार सदस्य भी सरकार अपने नामित कर चुकी है उसके बाद अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं कराया जा रहा इस पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में कहां जा रहा है की स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह को कहीं ना कहीं अब लग रहा है की दिल्ली के भाजपा के डॉक्टरों की राजनीति जितनी वह आसान समझ रहे थे उतनी नहीं है दिखाने को डॉक्टर कुछ करते हैं लेकिन बाद में सब एकजुट नजर आते हैं और इस मामले में कुछ नहीं कर पाए दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के 600 करोड़ के कथित घोटाले मैं सरकार को परेशान कर रखा है।दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष उपाध्यक्ष और अन्य कमेटी के गठन न होने को लेकर डॉक्टर के अलग-अलग ग्रुपों में अलग-अलग राय हैं उनका कहना है कि इस काउंसिल पर कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति हावी हो रही है जिसमें सब नियम कानून एक तरफ रख दिए गए हैं और इतनी महत्वपूर्ण काउंसिल के अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव न करना बहुत ही अजीब है।
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के गठन की प्रािढया अभी भी अटकी हुई है उसका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अभी होता नजर नहीं आ रहा है जबकि दिल्ली सरकार द्वारा 29 जुलाई को जब अपने चार सदस्य नामित किए गए थे उसे समय लगा था कि शायद अगस्त के पहले सप्ताह में चुनाव कार्पाम घोषित कर जल्द चुनाव कर लिए जाएंगे लेकिन यह स्थिति अभी भी वही की वही है डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन व अन्य कामों में दिक्कतें आ रही है लेकिन इसका जवाब देने को कोई तैयार नहीं है।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल का गठन जब दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी पहली बार विधानसभा चुनाव जीत कर 1993 में सत्ता में आई थी उसके बाद किया गया था और उसके बाद जब 2025 में फिर सत्ता में आई तब इसे भंग कर दिया गया और इसमेंकी शिकायतों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह की सिफारिश पर उसे समय के उपराज्यपाल वीके सक्सेना आने से भंग कर दिया था लेकिन उसके बाद आज तक सिर्फ इस विषय में कुछ ठोस नहीं हुआ मेडिकल काउंसिल के चुनाव के बीच में एक रपट जरूर आई थी उसे भी राजनीति से प्रेरित कहा गया था लेकिन उसके बाद अभी तक कुछ नहीं हुआ जिन गिरीश त्यागी के ऊपर रजिस्ट्रार रहते हुए आरोप लगे थे गिरीश त्यागी वही गिरीश त्यागी मेडिकल काउंसिल के सदस्य का चुनाव भी रिकॉर्ड वोट से चुनाव जीत चुके हैं हालांकि उसके बाद अन्य सदस्यों के हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी समर्थकों का कब्जा हो गया चार सदस्य भी सरकार अपने नामित कर चुकी है उसके बाद अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं कराया जा रहा इस पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में कहां जा रहा है की स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह को कहीं ना कहीं अब लग रहा है की दिल्ली के भाजपा के डॉक्टरों की राजनीति जितनी वह आसान समझ रहे थे उतनी नहीं है दिखाने को डॉक्टर कुछ करते हैं लेकिन बाद में सब एकजुट नजर आते हैं और इस मामले में कुछ नहीं कर पाए दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के 600 करोड़ के कथित घोटाले मैं सरकार को परेशान कर रखा है।दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष उपाध्यक्ष और अन्य कमेटी के गठन न होने को लेकर डॉक्टर के अलग-अलग ग्रुपों में अलग-अलग राय हैं उनका कहना है कि इस काउंसिल पर कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति हावी हो रही है जिसमें सब नियम कानून एक तरफ रख दिए गए हैं और इतनी महत्वपूर्ण काउंसिल के अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव न करना बहुत ही अजीब है।