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प्रतियोगी परीक्षाओं का निष्पक्ष आयोजन न हो पाना चिंता का विषय

प्रकाशित: 28-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
बसंत कुमार
वर्ष 1991 या 1992 की बात है तब मुझे तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जनसभा के संबोधन में उपस्थित होने का अवसर मिला। उस समय उनकी सरकार में यूपी बोर्ड की नकल विरोधी अभियान की बड़ी चर्चा थी और जब कल्याण सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के बच्चे प्रदेश से बाहर साक्षात्कार परीक्षा में जाएंगे तो वह बड़े गर्व से कह सकेंगे कि मैने कल्याण सिंह के मुख्य मंत्रित्व काल में बोर्ड की परीक्षाओं में 10वीं या 12वीं पास की है।
कल्याण सिंह का यह उद्बोधन उस समय के युवाओं में बड़ा लोकप्रिय हुआ क्योंकि उससे पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा में यह आलम था कि स्कूलों के सेल्फ सेंटर होते थे और नकल बड़े जोर-जोर बड़े जोर से हुआ करती थी और जब उत्तर प्रदेश का रहने वाला कोई छात्र किसी प्रतियोगिता परीक्षा में इंटरव्यू में शामिल होता था तो यह सुनते ही कि उसने यूपी बोर्ड से 10वीं-12वीं के परीक्षाएं पास की है बोर्ड के सदस्य तो सदस्यों का चेहरा देखने लायक होता था पर कल्याण सिंह जी ने प्रदेश में पहली बार नकल विरोधी अभियान लागू करके पूरे देश में यूपी बोर्ड की प्रतिष्ठा को बढ़ाया।
परंतु जिस तरह से नीट की परीक्षा के पेपर लीक हुए और इसको दोबारा आयोजित करने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को लगाना पड़ा इसी के साथ सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा के अंक पत्र रिवैल्युएशन के लिए असुविधा होना यह साबित कर रहा है कि देश में सभी परीक्षाएं चाहे वह प्रतियोगिता परीक्षा हो या शैक्षिक संस्थानों कीपरीक्षा हो वह निष्पक्ष रूप से नहीं हो रही है यह सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है यदि पेपर लीक कराकर पैरवी पुत्र डॉक्टर बनेंगे आप उम्मीद कर सकते हैं कि हमारी चिकित्सा पद्धति का क्या होगा इसलिए सरकार का यह दायित्व बनता है की नीट जैसी प्रतियोगात्मक परीक्षाएं निष्पक्ष हो।
जिस तरह से नीट की परीक्षा के पेपर लीक हुए और इसमें कई लोगों के गिरफ्तारियां भी हुई पर विपक्षी पार्टियों के अलावा सभी लोग इस गिरफ्तारी से संतुष्ट नहीं है और बार-बार भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग कर रहे है जबकि मेरा मानना है कि शिक्षा मंत्री की त्यागपत्र से यह समस्या नहीं निपटने वाली हमें एक ऐसे तंत्र का विकास करना होगा जिससे देशभर की तमाम प्रति योगात्मक परीक्षाएं निष्पक्ष हो जिससे मेडिकल आदि कोर्सों के लिए योग्य और टैलेंटेड छात्र ई प्रवेश पा सके। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पूरे देश में आरक्षणका विरोध करने वाले लोग अक्सर यह दलील देते हैं कि 30ज्ञ् वाला व्यक्ति डॉक्टर बन जाता है जबकि 80ज्ञ् वाला छात्र मेडिकल में प्रवेश नहीं कर पता तो इन 30ज्ञ् वालों से कैसी चिकित्सा की उम्मीद की जा सकती है जबकि वास्तविकता यह है कि यदि इसी तरह से नीट जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होते रहे तो किस तरह से चिकित्सा के लिए योग्य डॉक्टर मिल पाएंगे। और लोग बिना आधार के संविधान में प्रदत्त आरक्षण का विरोध करते रहेंगे।
नीट जैसी परीक्षाओं का निष्पक्ष ना होना लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य, उनके मानसिक स्वास्थ्य और देश की शिक्षा प्रणाली पर सीधा प्रहार है, पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के वर्षों के संघर्ष और मेहनत को मिट्टी में मिला देती है इस प्रकार की चिताओं के प्रमुख कारण और उनके निवारण इस प्रकार हैं-
- इस प्रकार के अनुचित साधनों (पेपर लीक नकल) के उपयोग से योग्य प्रतिभावान और मेहनती छात्रों के अवसर छिन जाते हैं।
- परीक्षा का रद्द होना और दोबारा परीक्षा का आयोजन होना छात्रों के लिए अत्यधिक मानसिक दबाव का कारण बनता है।
- इस तरह से पेपर लीक की घटनाओं से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ऱऊA) जैसी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बार-बार उठते सवाल पूरी परीक्षा की साख को समाप्त कर देते हैं।
- इन परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कुछ सख्त कदम जैसे सार्वजनिक शिक्षा परीक्षा अधिनियम और हाल ही में री -नीट परीक्षा के दौरान उठाए गए कदम सामान्य परिस्थितियों उठाए जाने चाहिए।
नीट यूजी विवाद की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में ने सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षाओं के संचालन में बार-बार हो रहे विफलताओं की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को गहरी मानसिक एवं भावनात्मक पीड़ा पहुंचती है।
सर्वोच्च न्यायालय में स्पष्ट किया कि केवल नई समितियां बनाने या प्रािढयात्मक बदलाव करने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि जवाब दे ही और संस्थापक सुधार सुनिश्चित करना आवश्यक है। यद्यपि भारत में लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए एक प्रमुख विधिक सुरक्षा उपाय, लोक विभाग लोक परीक्षा (अनुचित अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 है जो 21 जून 2024 से प्रभावित हुआ यह कानून संगठित परीक्षा धोखाधड़ी, प्रश्न पत्र लीक तथा तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया, पर इसके बावजूद देश में इन परीक्षाओं में नकल और प्रश्न पत्र लीक बाय दस्तूर जारी है।
विश्व के अनेक देशों में बड़ी परीक्षाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीकी और प्रशासनिक उपाय विकसित की हैं जिसके महत्वपूर्ण सीख ली जानी चाहिए चीन की गओ-काओ परीक्षा में सैन्य स्तर की सुरक्षा परीक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Aघ्) आधारित निगरानी, प्रेस रिकॉग्निशन तकनीक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर कठोर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं।
दक्षिण कोरिया की सीएसए परीक्षा में परीक्षा दिवस पर विशेष प्रशासनिक प्रबंधन केंद्रीय सुरक्षा तंत्र और राष्ट्रीय स्तर पर संबंधित संचालन सुनिश्चित किया जाता है जिससे परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। वहीं अमेरिका में एAऊ और उRं जैसी परीक्षाओं में डिजिटल प्रश्न बैंक, बहु स्तरीय एंfिक्रप्शन तथा प्रश्न पत्रों के अनेक गतिशील संस्करण का उपयोग किया जाता है, जिस से प्रश्न पत्रों के लीक होने की संभावना खत्म हो जाती है।
विश्व की अग्रणी देशों द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित परीक्षाओं का अध्ययन करने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि तकनीकी नवाचार, मजबूत संस्थागत क्षमता और प्रशासनिक समन्वय का संयोजन परीक्षा सुरक्षा और निष्पक्षता करने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है पर अपने आप को विश्व गुरु कहने वाला भारत इन्हें अपनाकर निष्पक्ष परीक्षाओं का आयोजन करने में असफल रहा है।
(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव हैं।)