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दिल्ली राज्य अनुसूचित जाति आयोग का गठन?

प्रकाशित: 14-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
दिल्ली राज्य अनुसूचित जाति आयोग का गठन दिल्ली सरकार की संवैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है। दुर्भाग्यवश, अब तक किसी भी सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया है। न केवल पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार इस दायित्व को पूरा करने में विफल रही, बल्कि वर्तमान सरकार की ओर से भी आयोग के गठन को लेकर कोई स्पष्ट पहल दिखाई नहीं दे रही है। दिल्ली में अनुसूचित जाति समुदाय की आबादी लगभग 25 से 30 लाख के बीच है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 16-17ज्ञ् है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद उनके अधिकारों, समस्याओं और कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर कोई स्वतंत्र आयोग मौजूद नहीं है। इसके अभाव में समुदाय को अपनी शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग पर निर्भर रहना पड़ता है, जो दिल्ली जैसे विशाल महानगर के स्थानीय मुद्दों का प्रभावी ढंग से समाधान नहीं कर सकता। एक स्वतंत्र दिल्ली राज्य अनुसूचित जाति आयोग कल्याणकारी योजनाओं के ािढयान्वयन की निगरानी, सरकारी संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों की जांच, अत्याचार एवं उत्पीड़न के मामलों में त्वरित हस्तक्षेप, आरक्षण नीति के पालन की समीक्षा तथा शिक्षा, रोजगार और आवास संबंधी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अतिरिक्त, आयोग सरकार को नीतिगत सुझाव देकर अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में भी योगदान दे सकता है।यह उल्लेखनीय है कि दिल्ली में विभिन्न समयों पर पिछड़ा वर्ग आयोग, सफाई कर्मचारी आयोग, दिव्यांग कल्याण आयोग तथा अन्य कई आयोगों का गठन किया गया, किंतु अनुसूचित जाति आयोग का गठन अब तक नहीं हो पाया। वर्ष 2017 में तत्कालीन केजरीवाल सरकार ने नगर निगम चुनावों से पूर्व ऐसे आयोग के गठन का वादा भी किया था, लेकिन वह वादा पूरा नहीं हो सका। मैंने स्वयं इस विषय को तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम तथा बाद में मंत्री राज कुमार आनंद के समक्ष कई बार उठाया। इस संबंध में विस्तृत चर्चाएं हुईं और सकारात्मक आश्वासन भी मिले, लेकिन आयोग का गठन आज तक नहीं हो सका। वस्तुत यह समस्या केवल किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है; कांग्रेस शासनकाल और उससे पूर्व की सरकारों में भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आज आवश्यकता है कि दिल्ली सरकार बिना किसी और विलंब के दिल्ली राज्य अनुसूचित जाति आयोग का गठन करे तथा इसमें योग्य, अनुभवी और समाज के प्रति प्रतिबद्ध व्यक्तियों को शामिल करे। इससे न केवल अनुसूचित जाति समुदाय की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को भी मजबूती मिलेगी।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।