महाराष्ट्र में ऊंचे दाम पर नेफेड की बिकवाली से सोयाबीन तिलहन में सुधार
प्रकाशित: 26-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। मंडियों में सोयाबीन की कम आवक के बीच महाराष्ट्र में सहकारी संस्था नेफेड द्वारा ऊंचे दाम पर प्लांट संचालकों को सोयाबीन की बिकवाली करने से देशभर की मंडियों में शनिवार को सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में सुधार दर्ज किया गया। बाजार सूत्रों ने कहा कि मजबूत मांग के चलते मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतों में भी तेजी रही, जबकि गुजरात में ब्रांडेड कंपनियों की बढ़ती मांग के कारण बिनौला तेल में भी सुधार देखा गया। वहीं, ऊंचे भाव पर लिवाली प्रभावित रहने से सरसों तेल-तिलहन के दाम गिर गए। कमजोर कामकाज के बीच सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम स्थिर रहे।
सूत्रों ने बताया कि बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता सीमित है। जिन किसानों को पहले ऊंचे दाम मिल चुके हैं, वे कीमतों में कमी की स्थिति में आवक घटा देते हैं। शनिवार को मंडियों में सोयाबीन की आवक घटकर करीब 55 हजार बोरी रह गई।
नेफेड ने महाराष्ट्र में प्लांट संचालकों को 7,521 रुपये प्रति द्रिंटल के ऊंचे भाव पर सोयाबीन की बिक्री की, जिसमें मालभाड़ा अलग से जोड़ा जाएगा। सूत्रों ने कहा कि जो प्लांट संचालक नेफेड से ऊंचे दाम पर खरीद कर रहे हैं, वहीं किसानों से कम कीमत पर खरीदने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने बताया कि बिनौला तेल की औद्योगिक मांग ब्रांडेड कंपनियों की ओर से मजबूत बनी हुई है, जिससे इसके दाम में सुधार हुआ। वहीं अधिक मांग के कारण मूंगफली तेल की कीमतों में भी तेजी रही। एक्सपेलर से निकला मूंगफली तेल सीधे उपभोग में आता है, जबकि बिनौला तेल को प्रसंस्करण के बाद इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मूंगफली तेल की मांग बढ़ रही है।
इस बीच, ऊंचे भाव के कारण लिवाली कमजोर रहने से सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, कमजोर कारोबार के चलते सोयाबीन तेल, कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के दाम स्थिर रहे।
सूत्रों ने बताया कि बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता सीमित है। जिन किसानों को पहले ऊंचे दाम मिल चुके हैं, वे कीमतों में कमी की स्थिति में आवक घटा देते हैं। शनिवार को मंडियों में सोयाबीन की आवक घटकर करीब 55 हजार बोरी रह गई।
नेफेड ने महाराष्ट्र में प्लांट संचालकों को 7,521 रुपये प्रति द्रिंटल के ऊंचे भाव पर सोयाबीन की बिक्री की, जिसमें मालभाड़ा अलग से जोड़ा जाएगा। सूत्रों ने कहा कि जो प्लांट संचालक नेफेड से ऊंचे दाम पर खरीद कर रहे हैं, वहीं किसानों से कम कीमत पर खरीदने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने बताया कि बिनौला तेल की औद्योगिक मांग ब्रांडेड कंपनियों की ओर से मजबूत बनी हुई है, जिससे इसके दाम में सुधार हुआ। वहीं अधिक मांग के कारण मूंगफली तेल की कीमतों में भी तेजी रही। एक्सपेलर से निकला मूंगफली तेल सीधे उपभोग में आता है, जबकि बिनौला तेल को प्रसंस्करण के बाद इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मूंगफली तेल की मांग बढ़ रही है।
इस बीच, ऊंचे भाव के कारण लिवाली कमजोर रहने से सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, कमजोर कारोबार के चलते सोयाबीन तेल, कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के दाम स्थिर रहे।