33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व के लिए नए रास्ते खोलेगा: लोकसभा अध्यक्ष
प्रकाशित: 08-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की पैरवी पुरजोर तरीके से की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों मंि महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी।
श्री बिरला ने आज फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा आयोजित लिंग-उत्तरदायी शासन विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। कहा कि अब ध्यान केवल सहायता और अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्पामों और कानूनों को सािढय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का पा किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायक-लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं के माध्यम से महिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों। श्री बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए। उन्होंने महिलाओं से ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करने का आह्वान किया जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें, ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके।
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की पैरवी पुरजोर तरीके से की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों मंि महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी।
श्री बिरला ने आज फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा आयोजित लिंग-उत्तरदायी शासन विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। कहा कि अब ध्यान केवल सहायता और अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्पामों और कानूनों को सािढय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का पा किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायक-लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं के माध्यम से महिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों। श्री बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए। उन्होंने महिलाओं से ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करने का आह्वान किया जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें, ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके।