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अमरकंटक तथा डिंडोरी के वनों पर साल बोरर का प्रहार

प्रकाशित: 26-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
गोपाल दास बंसल
शहडोल। संभाग और इसके आसपास के जंगलों में हरे पेड़ों पर गहरा संकट छाया हुआ है।. इन जंगलों में बड़ी तादाद में साल के पेड़ हैं।साल के जंगलों से पूरा इलाका भरा हुआ है।
इन दिनों इन्हीं साल के पेड़ों में खतरनाक कीट का अटैक हुआ है,. ये कीट साल के वनों को खोखला कर रहे हैं.। साल बोरर कीट का कहर डिंडोरी के जंगलों के साथ ही अमरकंटक वन परिक्षेत्र में है। ये कीट एक बार पेड़ में लग जाता हो तो उसका खात्मा करके ही मानता है।.खतरे को देखते हुए वन विभाग भी एक्टिव हो गया है।. इस समस्या से निपटने के लिए इन कीटों को पकड़ कर लाने पर प्रति कीट की दर से राशि दी जा रही है. अनूपपुर के राजेंद्रग्राम उपवन मंडल के एसडीओ दिगेंद्र सिंह पटेल बताते हैं "अमरकंटक वन परिक्षेत्र में साल के वनों पर साल बोरर कीट का प्रकोप हुआ है।.साल 2026-27 के सर्वे में अमरकंटक वन परिक्षेत्र के 9,535 पेड़ पांमित पाए गए हैं।. साल बोरर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देहरादून से वैज्ञानिकों की टीम भी अमरकंटक पहुंची. टीम ने प्रभावित क्षेत्र का अध्ययन किया था,. पांमण के कारणों और प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर शोध करके दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जा रही हैत्. वन विभाग लगातार इन कीड़ों को पकड़ने के कार्य में जुटा हुआ है. वन विभाग अब तक 15000 से ज्यादा कीड़े पकड़ चुका है। साल बोरर कीट काफी खतरनाक तरीके से पेड़ों पर अटैक करता है और उसे पूरी तरह से खत्म कर देता है। ये कीट पेड़ की छाल को भेद कर तने के अंदर सुरंग बनाते हैं,, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगता है.। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक "इससे पहले साल 1995-96 में भी साल बोरर का बड़ा अटैक हुआ था. इस बार पांमण शुरुआती स्तर पर होने के कारण नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।. साल बोरर कीट 30 वर्षों में एक प्राकृतिक पा का पालन करता है।. पिछला बड़ा प्रकोप भी 1995-96 के आसपास हुआ था. 2026-27 में इसका प्रकोप एक बार फिर से बढ़ने की आशंका है, जिसका असर दिखना शुरू हो गया है। मानसून की शुरुआत के साथ ही ये खतरनाक कीड़े पेड़ों से बाहर निकल आए हैं, जिससे वन विभाग को पांमण को नियंत्रित करने के प्रयास भी तेज करना पड़ रहे हैं. एसडीओ दिगेंद्र सिंह पटेल बताते हैं "अमरकंटक क्षेत्र का जो एटमॉस्फेयर अभी है, वह साल बोरर कीट के हिसाब से ही है. साल बोरर कीट को टेंपरेचर 28 डिग्री सेल्सियस और ह्यूमिडिटी 91ज्ञ् चाहिए और यह अनुकूल स्थिति है. कीट को तेजी से ग्रोथ करने के लिए वातावरण फिलहाल अमरकंटक में कायम है. अगर ये टेंपरेचर और ह्यूमिडिटी कम हो जाएगी तो कीट का भी कम ग्रोथ होगा। एसडीओ दिगेंद्र सिंह पटेल बताते हैं "साल बोरर कीट को कंट्रोल करने के लिए ट्रैप ट्री चलाया जा रहा है, जिसमें साल के साइड के या टेढ़ी-मेढ़ी डालों को काट कर उनके दोनों सिरों को लगभग दो फीट तक कूटा जाता है, जिससे उसका रस निकलने लगे, क्योंकि ये कीट उसी की रस से आकर्षित होते हैं. रस के सुगंध से ये कीट आकर्षित होते हैं. सुबह इन कीटों का ज्यादा प्रकोप होता है,.उसी समय इन कीटों को पकड़ने का काम किया जाता है।
इसी को ट्रैप ट्री कहते हैं. यह प्रािढया अमरकंटक के जंगलों में लगातार चल रही है. जहां के जंगल में कीट के ज्यादा पैच होते हैं, ज्यादा पेड़ प्रभावित होते हैं. ऐसे स्थानों पर ज्यादा टी ट्रैप की प्रािढया की जाती है. इसके अलावा ग्रामीणों को भी कहा गया है कि पकड़ने पर ?2 प्रति कीट के हिसाब से उन्हें पारिश्रमिक दिया जाएगा। अमरकंटक से लगा हुआ डिंडोरी जिले का जंगल भी है. डिंडोरी में साल बोरर कीट का और ज्यादा प्रकोप है. डिंडोरी में 14 लाख से अधिक कीड़े एकत्र किए जा चुके हैं, जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया जाएगा. डिंडोरी जिले में वन विभाग ने लगभग डेढ़ लाख साल के पेड़ों को काटने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है. अधिकारियों का कहना कि जिले में 1,47,380 पेड़ प्रभावित हुए हैं, यदि अनुमति मिल जाती है तो पेड़ों की कटाई सितंबर-अक्टूबर में शुरू हो सकती है. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 21 जुलाई 2026 तक डिंडोरी में 14 लाख से अधिक कीड़े खरीदे जा चुके हैं. कुछ स्थानीय निवासी कीड़ों को विभाग को बेचने से पहले उनकी माला बना रहे हैं, जिससे उनकी गिनती करना आसान हो. डिंडोरी में साल बोरर पांमण से प्रभावित 1,47,380 साल के पेड़ों की पहचान की गई है.