7 साल का भुवनेश - मार्शल आर्ट का मास्टर
प्रकाशित: 25-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (वीअ)। उनकी उम्र महज 7 साल है और राष्ट्रीय स्तर की तीसरी चैंपियनशिप में खेल रहे हैं बेंगलुरु में रहने वाले भुवनेश दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं और थाई मार्शल आर्ट मोय थाई चैंपियनशिप में भी भाग लेते हैं। हाल ही में दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में डब्लूबीसी एमेच्योर मोय थाई ओपन चैंपियनशिप हुई जिसमें 12 राज्यों के 400 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। भुवनेश इस प्रतियोगिता के सबसे छोटे प्रतिस्पर्धी थे।
भुवनेश के पिता विजय बताते हैं कि तीन-चार साल की उम्र में ही यह टीवी पर बॉडीबिल्डिंग देखा करता था इसकी लगन को देखकर हमने इसे बढ़ाया और उसने कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल जीते उसके बाद फिर यह टीवी पर मार्शल आर्ट देखने लगा और इसका रुझान मार्शल आर्ट की ओर हो गया। बेंगलुरु में मार्शल आर्ट के कोच चरण मास्टर हैं। एक दिन उनसे मुलाकात हुई और भुवनेश की प्रतिभा को देखकर उन्होंने सुझाव दिया कि मोय थाई मार्शल आर्ट शुरू करो। उसने अभ्यास शुरू किया और उसकी दिलचस्पी और बढने लगी। अपनी उम्र के हिसाब से काफी आगे है। दिल्ली में हुई चैंपियनशिप में 7 साल का कोई और खिलाड़ी नहीं था इसे अंडर- 10 में रखा गया और यहां भी उसने कमाल कर दिखाया। एमेच्योर मोय थाई इंडिया के चेयरमैन दयाचंद भोला ने बताया की 12 राज्यों के 400 से अधिक खिलाड़ियों ने चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इस मार्शल आर्ट को पेरिस ओलंपिक में प्रदर्शनी खेल के तौर पर रखा गया था हालांकि अभी यह आधिकारिक ओलंपिक इवेंट नहीं है। इसकी एशियाई और विश्वा चैंपियनशिप होती है। रिंग में होने वाली स्पर्धा में तीन-तीन मिनट के तीन राउंड होते हैं।
नॉकआउट होने पर रेफरी बीच में मैच रोक सकता है। इसमें दोनों हाथों से पंच, दोनों कुहनियों, दोनों घुटनों और दोनों पांव (फुट किक) का इस्तेमाल किया जाता है। एमेच्योर मोय थाई इंडिया के डायरेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि इस साल भारत में एशियाई चैंपियनशिप भी प्रस्तावित है।
विजेता खिलाड़ियों को जाने-माने पहलवान और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच महाबली सतपाल और 1975 विश्वा कप विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य अशोक ध्यानचंद ने पुरस्कार बांटे।
भुवनेश के पिता विजय बताते हैं कि तीन-चार साल की उम्र में ही यह टीवी पर बॉडीबिल्डिंग देखा करता था इसकी लगन को देखकर हमने इसे बढ़ाया और उसने कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल जीते उसके बाद फिर यह टीवी पर मार्शल आर्ट देखने लगा और इसका रुझान मार्शल आर्ट की ओर हो गया। बेंगलुरु में मार्शल आर्ट के कोच चरण मास्टर हैं। एक दिन उनसे मुलाकात हुई और भुवनेश की प्रतिभा को देखकर उन्होंने सुझाव दिया कि मोय थाई मार्शल आर्ट शुरू करो। उसने अभ्यास शुरू किया और उसकी दिलचस्पी और बढने लगी। अपनी उम्र के हिसाब से काफी आगे है। दिल्ली में हुई चैंपियनशिप में 7 साल का कोई और खिलाड़ी नहीं था इसे अंडर- 10 में रखा गया और यहां भी उसने कमाल कर दिखाया। एमेच्योर मोय थाई इंडिया के चेयरमैन दयाचंद भोला ने बताया की 12 राज्यों के 400 से अधिक खिलाड़ियों ने चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इस मार्शल आर्ट को पेरिस ओलंपिक में प्रदर्शनी खेल के तौर पर रखा गया था हालांकि अभी यह आधिकारिक ओलंपिक इवेंट नहीं है। इसकी एशियाई और विश्वा चैंपियनशिप होती है। रिंग में होने वाली स्पर्धा में तीन-तीन मिनट के तीन राउंड होते हैं।
नॉकआउट होने पर रेफरी बीच में मैच रोक सकता है। इसमें दोनों हाथों से पंच, दोनों कुहनियों, दोनों घुटनों और दोनों पांव (फुट किक) का इस्तेमाल किया जाता है। एमेच्योर मोय थाई इंडिया के डायरेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि इस साल भारत में एशियाई चैंपियनशिप भी प्रस्तावित है।
विजेता खिलाड़ियों को जाने-माने पहलवान और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच महाबली सतपाल और 1975 विश्वा कप विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य अशोक ध्यानचंद ने पुरस्कार बांटे।