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एयरप्रॉक्स घटना में एटीसी की प्रक्रियागत चूक, एएआई कदम उ"ाए: एएआईबी

प्रकाशित: 25-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने भारतीय हवाई क्षेत्र में 2024 में हुई एयरप्रॉक्स घटना में प्रक्रियागत चूक की ओर इशारा करते हुए कहा है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को हवाई यातायात नियंत्रकों के बीच कार्यभार के हस्तांतरण और उसे संभालने के दौरान होने वाली बै"क को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उचित उपाय करने चाहिए।
एयरप्रॉक्स वह स्थिति है जब दो या दो से अधिक विमान हवा में एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं। आम तौर पर कार्यभार हस्तांतरण यानी हैंडिंग ओवर वॉच (एचओडब्ल्यू) और कार्यभार संभालने यानी टेकिंग ओवर वॉच (टीओडब्ल्यू) का मतलब हवाई यातायात नियंत्रक की एक पाली समाप्त होने पर दूसरी पाली को जिम्मेदारी सौंपने एवं संभालने की प्रक्रिया से है। मुंबई फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (एफआईआर) में एल अल इजराइल एयरलाइंस और कतर एयरवेज के दो बोइंग-777 विमानों से जुड़ी एयरप्रॉक्स घटना पर जारी 41 पृष्"ाsं की अंतिम जांच रिपोर्ट में एएआईबी ने हवाई यातायात नियंत्रकों को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के बारे में जागरूक करने सहित कई सिफारिशें की हैं। यह एयरप्रॉक्स घटना 24 मार्च, 2024 को हुई थी जिसमें दोनों विमान निर्धारित सुरक्षित दूरी से अधिक करीब आ गए थे। कतर एयरवेज की उड़ान क्यूटीआर8ई दोहा से माले जा रही थी जबकि एल अल इजराइल एयरलाइंस की उड़ान ईएलवाई-081 तेल अवीव से बैंकॉक जा रही थी। एएआईबी ने इस सप्ताह सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में कहा, इस गंभीर घटना का मुख्य कारण सभी ड्यूटी हवाई यातायात नियंत्रकों (डीएटीसीओ) द्वारा सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना था। रिपोर्ट में कहा गया कि तीनों ड्यूटी हवाई यातायात नियंत्रकों ने एक या अधिक एसओपी का पालन नहीं किया। इसलिए एएआई को सभी हवाई यातायात नियंत्रकों को प्रशिक्षण के माध्यम से एसओपी और ऐसी गंभीर घटनाओं का कारण बनने वाली सुरक्षा संबंधी चूकों के बारे में जागरूक करना चाहिए। एएआईबी के अनुसार, इस गंभीर घटना का संभावित कारण प्रक्रियागत नियंत्रण तकनीक की मूल आवश्यकता से विचलन था।
इसमें टकराव का पता लगाने के लिए फ्लाइट प्रोग्रेस स्ट्रिप्स की निगरानी और अद्यतन करने में कमी रही तथा स्वचालित प्रणाली (सीसीडब्ल्यूएस) से मिलने वाले अलर्ट पर अत्यधिक निर्भरता रही।
रिपोर्ट में कहा गया कि विमानों की स्थिति को भी प्रणाली के अनुसार अद्यतन नहीं किया गया।
इसमें कहा गया, इसके अलावा, मैनुअल ऑफ एयर ट्रैफिक सर्विसेज (मैट्स-। और मैट्स-2) में कार्यभार संभालने व हस्तांतरित करने तथा जानकारी साझा करने (ब्रीफिंग) से संबंधित सुरक्षा प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान पहले और दूसरे ड्यूटी हवाई यातायात नियंत्रक ने एचओडब्ल्यू और टीओडब्ल्यू ब्रीफिंग के बारे में परस्पर विरोधी बयान दिए।
एएआईबी ने कहा, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि एएआई की मौजूदा एचओडब्ल्यू और टीओडब्ल्यू ब्रीफिंग प्रणाली में कमियां हैं और इसमें सुधार की आवश्यकता है।
उसने सिफारिश की कि एएआई इस गंभीर घटना के मद्देनजर देश में हवाई यातायात नियंत्रकों द्वारा अपनाई जा रही मौजूदा एचओडब्ल्यू और टीओडब्ल्यू प्रक्रिया की प्रभावशीलता का आकलन करे और विमानन सुरक्षा के हित में इन ब्रीफिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उचित कदम उ"ाए।
रिपोर्ट में कहा गया कि घटना के दौरान पहले ड्यूटी हवाई यातायात नियंत्रक ने प्रशिक्षण ले रहे नियंत्रक के साथ कतर एयरवेज और एल अल इजराइल एयरलाइंस की उड़ानों के बीच विकसित हो रहे संभावित टकराव पर चर्चा या निगरानी नहीं की।
इसलिए एएआई को कार्यस्थल प्रशिक्षण (ओजेटी) की निगरानी प्रणाली को मजबूत करना चाहिए, ताकि प्रशिक्षक विशेष रूप से हवाई यातायात टकराव जैसी स्थितियों में प्रशिक्षु नियंत्रकों पर प्रभावी नजर रख सकें।
रिपोर्ट में कहा गया कि दूसरे ड्यूटी हवाई यातायात नियंत्रक के पास टकराव का पता लगाने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका। तीसरा ड्यूटी हवाई यातायात नियंत्रक भी इसमें विफल रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों विमानों के बीच संभावित टकराव का पता तब चला जब स्वचालित प्रणाली ने इसे चिन्हित किया और चेतावनी अलर्ट जारी हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि सभी हवाई यातायात नियंत्रक स्वचालित प्रणाली से मिलने वाले अलर्ट पर अत्यधिक निर्भर थे।
हवाई यातायात नियंत्रक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अधीन कार्य करते हैं।