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बांधवगढ़ में वन्य जीवों की स्थिति: संरक्षण और पर्यटन की एक नई मिसाल

प्रकाशित: 08-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
गोपाल दास बंसल
शहडोल/उमरिया। संभाग के जिला उमरिया का प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में वन्य जीव संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। हाल ही में इसे वर्ष 2026 के लिए 'इंडियाज बेस्ट वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन' के खिताब से नवाजा गया है। यह उपलब्धि यहां के बाघों की बढ़ती आबादी, बेहतर आवास प्रबंधन और जिम्मेदार इको-पर्यटन का प्रमाण है। बांधवगढ़ अपने नाम के अनुरूप ही बाघों का एक मजबूत गढ़ है। कम क्षेत्रफल के बावजूद यहां रॉयल बंगाल टाइगर की घनत्व दर दुनिया में सबसे अधिक मानी जाती है। हालांकि, केवल बाघ ही नहीं, बल्कि यह जंगल, अन्य वन्य जीवों के लिए भी एक सुरक्षित शरणस्थली बना हुआ है। तेंदुए और अन्य मांसाहारी: बाघों की मजबूत मौजूदगी के बावजूद तेंदुओं की संख्या में भी संतुलन बना हुआ है। शाकाहारी वन्य जीव: सांभर, चीतल, नीलगाय, और भालू जैसे वन्य जीवों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। यहां पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां और दुर्लभ सरीसृप भी सुरक्षित वातावरण में फल-फूल रहे हैं। बांधवगढ़ की इस सफलता के पीछे केवल प्राकृतिक वातावरण ही नहीं, बल्कि प्रशासन और स्थानीय समुदायों का प्रयास भी है: वन विभाग द्वारा अवैध शिकार रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और पैदल गश्त का कड़ाई से पालन किया जाता है। बांधवगढ़ में लग्जरी लॉज और सफारी का संचालन इस तरह से किया जाता है जिससे वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास में कम से कम दखल हो। स्थानीय रोजगार: स्थानीय ग्रामीणों को गाइड, ड्राइवर और रिसॉर्ट्स में रोजगार देकर उन्हें संरक्षण की प्रािढया में सीधा भागीदार बनाया गया है। बाघों और अन्य वन्य जीवों की बढ़ती आबादी के साथ ही 'मानव-वन्यजीव संघर्ष' जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। हालांकि, वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने और सीमावर्ती इलाकों में फेंसिंग तथा निगरानी बढ़ाने पर काम कर रहा है। बांधवगढ़ की यह कहानी यह साबित करती है कि अगर सही नीति और सामुदायिक सहभागिता हो, तो प्रकृति और वन्य जीवों को न केवल बचाया जा सकता है, बल्कि उन्हें संवर्धित भी किया जा सकता है।