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ट्रेंड में है 'काला कलावा': जानिए कलाई पर काला धागा बांधने के नियम और 3 गांठों का रहस्य

प्रकाशित: 09-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ट्रेंड में है 'काला कलावा': जानिए कलाई पर काला धागा बांधने के नियम और 3 गांठों का रहस्य
हिंदू धर्म में सदियों से पूजा-पाठ, यज्ञ और मांगलिक कार्यों के दौरान कलाई पर लाल या पीले रंग का कलावा (मौली) बांधने की परंपरा रही है। हालांकि, पिछले कुछ समय से आम लोगों और युवाओं के बीच 'काला कलावा' पहनने का चलन बेहद तेजी से बढ़ा है।
विशेष रूप से भगवान शिव के भक्तों और काल भैरव की उपासना करने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह सुरक्षा और आस्था का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है।
देश के प्रसिद्ध शिवालयों, जैसे उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर या काशी के काल भैरव मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं को कलाई पर काला धागा या कलावा बांधे आसानी से देखा जा सकता है। धार्मिक दृष्टिकोण से इसके पीछे कई गूढ़ रहस्य और नियम बताए गए हैं।
भगवान शिव और काल भैरव का प्रतीक है काला कलावा
धार्मिक मान्यताओं और जानकारों के अनुसार, काले रंग के कलावे का सीधा संबंध भगवान शिव के रौद्र स्वरूप महाकाल और काल भैरव से माना जाता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद इसे कलाई पर धारण करने से महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है। यह धागा व्यक्ति के भीतर साहस, निडरता और आत्मविश्वास का संचार करता है।
तीन गांठों का रहस्य
काला कलावा बांधते समय उसमें लगाई जाने वाली गांठों का धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में विशेष महत्व रेखांकित किया गया है। नियम के अनुसार इसमें 3, 5 या 7 गांठें लगाई जा सकती हैं, लेकिन तीन गांठ लगाने की परंपरा सबसे अधिक लोकप्रिय है।
पुजारियों का मत - मंदिरों में पुजारी अक्सर तीन गांठ लगाकर ही श्रद्धालुओं को कलावा बांधते हैं। इन तीन गांठों को श्रद्धा, सुरक्षा और शुभता का त्रिवेणी प्रतीक माना जाता है।
बुरी नजर से बचाव - भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में काले रंग को हमेशा से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) और बुरी नजर से बचाने वाला माना गया है। मान्यता है कि यह कलावा आसपास की नकारात्मकता को सोखकर व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखता है।
किस दिन धारण करना होता है सबसे शुभ?
शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला कलावा धारण करने के लिए सप्ताह के तीन दिन सबसे उत्तम माने गए हैं।
सोमवार - भगवान शिव का दिन होने के कारण।
मंगलवार - संकटमोचन हनुमान जी की कृपा के लिए।
शनिवार - न्याय के देवता शनिदेव और काल भैरव की उपासना के लिए।
इन दिनों में किसी पवित्र मंदिर में पूजा के बाद इसे पहनना श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है।
नोट - हालांकि इन धार्मिक नियमों और कलावे के लाभों को लेकर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों और विद्वानों का मानना है कि यह पूरी तरह से व्यक्तिगत आस्था, लोक परंपरा और धार्मिक विश्वास से जुड़ा विषय है।