किसान नेता को तीन दिनों से नज़रबंद रखना अलोकतांत्रिक, किसान आंदोलन को दबाने की साजिश : भाकपा
प्रकाशित: 07-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। भाकपा (माले) ने चंदौली जिले में विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाने वाले पार्टी नेता और अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष श्रवण मौर्य को पिछले तीन दिनों से उनके बलुआ थाना क्षेत्र स्थित आवास पर पुलिस द्वारा नज़रबंद किए जाने की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे किसानों के लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने और 10 अगस्त को चंदौली जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित किसान महापंचायत को विफल करने की सुनियोजित प्रशासनिक साजिश करार दिया है। भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि श्रवण मौर्य लगातार विंध्य एक्सप्रेस-वे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे से प्रभावित किसानों की समस्याओं को उठा रहे थे और महापंचायत की तैयारियों में सािढय भूमिका निभा रहे थे। इसी कारण उन्हें घर से बाहर निकलने से रोका जा रहा है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर सरकार किसानों की आवाज नहीं दबा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल श्रवण मौर्य ही नहीं, बल्कि अन्य किसान नेताओं को भी नोटिस देकर किसानों को संगठित होने से रोकने और दमनात्मक कार्रवाई की धमकी देने में लगा है। इससे पहले महापंचायत के प्रचार के लिए चहनियां क्षेत्र सहित जिले में निकाली जा रही किसान यात्रा को भी प्रशासन ने बीच में ही रोक दिया। यह भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दमनात्मक कार्रवाइयां सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के कारण हो रही हैं।