दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्रों में जमा हुए 41 टन से अधिक पुराने कपड़े
प्रकाशित: 14-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली में पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें उचित तरीके से निपटाने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र उपयोगी विकल्प बनकर सामने आए हैं। दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनाए गए इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने और उपयोग में नहीं आने वाले कपड़े जमा करा सकते हैं। इन कपड़ों को दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग की प्रािढया से उपयोगी सामग्री में बदला जा रहा है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान तो दे ही रहे हैं, साथ ही उन्हें पुन उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान देने के साथ-साथ उन्हें पुन उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। दिल्लीवासियों की भागीदारी से इस व्यवस्था को और व्यापक बनाया जा सकता है। हमारा प्रयास है कि लोगों के लिए पुराने कपड़े देने की सुविधा सहज और सुलभ हो तथा इनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने के प्रयासों को और मजबूती मिले। 31 अगस्त तक 10 अर्पण केंद्रों पर कुल 3,940 लोगों ने 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा कराए। इनमें डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल केंद्र पर सबसे अधिक 9,861.40 किलोग्राम, जबकि शालीमार बाग केंद्र पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। पंजाबी बाग पश्चिम में 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम कपड़ों का संग्रह हुआ। इसके अलावा मयूर विहार-1 में 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-ककरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। पांच केंद्र 3 अगस्त को शुरू किए गए थे, जबकि अन्य केंद्र 12 और 17 अगस्त को चालू हुए। अर्पण केंद्रों पर जमा कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनके उपयोग के अनुसार आगे भेजा जा रहा है। प्राप्त सामग्री का एक हिस्सा पुन उपयोग और अपसाइक्लिंग के लिए अलग किया गया, जबकि बड़ी मात्रा को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया।
नई दिल्ली। दिल्ली में पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें उचित तरीके से निपटाने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र उपयोगी विकल्प बनकर सामने आए हैं। दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनाए गए इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने और उपयोग में नहीं आने वाले कपड़े जमा करा सकते हैं। इन कपड़ों को दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग की प्रािढया से उपयोगी सामग्री में बदला जा रहा है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान तो दे ही रहे हैं, साथ ही उन्हें पुन उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान देने के साथ-साथ उन्हें पुन उपयोग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। दिल्लीवासियों की भागीदारी से इस व्यवस्था को और व्यापक बनाया जा सकता है। हमारा प्रयास है कि लोगों के लिए पुराने कपड़े देने की सुविधा सहज और सुलभ हो तथा इनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने के प्रयासों को और मजबूती मिले। 31 अगस्त तक 10 अर्पण केंद्रों पर कुल 3,940 लोगों ने 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा कराए। इनमें डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल केंद्र पर सबसे अधिक 9,861.40 किलोग्राम, जबकि शालीमार बाग केंद्र पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। पंजाबी बाग पश्चिम में 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम कपड़ों का संग्रह हुआ। इसके अलावा मयूर विहार-1 में 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-ककरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। पांच केंद्र 3 अगस्त को शुरू किए गए थे, जबकि अन्य केंद्र 12 और 17 अगस्त को चालू हुए। अर्पण केंद्रों पर जमा कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनके उपयोग के अनुसार आगे भेजा जा रहा है। प्राप्त सामग्री का एक हिस्सा पुन उपयोग और अपसाइक्लिंग के लिए अलग किया गया, जबकि बड़ी मात्रा को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया।