छात्रा के पिता का हमलावर गिरफ्तार
प्रकाशित: 08-09-2026 | लेखक: अनिल नरेंद्र
कॉकरोच जनता पाटी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक दलित नाबालिग छात्रा के पिता पर जानलेवा हमला करने के आरोप में कथाकथित अपने आपको हिंदूवादी कार्यकर्ता बताने वाला आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को वेस्ट उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया। स्वतंत्र के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत नई एफआईआर दर्ज की गई है। कुछ घंटे पहले ही आरोपी की गिरफ्तारी की मांग पर कॉकरोच जनता पाटी और यूथ कांग्रेस ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने में प्रदर्शन किया था। पुलिस के 72 घंटे में कार्रवाई के भरोसे के बाद धरना खत्म हुआ। छात्रा का आरोप था कि 23 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पिता से मारपीट की गई थी। इस बीच आरोपी का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कथित तौर पर उनके सिर पर हमले की बात कबूल करते नजर आया। 3 सितम्बर को स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस वीडियो में वह कथित तौर पर एक व्यक्ति पर हमला करने की बात करते दिखाई दिया। उसमें दावा किया कि उसने उस व्यक्ति के सिर पर कड़े से वार किया था, जिसके बाद उस घायल व्यक्ति के सिर पर 7 टांके लगे थे। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि उसे दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के एक फोन पर पुलिस ने उसके खिलाफ सारी कार्रवाई रोक दी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान उनके भाई समान हैं और मोदी जी उनके बड़े भाई हैं। यह भी दावा किया कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। विपक्षी दलों और सीजेपी से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। हालांकि चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज से संबंधों को खारिज कर दिया और भारद्वाज के खिलाफ उनके नाम का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज करा दी। इस कथित हिंदुत्व समर्थक इंफ्लुएंसर ने शेखी के चक्कर में ऐसा बहुत कुछ कह दिया, जो सरासर अपराध की स्वीकारोक्ति ही है। इस बड़बोले युवक के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हो गया है और मुमकिन है कि हत्या के प्रयास का मुकदमा भी दर्ज हो जाए। धर्म के नाम पर उद्गार अपनी जगह है। पर धर्म ऐसे आचरण को कतई स्वीकार नहीं करता है। युवक जो खुलकर चैनलों में दावे करता रहा है। उसकी अवश्य जांच होनी चाहिए और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। पर सवाल यहां यह उठता है कि इस युवा में ऐसी बेहूदा बातें करने की हिम्मत कहां से आई? इसको किसकी राय है? 20 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन में कई कथित गुंडे प्रवृत्ति के लोग प्रदर्शन में कैसे शामिल हुए? इंडियन एक्सप्रेस की एक सनसनीखेज रिपोर्ट में यह बताया गया है कि फेस रिकॉग्नाइज सहयोग सिस्टम से 25 ऐसे अपराधियों के नाम सामने आए हैं जो उस समय में तिहाड़ जेल में बताए जाते हैं। अगर यह सच है तो यह कई गंभीर सवाल उठाते हैं। यह अपराधी जंतर-मंतर में कैसे आये। सवाल तो यह भी किया जा रहा है कि सफेद कपड़ों में हाथ में डंडे लिए वह कैसे लोग थे जो छात्रों पर लाठियां बरसा रहे थे। उन्हीं में यह स्वतंत्र भारद्वाज भी एक था। अब कानून अपना काम करेगा और उम्मीद की जाती है कि कोई राजनीतिक हस्तक्षेप उसमें नहीं होगा।
-अनिल नरेन्द्र
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