इसरो के निजीकरण की चिंताएं खारिज
प्रकाशित: 08-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
बेंगलुरु, (भाषा)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी नारायणन ने इसरो के निजीकरण को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी अब भी एक सरकारी संगठन है।
नारायणन ने कहा कि इसरो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के लिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ मिलकर काम कर रहा है। नारायण की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने चार सितंबर को उन्हें पत्र लिखकर विनिर्माण और संचालन संबंधी कामकाज निजी संस्थाओं को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (बीएसएक्स) के नौवें संस्करण के उद्घाटन समारोह के बाद संवाददाताओं से मुखातिब नारायणन ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्पाम लगभग 64-65 साल पुराना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंतरिक्ष में 56 अंतरिक्ष परिसंपत्तियां मौजूद हैं, जो देश के आम लोगों के लिए सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन हकीकत में इनकी कई गुना अधिक संख्या में जरूरत है। नारायणन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में छह साल पहले शुरू किए गए सुधारों का पा करते हुए कहा कि इनके तहत हमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप कंपनियों को सहयोग देना है तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करना है। उन्होंने कहा, दरअसल, जब भी कोई पीएसएलवी या जीएसएलवी प्रक्षेपित किया जाता है, तो उसके बजट का करीब 80 फीसदी हिस्सा भारतीय उद्योगों में निवेश किया जाता है। कुल 450 उद्योग हमारे लिए काम कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से जताई गई चिंताओं पर नारायणन ने कहा, निश्चित तौर पर मेरे सहयोगियों की जो भी चिंताएं हैं, वे जायज हैं। उन्हें स्पष्टीकरण देना हमारी जिम्मेदारी है। इसरो अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए प्रक्षेपण की संख्या में काफी बढ़ोतरी करने की जरूरत होगी।
नारायणन ने कहा कि इसरो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के लिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ मिलकर काम कर रहा है। नारायण की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने चार सितंबर को उन्हें पत्र लिखकर विनिर्माण और संचालन संबंधी कामकाज निजी संस्थाओं को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (बीएसएक्स) के नौवें संस्करण के उद्घाटन समारोह के बाद संवाददाताओं से मुखातिब नारायणन ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्पाम लगभग 64-65 साल पुराना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंतरिक्ष में 56 अंतरिक्ष परिसंपत्तियां मौजूद हैं, जो देश के आम लोगों के लिए सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन हकीकत में इनकी कई गुना अधिक संख्या में जरूरत है। नारायणन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में छह साल पहले शुरू किए गए सुधारों का पा करते हुए कहा कि इनके तहत हमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप कंपनियों को सहयोग देना है तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करना है। उन्होंने कहा, दरअसल, जब भी कोई पीएसएलवी या जीएसएलवी प्रक्षेपित किया जाता है, तो उसके बजट का करीब 80 फीसदी हिस्सा भारतीय उद्योगों में निवेश किया जाता है। कुल 450 उद्योग हमारे लिए काम कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से जताई गई चिंताओं पर नारायणन ने कहा, निश्चित तौर पर मेरे सहयोगियों की जो भी चिंताएं हैं, वे जायज हैं। उन्हें स्पष्टीकरण देना हमारी जिम्मेदारी है। इसरो अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए प्रक्षेपण की संख्या में काफी बढ़ोतरी करने की जरूरत होगी।