कानून की धज्जियां उड़ाते कोचिंग सेंटर और पीजी हॉस्टल
प्रकाशित: 11-09-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
कोचिंग संस्थानों की दुरावस्था के बाद अब पीजी हॉस्टल मौत के कुएं बन रहे है। देश की राजधानी दिल्ली में एक पीजी हॉस्टल ने देशवासियों का ध्यान खिंचा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कानून कायदों की धज्जियां उड़ाते खतरनाक पीजी भरे पड़े हैं। तीन-चार फीट चौड़ी सड़कें, कहीं-कहीं तो 7-8 मंजिलों वाली इमारतें, यहां मौत का तांडव कभी भी हो सकता है। ये जगहें खासतौर पर छात्रों को किराये पर दी जाती है। जहां-जहां अस्पताल हैं, उनके आसपास मरीजों के रिश्तेदारों के लिए गेस्ट हाउस बना दिए गए हैं, जिनके चारों तरफ केमिस्ट की दुकानें और dग्agहदूग्म् महो मिलेंगे। जहां छात्रों के पीजी और मरीज़ों के रिश्तेदारों के गेस्ट हाउस होते हैं, वहां ढाबे, दुकानें खुल जाती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में पिछले चार साल में ऐसे 133 हादसे हुए, 1133 इमारतें गिरी, 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है लेकिन हर बार कुछ अफसरों का निलम्बन और जांच का ऐलान होता है। लेकिन अवैध इमारतें बनती रहती हैं। देर सबेर ही सही अब दिल्ली सरकार भी चेती है। दिल्ली सरकार शहर में ‘पेइंग गेस्ट' (पीजी) आवास और कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए डेढ़ महीने में एक व्यापक नीति और वेब पोर्टल तैयार करेगी। नीति को अंतिम रूप देने से पहले सरकार पीजी प्रबंधन, माता-पिता, एजेंसियों, छात्र संगठनों और पानी तथा बिजली से जुड़े विभागों समेत विभिन्न संबंधित पक्षों की राय लेगी। देशभर में हज़ारों पी जी हॉस्टल और कोचिंग सेंटरों में न तो पर्याप्त अग्निशमन की व्यवस्था है और ना ही दूसरी सुविधाएं। विभिन्न गली मुहल्लों में कई मंजिलों में ऐसे हॉस्टल चल रहे है। ऐसे हॉस्टलों के संचालकों को न तो छात्रों की चिंता है और ना ही अधिकारियों का भय।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में पिछले चार साल में ऐसे 133 हादसे हुए, 1133 इमारतें गिरी, 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है लेकिन हर बार कुछ अफसरों का निलम्बन और जांच का ऐलान होता है। लेकिन अवैध इमारतें बनती रहती हैं। देर सबेर ही सही अब दिल्ली सरकार भी चेती है। दिल्ली सरकार शहर में ‘पेइंग गेस्ट' (पीजी) आवास और कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए डेढ़ महीने में एक व्यापक नीति और वेब पोर्टल तैयार करेगी। नीति को अंतिम रूप देने से पहले सरकार पीजी प्रबंधन, माता-पिता, एजेंसियों, छात्र संगठनों और पानी तथा बिजली से जुड़े विभागों समेत विभिन्न संबंधित पक्षों की राय लेगी। देशभर में हज़ारों पी जी हॉस्टल और कोचिंग सेंटरों में न तो पर्याप्त अग्निशमन की व्यवस्था है और ना ही दूसरी सुविधाएं। विभिन्न गली मुहल्लों में कई मंजिलों में ऐसे हॉस्टल चल रहे है। ऐसे हॉस्टलों के संचालकों को न तो छात्रों की चिंता है और ना ही अधिकारियों का भय।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।