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नड्डा ने तारीख गलत बतायी : उमर ने जम्मू-कश्मीर एसएसबी प्रश्नपत्र लीक मामले पर कहा

प्रकाशित: 24-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
श्रीनगर, (भाषा)। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जम्मू कश्मीर में सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के प्रश्नपत्र लीक मामले को उनकी सरकार से जोड़ा था।
अब्दुल्ला ने कहा कि यह घटना 2022 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन के दौरान हुई थी, जबकि उनकी सरकार ने 2024 में कार्यभार संभाला।अब्दुल्ला, नड्डा द्वारा बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में की गई उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और कांग्रेस पर प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया था।अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, जम्मू-कश्मीर में एसएसबी प्रश्नपत्र लीक के बारे में आपकी बात बिल्कुल सही है नड्डा जी, लेकिन आपने तारीख गलत बता दी। यह 2022 की घटना है। उन्होंने कहा, तब नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की सरकार नहीं थी। उस समय उपराज्यपाल के नेतृत्व वाली सरकार थी। हालांकि, इस विफलता की याद सभी को दिलाने के लिए आपका धन्यवाद। इस मामले में जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की टिप्पणियां और आदेश भी हैं। मुख्यमंत्री ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के आदेश का एक हिस्सा भी साझा किया, जिसमें उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन को जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) की घोर अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति ग"ित करने का निर्देश दिया गया था। अब्दुल्ला ने कहा, हमें नहीं पता कि उस उच्चस्तरीय समिति का क्या हुआ या उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ। शायद आप अपने अगले संवाददाता सम्मेलन में इसके बारे में हमें जानकारी दे सकें। उल्लेखनीय है कि 2022 में प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार के व्यापक आरोपों के बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन को जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।
इनमें उपनिरीक्षक, जूनियर इंजीनियर और वित्त लेखा सहायक सहित कई पदों की परीक्षाएं शामिल थीं।
मुंबई स्थित एपटेक लिमिटेड को कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं आयोजित कराने का जिम्मा देने को लेकर भी प्रशासन को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था, क्योंकि कथित अनियमितताओं के कारण इस कंपनी को पहले कई राज्य सरकारें काली सूची में डाल चुकी थीं।