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देश के युवाओं का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रकाशित: 25-07-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में परीक्षा प्रणाली को लेकर उत्पन्न विवादों, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच स्पष्ट संदेश दिया है कि देश के युवाओं का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा और परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने के लिए केंद्र सरकार हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर व्यापक चिंता व्यक्त की जा रही है एवं देश के प्रधानमंत्री कि इस वक्त मैं पर संतोष जाहिर करना चाहिए और सराहना करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री लंबे समय से विद्यार्थियों को परीक्षा योद्धा के रूप में संबोधित करते रहे हैं। उनका मानना है कि परीक्षा को तनाव का नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सीखने का अवसर समझना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अंकों की अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय स्वयं से प्रतिस्पर्धा करने और अपनी क्षमता के निरंतर विकास पर ध्यान देने की अपील की है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी आग्रह किया है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार करें जिससे विद्यार्थी मानसिक तनाव से मुक्त होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। परीक्षा प्रणाली में बढ़ती अनियमितताओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई सुधारात्मक कदमों की घोषणा की है। प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा धोखाधड़ी जैसे मामलों में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की दिशा में पहल की जा रही है, ताकि दोषियों को समयबद्ध और कठोर दंड मिल सके। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री का यह भी मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से परीक्षा पे चर्चा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से वे प्रतिवर्ष विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद स्थापित करते हैं। इन कार्पामों में परीक्षा संबंधी तनाव कम करने, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण और जीवन कौशल जैसे विषयों पर उपयोगी मार्गदर्शन दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का विकास हो सके। समग्र रूप से देखा जाए तो केंद्र सरकार का प्रयास केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि ऐसी विश्वसनीय और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें योग्य विद्यार्थियों को उनके परिश्रम के अनुरूप अवसर मिलें और किसी भी प्रकार की धांधली या भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान न रहे।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।