कायर कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करूंगा: न्यायाधीश
प्रकाशित: 09-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मुजफ्फरनगर (भाषा) । मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या के एक मामले में सोमवार को मृत्युदंड का फैसला सुनाते हुए कहा कि वह कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।
पिछले चार माह में उनके द्वारा सुनाया गया यह 23वां मृत्युदंड है। दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी एक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए त्वरित अदालत के न्यायाधीश ने कहा कि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों के दबाव में नहीं आएंगे। न्यायाधीश दिवाकर ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से डरना सिखाया है। उन्होंने कहा कि यदि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करते हुए बाहुबलियों, माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों से डर जाएंगे तो न्यायपालिका में जनता का विश्वास समाप्त हो जाएगा।
अपने फैसले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि वह कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे और जब तक अपने सिद्धांतों का पालन कर सकते हैं, तब तक सेवा करते रहेंगे। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्हें माफियाओं और अपराधियों से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफियाओं और अपराधियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी अदालत से लगभग 100 गंभीर मामलों को वापस ले लिया गया है। ऐसा समझा जाता है कि दिवाकर ने मुजफ्फरनगर में अपनी सुरक्षा कम किए जाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है। शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, सोमवार के मामले में न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने अभियुक्त नदीम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 504 के तहत दोषी ठहराया।
पिछले चार माह में उनके द्वारा सुनाया गया यह 23वां मृत्युदंड है। दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी एक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए त्वरित अदालत के न्यायाधीश ने कहा कि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों के दबाव में नहीं आएंगे। न्यायाधीश दिवाकर ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से डरना सिखाया है। उन्होंने कहा कि यदि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करते हुए बाहुबलियों, माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों से डर जाएंगे तो न्यायपालिका में जनता का विश्वास समाप्त हो जाएगा।
अपने फैसले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि वह कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे और जब तक अपने सिद्धांतों का पालन कर सकते हैं, तब तक सेवा करते रहेंगे। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्हें माफियाओं और अपराधियों से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफियाओं और अपराधियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी अदालत से लगभग 100 गंभीर मामलों को वापस ले लिया गया है। ऐसा समझा जाता है कि दिवाकर ने मुजफ्फरनगर में अपनी सुरक्षा कम किए जाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है। शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, सोमवार के मामले में न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने अभियुक्त नदीम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 504 के तहत दोषी ठहराया।