राष्ट्रपति ने शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश के 6 शिक्षकों को किया सम्मानित
प्रकाशित: 06-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
भोपाल (ब्यूरो प्रमुख)। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक दिवस के अवसर पर नेशनल टीचर आवर्ड-2026 के अंतर्गत आयोजित समारोह में देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले छह शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में डॉ. अर्चना शुक्ला, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, सुश्री संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, श्रीमती रीना गुप्ता एवं श्रीमती ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी सम्मानित शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना मध्यप्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। मध्यप्रदेश के इन शिक्षकों ने अपने नवाचारों, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां प्रदेश के अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने तथा शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों का यह सम्मान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक समुदाय के लिए गर्व का अवसर है। मध्यप्रदेश के इन 6 शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करते हुए शिक्षा को समाज परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां प्रदेश के युवा शिक्षकों और विद्यार्थियों को नए प्रयोग करने तथा उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेंगी। सम्मानित शिक्षकों में डॉ. अर्चना शुक्ला, विज्ञान एवं जीव विज्ञान की शिक्षिका हैं और पिछले 15 वर्षों से परियोजना आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उन्होंने विद्यार्थियों के साथ अनेक अभिनव और कम लागत वाली परियोजनाएं संचालित की हैं। एक हजार से अधिक स्पैरो हाउस की स्थापना, विद्यालय परिसर के वृक्षों की क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल मैपिंग तथा ‘प्लांट इमोशन' जैसी अभिनव परियोजनाएं उनके उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैं। शैलेन्द्र प्रताप सिंह, अंग्रेजी शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में जनभागीदारी के माध्यम से उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उनके प्रयासों से विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 69 से बढ़कर 202 हो गई तथा उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंच गई। उन्होंने बाल विवाह रोकने, विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों को पुन शिक्षा से जोड़ने तथा दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। सुश्री संगीता यादव, प्रधान शिक्षिका के रूप में नवाचार आधारित गणित शिक्षण और शिक्षक सशक्तिकरण के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने गणितोत्सव, क्वेस्ट फॉर मैथमेटिक्स, मैथेमाइंड और बैगलेस मैथमेटिक्स डे जैसे कार्पामों के माध्यम से गणित को आनंदपूर्ण और प्रयोग आधारित विषय के रूप में विकसित किया है। वे तकनीक आधारित शिक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को भी शिक्षा से जोड़ रही हैं। प्रो. सौरव दत्ता, आईआईएसईआर भोपाल में पादप जीवविज्ञानी हैं। वे शिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से विद्यार्थियों में मौलिक एवं शोधपरक सोच विकसित कर रहे हैं। उन्हें दो बार आईआईएसईआर भोपाल डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पौधों के विकास से संबंधित उनका शोध विशेष रूप से उल्लेखनीय है। श्रीमती रीना गुप्ता, शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन में श्रवण एवं दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड में प्रशिक्षण अधिकारी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी सम्मानित शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना मध्यप्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। मध्यप्रदेश के इन शिक्षकों ने अपने नवाचारों, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां प्रदेश के अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने तथा शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों का यह सम्मान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक समुदाय के लिए गर्व का अवसर है। मध्यप्रदेश के इन 6 शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करते हुए शिक्षा को समाज परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां प्रदेश के युवा शिक्षकों और विद्यार्थियों को नए प्रयोग करने तथा उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेंगी। सम्मानित शिक्षकों में डॉ. अर्चना शुक्ला, विज्ञान एवं जीव विज्ञान की शिक्षिका हैं और पिछले 15 वर्षों से परियोजना आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उन्होंने विद्यार्थियों के साथ अनेक अभिनव और कम लागत वाली परियोजनाएं संचालित की हैं। एक हजार से अधिक स्पैरो हाउस की स्थापना, विद्यालय परिसर के वृक्षों की क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल मैपिंग तथा ‘प्लांट इमोशन' जैसी अभिनव परियोजनाएं उनके उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैं। शैलेन्द्र प्रताप सिंह, अंग्रेजी शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में जनभागीदारी के माध्यम से उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उनके प्रयासों से विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 69 से बढ़कर 202 हो गई तथा उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंच गई। उन्होंने बाल विवाह रोकने, विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों को पुन शिक्षा से जोड़ने तथा दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। सुश्री संगीता यादव, प्रधान शिक्षिका के रूप में नवाचार आधारित गणित शिक्षण और शिक्षक सशक्तिकरण के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने गणितोत्सव, क्वेस्ट फॉर मैथमेटिक्स, मैथेमाइंड और बैगलेस मैथमेटिक्स डे जैसे कार्पामों के माध्यम से गणित को आनंदपूर्ण और प्रयोग आधारित विषय के रूप में विकसित किया है। वे तकनीक आधारित शिक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को भी शिक्षा से जोड़ रही हैं। प्रो. सौरव दत्ता, आईआईएसईआर भोपाल में पादप जीवविज्ञानी हैं। वे शिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से विद्यार्थियों में मौलिक एवं शोधपरक सोच विकसित कर रहे हैं। उन्हें दो बार आईआईएसईआर भोपाल डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पौधों के विकास से संबंधित उनका शोध विशेष रूप से उल्लेखनीय है। श्रीमती रीना गुप्ता, शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन में श्रवण एवं दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड में प्रशिक्षण अधिकारी हैं।