बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने इस्तीफा दिया
प्रकाशित: 25-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ढाका, (भाषा)। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से दो साल पहले ही शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सहयोगी थे।
द डेली स्टार अखबार के अनुसार, 76 वर्षीय नेता ने अपने इस्तीफे की वजह के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, मैं स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों से जूझ रहा हूं। राष्ट्रपति भवन बंगभवन के एक प्रवक्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए निकल चुके हैं। त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे। प्रवक्ता ने कहा, जब तक संसद के अध्यक्ष को त्यागपत्र नहीं मिल जाता, मैं इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता। वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाने वाले और निचली अदालत के न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें देश की पिछली संसद ने सर्वेच्च पद के लिए चुना था और वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने हुए थे। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। हसीना भारत चली गई थीं और पांच अगस्त 2024 से वहीं रह रही हैं।
द डेली स्टार अखबार के अनुसार, 76 वर्षीय नेता ने अपने इस्तीफे की वजह के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, मैं स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों से जूझ रहा हूं। राष्ट्रपति भवन बंगभवन के एक प्रवक्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए निकल चुके हैं। त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे। प्रवक्ता ने कहा, जब तक संसद के अध्यक्ष को त्यागपत्र नहीं मिल जाता, मैं इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता। वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाने वाले और निचली अदालत के न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें देश की पिछली संसद ने सर्वेच्च पद के लिए चुना था और वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने हुए थे। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। हसीना भारत चली गई थीं और पांच अगस्त 2024 से वहीं रह रही हैं।