वैमानिकी क्षेत्र में अधिक भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की जरूरत : नायडू
प्रकाशित: 11-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय विमानन क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अपार अवसर हैं और वैश्विक वैमानिकी बाजार में अधिक भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नायडू ने कहा कि वैश्विक वैमानिकी कंपनियों की भारत के विमानन क्षेत्र में काफी रुचि है। भारतीय विमानन कंपनियों ने 1,600 से अधिक विमानों के ऑर्डर दिए हैं। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि भारत केवल कलपुर्जों की असेंबली का केंद्र नहीं हो सकता, बल्कि यहां कलपुर्जों का डिजाइन तैयार करने, उनका प्रमाणन करने और विनिर्माण करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है। सम्मेलन में नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत में विमानों के विनिर्माण के लिए विभिन्न मॉडल पर विचार किया जा रहा है। बोइंग के भारत एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि कंपनी हर साल भारत से करीब 14,000 करोड़ रुपये मूल्य के उत्पाद और सेवाएं खरीदती है। विमान विनिर्माता कंपनी के भारत में करीब 300 आपूर्तिकर्ता हैं, जिनमें से 25 प्रतिशत एमएसएमई हैं।
नायडू ने कहा कि वैश्विक वैमानिकी कंपनियों की भारत के विमानन क्षेत्र में काफी रुचि है। भारतीय विमानन कंपनियों ने 1,600 से अधिक विमानों के ऑर्डर दिए हैं। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि भारत केवल कलपुर्जों की असेंबली का केंद्र नहीं हो सकता, बल्कि यहां कलपुर्जों का डिजाइन तैयार करने, उनका प्रमाणन करने और विनिर्माण करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है। सम्मेलन में नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत में विमानों के विनिर्माण के लिए विभिन्न मॉडल पर विचार किया जा रहा है। बोइंग के भारत एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि कंपनी हर साल भारत से करीब 14,000 करोड़ रुपये मूल्य के उत्पाद और सेवाएं खरीदती है। विमान विनिर्माता कंपनी के भारत में करीब 300 आपूर्तिकर्ता हैं, जिनमें से 25 प्रतिशत एमएसएमई हैं।