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मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि की समीक्षा जारी, जल्द मंत्रिमंडल में जाएगा प्रस्ताव : सचिव अनुराधा "ाकुर

प्रकाशित: 08-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। वित्त मंत्रालय मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) को निवेशकों के अधिक अनुकूल बनाने के लिए उसकी समीक्षा कर रहा है और इसे जल्द ही मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा। आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा "ाकुर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने यहां प्रतिष्"ित आर्थिक शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, wमॉडल बीआईटी की समीक्षा जारी है। वैश्विक गतिविधियों और अब तक के अनुभव के आधार पर कई प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है। यह प्रक्रिया अभी जारी है और इस पर व्यापक परामर्श हो रहा है। द्विपक्षीय निवेश संधि दो देशों के बीच ऐसा समझौता होती है, जिसका उद्देश्य एक-दूसरे के यहां किए गए निवेश को बढ़ावा देना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। ऐसे समझौतों में विदेशी निवेशकों को कुछ गारंटी मिलती हैं और विवाद की स्थिति में वे मेजबान देश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा ले सकते हैं। "ाकुर ने कहा, निवेश वार्ताओं और व्यापार वार्ताओं में महत्वपूर्ण अंतर होता है। निवेश संरक्षण संधियों में निवेशक विवाद की स्थिति में सीधे सरकार को मध्यस्थता में ले जा सकते हैं, जबकि व्यापार समझौतों में विवाद समाधान आमतौर पर संबंधित सरकारों के स्तर पर होता है, जहां बातचीत और कूटनीतिक लचीलापन ज्यादा होता है।
उन्होंने कहा कि भारत से विदेशों में होने वाले निवेश (ओडीआई) की मात्रा बढ़ने के साथ भारतीय कंपनियों को विदेशों में पर्याप्त सुरक्षा मिलना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा, wअब हमारी बातचीत का यह नया आयाम है कि भारतीय कंपनियों को भी उन देशों में सुरक्षा मिले, जहां वे निवेश कर रही हैं।w
मौजूदा मॉडल बीआईटी को 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी, लेकिन कई विकसित देशों ने इसके कुछ प्रावधानों, खासकर विवाद समाधान से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। इसी कारण इसकी समीक्षा आवश्यक हो गई है।
विदेशी निवेश को लेकर उ" रहे सवालों पर "ाकुर ने कहा कि देश में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन शुद्ध एफडीआई में थोड़ी कमी आई है।
उन्होंने शुद्ध एफडीआई में गिरावट के पीछे कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई को वजह माने जाने से इनकार करते हुए कहा कि ये कार्वाइयां प्रक्रिया-आधारित एवं पारदर्शी होती हैं और अनावश्यक कार्रवाई पर रोक लगाई जाती है।
सचिव ने कहा कि एफडीआई कई कारणों से देशों में आता है, लेकिन व्यापक रूप से यह अलग-अलग स्थानों से बेहतर रिटर्न और स्थिरता की तलाश में आता है।