गहराता संकट
प्रकाशित: 28-06-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध भड़कने के आसार बढ़ रहे हैं क्येंकि शुक्रवार और शनिवार को अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे को निशाना बनाया। मजे की बात तो यह है कि पाकिस्तान जिस समझौते को सफल बताकर दुनिया भर से तारीफें बटोर रहा था, वह समझौता पूरी तरह से असफल हो चुका है। दरअसल 18 जून को 14 सूत्री सामझौते के तहत यह तय हुआ था कि ईरान स्ट्रेट होर्मूज यानि जलडमरूमध्य समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षा एवं निर्बाध आवाजाही को सुनिश्चित करेगा। समझौते में यह भी उल्लेख था कि ईरान ने जो बारूदी सुरंगें उक्त क्षेत्र में बिछाई हैं, उसे वह हटा देगा। समझौते में इस बात का उल्लेख है कि ईरान समुद्री मार्ग से जहाजों के गुजरने में सहयोग करेगा तो अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंधी 30 दिनों के अंदर हटा लेगा। इस समझौते के बाद माना जा रहा था कि अब पश्चिम एशिया में अस्थाई ही सही, शांति की वापसी हो जाएगी। 24 जून यानि बुधवार को स्ट्रेट ऑ@@@@@@फ होर्मूज के रास्ते 78 जहाज निर्बाध रूप से गुजरे। यह संख्या युद्ध शुरू होने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सबसे ज्यादा थी। उल्लेखनीय है कि युद्ध के पहले तो इस मार्ग से 130 जहाज प्रतिदिन गुजरते थे।
बहरहाल शुक्रवार यानि 26 जून को ईरान के विदेश उपमंत्री काजेम गरिबावादी ने कहा कि सभी जहाजों को तेहरान द्वारा तय किए गए नियमों के तहत ही स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरना होगा। गरिबावादी ने धमकी भरे स्वर में यह भी कहा कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों को तेहरान के साथ तालमेल बिठाना होगा अन्यथा वैकल्पिक रास्ते निरस्त कर दिए जाएंगे। ईरान की इसी जिद के कारण बुधवार को ओमान के पास संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा समर्थित वैकल्पिक मार्ग से गुजरने वाले दो टैंकरों को वापस लौटना पड़ा।
मतलब यह कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को ठेंगा दिखाते हुए बृहस्पतिवार यानि 25 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरने वाले एक कार्गो जहाज पर जब हमला हुआ तभी लग गया था कि अब गड़बड़ होने के आसार हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार की घटना को समझौते का उल्लंघन बताया और संवाददाताओं से कहा कि “आपको जल्दी ही पता चल जाएगा।'' इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमाण्ड ने ईरान के अंदर मिसाइल ड्रोन साइट्स तटीय रडार केन्द्राsं पर एयर स्ट्राइक कर दी। ईरान पर हमलों के पहले ट्रंप का यह कहना कि “मुझे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि उन्होंने (ईरान ने) कल हमला किया।'' ईरान भी कहां पीछे रहने वाला था। उसने भी दावा किया कि अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके इस्लामिक रिपब्लिकन गार्ड ने भी बदला ले लिया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने दो टूक कहा कि “स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर ईरान का नियंत्रण है। इसलिए नियमों का सम्मान करें।''
मजे की बात तो यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप जिसे ईरान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन मान रहे हैं उसो ही इब्राहिम अजीजी ‘सीजफायर मैनेजमेण्ट' बताकर कहते हैं कि “नियंत्रण को तनाव बढ़ाना न समझें, यह सीजफायर का उल्लंघन नहीं है।''
लब्बोलुआब यह है कि पाकिस्तान इस समझौते पर चाहे जितनी डुगडुगी बजाए किन्तु वास्तविकता तो यह है कि जब तक खुद को एक पक्ष परस्त नहीं मानता, उसके लिए समझौतो में कही गई हर बात अनावश्यक एवं निरर्थक लगती है। ईरान भले ही बर्बाद हो चुका है किन्तु वह खुद को हारा हुआ न मानकर अमेरिका की नाक में दम करने वाला शत्रु मानता है। इसीलिए समझौते के तहत सीजफायर के सम्मान से ज्यादा वह स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर नियंत्रण के लिए चिंतित है। इससे एक बात स्पष्ट है कि इस समझौते के बावजूद दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ हमले करते रहेंगे। इसीलिए लगता है कि पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद तब तक संभव नहीं है जब तक कि दोनों पक्षों को सामझौते की जरूरत महसूस न हो।
बहरहाल शुक्रवार यानि 26 जून को ईरान के विदेश उपमंत्री काजेम गरिबावादी ने कहा कि सभी जहाजों को तेहरान द्वारा तय किए गए नियमों के तहत ही स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरना होगा। गरिबावादी ने धमकी भरे स्वर में यह भी कहा कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों को तेहरान के साथ तालमेल बिठाना होगा अन्यथा वैकल्पिक रास्ते निरस्त कर दिए जाएंगे। ईरान की इसी जिद के कारण बुधवार को ओमान के पास संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा समर्थित वैकल्पिक मार्ग से गुजरने वाले दो टैंकरों को वापस लौटना पड़ा।
मतलब यह कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को ठेंगा दिखाते हुए बृहस्पतिवार यानि 25 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरने वाले एक कार्गो जहाज पर जब हमला हुआ तभी लग गया था कि अब गड़बड़ होने के आसार हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार की घटना को समझौते का उल्लंघन बताया और संवाददाताओं से कहा कि “आपको जल्दी ही पता चल जाएगा।'' इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमाण्ड ने ईरान के अंदर मिसाइल ड्रोन साइट्स तटीय रडार केन्द्राsं पर एयर स्ट्राइक कर दी। ईरान पर हमलों के पहले ट्रंप का यह कहना कि “मुझे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि उन्होंने (ईरान ने) कल हमला किया।'' ईरान भी कहां पीछे रहने वाला था। उसने भी दावा किया कि अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके इस्लामिक रिपब्लिकन गार्ड ने भी बदला ले लिया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने दो टूक कहा कि “स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर ईरान का नियंत्रण है। इसलिए नियमों का सम्मान करें।''
मजे की बात तो यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप जिसे ईरान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन मान रहे हैं उसो ही इब्राहिम अजीजी ‘सीजफायर मैनेजमेण्ट' बताकर कहते हैं कि “नियंत्रण को तनाव बढ़ाना न समझें, यह सीजफायर का उल्लंघन नहीं है।''
लब्बोलुआब यह है कि पाकिस्तान इस समझौते पर चाहे जितनी डुगडुगी बजाए किन्तु वास्तविकता तो यह है कि जब तक खुद को एक पक्ष परस्त नहीं मानता, उसके लिए समझौतो में कही गई हर बात अनावश्यक एवं निरर्थक लगती है। ईरान भले ही बर्बाद हो चुका है किन्तु वह खुद को हारा हुआ न मानकर अमेरिका की नाक में दम करने वाला शत्रु मानता है। इसीलिए समझौते के तहत सीजफायर के सम्मान से ज्यादा वह स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर नियंत्रण के लिए चिंतित है। इससे एक बात स्पष्ट है कि इस समझौते के बावजूद दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ हमले करते रहेंगे। इसीलिए लगता है कि पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद तब तक संभव नहीं है जब तक कि दोनों पक्षों को सामझौते की जरूरत महसूस न हो।