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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारका में जन्माष्टमी समारोह में हुईं शामिल

प्रकाशित: 06-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा द्वारका, सेक्टर-10 स्थित डीडीए ग्राउंड में आयोजित 36वें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 2026 का दूसरा दिन आध्यात्मिकता, कला, तकनीक और निस्वार्थ सेवा का एक अद्भुत संगम बना। पहले दिन की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, दूसरे दिन भी भव्य नृत्य-नाटिकाओं, संगीतमय प्रस्तुतियों, एआई-आधारित दृश्यों और सामाजिक-आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन व उनके उपदेशों के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया गया।
संध्या का शुभारंभ दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी को समर्पित 'गुरु वंदना' (कत्थक और भरतनाट्यम का फ्यूजन) के साथ हुआ। इसके पश्चात 'श्याम अचानक आई गयी री' (संत सूरदास जी की काव्य रचना पर आधारित) और 'ऊधो, मोहे ब्रज बिसरत नाही' जैसी भावपूर्ण नृत्य-नाटिकाओं की प्रस्तुतियों ने लोगों का दिल जीत लिया। दूसरे दिन की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में 'ग्वालों की टोली' (माखनचोरी लीला) और 'ईश्वर मारते नहीं, तारते हैं' (जय-विजय का उद्धार) जैसी नाट्य-प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहीं। संस्थान के प्रचारकों ने आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से श्री कृष्ण के उपदेशों को आधुनिक जीवन, संबंधों और आंतरिक रूपांतरण से जोड़कर प्रस्तुत किया। 'जन गण मन में कृष्ण' की प्रस्तुति ने श्रीकृष्ण को भारत को जोड़ने वाले दिव्य सूत्र के रूप में प्रस्तुत किया: अनेक नाम। अनेक रूप। अनेक भाषाएँ। एक दिव्य स्वरूप। एक भाव। एक भारत! इस प्रस्तुति ने गरबा और संकीर्तन जैसी विविध पारंपरिक लय का उपयोग करते हुए, ब्रज के बांके बिहारी से लेकर असम के गोविंद तक श्रीकृष्ण के विभिन्न क्षेत्रीय स्वरूपों को एक धागे में पिरोया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसने प्रत्येक परंपरा को पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक एकीकरण जैसे प्रासंगिक आधुनिक मुद्दों से मजबूती के साथ जोड़ा। इस कार्पाम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी शिरकत की। उन्होंने श्रीकृष्ण के उपदेशों तथा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान व दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा समाज हित में किए जा रहे आध्यात्मिक व सामाजिक कार्यों की सराहना की और कहा, ‘आप सबको मेरी ओर से कृष्ण जन्मोत्सव की ढेर सारी बधाई, एवं शुभकामनाएं। मैं सच में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान को अपनी ओर से बधाई देती हूं, शुभकामनाएं देती हूं कि वर्षों से यह भक्ति की, अध्यात्म की ज्योति आपने जिस तरीके से लोगों के बीच में जला के रखी है, यह आज का कार्पाम भी उसी का उदाहरण है।