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दिल्ली विधानसभा के आज से शुरू हो रहे मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के आसार

प्रकाशित: 07-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
कृष्ण देव पाठक
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के पावार से शुरू हो रहे मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं सत्र 7 से 11 अगस्त तक चलेगा। सत्र के दौरान जहां आम आदमी पार्टी का विपक्ष सरकार को घेराबंदी के लिए छात्राओं की साइकिल की खरीद मैं गड़बड़ के अलावा महिला लक्ष्मी योजना का अधिकांश लोगों को लाभ न मिलाना पानी के बड़े हुए बिल तकनीकी रूप से अभी तक वहीं के वहीं रहना समेत अन्य मुद्दे उठाकर यह कोशिश करेगा की सरकार कोई काम नहीं कर रही है जनता को कोई लाभ नहीं हो रहा है इस दौरान तीन बिल सदन से पास कराएगी। ये बिल पब्लिक सर्विस की समय-सीमा के भीतर डिलीवरी, दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड और बेड-एंड-ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट से संबंधित होंगे। स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी की बैठक के बाद कहा कि दिल्ली विधानसभा अपने मानसून सत्र के दौरान दो सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) रिपोर्ट पेश करेगी और तीन अहम बिल लाएगी।
कमेटी ने सर्वसम्मति से तीन दिन के सत्र के लिए विधायी एजेंडा तय किया। इस दौरान सदन 'दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (ओपन एक्सेस के लिए नियम और शर्तें) (दूसरा संशोधन) रेगुलेशन, 2026' से जुड़े नोटिफिकेशन और सुधार ) पर भी चर्चा करेगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (जिनके पास वित्त विभाग भी है) दो सीएजी रिपोर्ट पेश करेंगी। एक 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वर्ष के लिए दिल्ली सरकार के खातों पर और दूसरी 2024-25 के लिए राजधानी के राज्य वित्त पर। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद डी ए आर सी रेगुलेशन से जुड़े नोटिफिकेशन और सुधार पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि बिजली मंत्री आशीष सूद सदन में दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (ओपन एक्सेस के लिए नियम और शर्तें) (दूसरा संशोधन) रेगुलेशन, 2026 से संबंधित नोटिफिकेशन और सुधार पेश करेंगे। बैठक में डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट, अभय वर्मा (चीफ व्हिप), ओम प्रकाश शर्मा, सोम दत्त, जितेंद्र महाजन और श्री सुरेंद्र कुमार शामिल हुए।
पेश किए जाने वाले बिलों में 'दिल्ली (नागरिकों का समयबद्ध सेवा वितरण का अधिकार) बिल, 2026' शामिल है, जिसका मकसद 'दिल्ली (नागरिकों का समयबद्ध सेवा का अधिकार) एक्ट, 2011' को रद्द करना है। सदन 'दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड एक्ट, 2010' की धारा 2(g)(ग्ग्ग्) और उसके बाद के 2015 और 2020 के संशोधन एक्ट में बदलाव करने वाले बिल पर भी विचार करेगा। एक और बिल का मकसद 'नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑ़फ दिल्ली (इपोडिबल इंडिया) बेड एंड ब्रेक़फास्ट एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2007' और उसके 2010 और 2021 के संशोधन एक्ट को रद्द करना है। सदन के दौरान सत्ता पक्ष की कोशिश यह होगी कि वह जल्द से जल्द अपना विधाई कार्य पूरा करें बिलों को पारित करें और सदन में जिन मुद्दों पर चर्चा हो उसमें विपक्ष को ज्यादा बोलने का मौका ना मिल पाए और अपनी और से सरकार यह कोशिश करेगी कि वह लगातार काम कर रही है विपक्ष को इस बात का भी एहसास है कि सदन में हंगामा के चलते उन्हें सदन से बाहर भी किया जा सकता है इसलिए वह अपनी रणनीति पर विचार करके आएंगे कि सदन की बैठकों में सदन के अंदर कितना रहना फायदे का सौदा है और कितना नुकसान का उन हालातो के हिसाब से ही वह सदन के अंदर अपनी भूमिका तय करेंगे।
माना जा रहा है क्या आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी विधायकों को निर्देश दिए हैं कि मानसून सत्र के दौरान वह पूरी तरीके से सािढय रहे और हर मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगे और अपने-अपने क्षेत्र का भी हिसाब मांगने से पीछे नहीं हटे क्योंकि पिछले सत्रों के दौरान राजनीतिक हल्का में यह चर्चा रही थी की आम आदमी पार्टी के विधायक एकजुट नहीं है नेता विपक्ष अतिशी को अनमने ढंग से ही विधायक अपनी नेता मान रहे हैं और उनकी भूमिका भी सिर्फ औपचारिकता वाली नजर आ रही है जिसको लेकर बताया जाता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपनी बात ऊपर तक रखी थी बोली जब इस तरह का संदेश रहेगा तब पार्टी के कार्य करता इससे कहीं ना कहीं निराश होता है इस बार जब केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और बिहार में प्रशांत किशोर की जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी कहीं ना कहीं दबाव में है इसको लेकर भी सदन में विपक्ष के विधायक अपनी आवाज उठा सकते हैं। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष की की है कोशिश होगी कि वह विपक्ष के विधायकों को उनकी ही सरकार के पुराने मामलों में घेर रखें और अपनी सरकार की उपलब्धियां को उनसे श्रेष्ठ बताएं।