पौराणिक लोक परंपराओं एवं जनश्रुतियों से आमजन को अवगत कराने का प्रयास सराहनीय मनीषा सिंह
प्रकाशित: 06-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
शहडोल । संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत एवं जनश्रुतियों से आमजन को अवगत कराया गया।
कार्पाम को संबोधित करते हुए विधायक श्रीमती मनीषा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पौराणिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं एवं संस्कृति से आमजन को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन में सांस्कृतिक एवं पारंपरिक रंग देखने को मिला। कार्पाम में जनपद अध्यक्ष सोहागपुर श्रीमती हीरावती कोल, जिला योजना समिति की सदस्य श्रीमती अमिता चपरा, अपर कलेक्टर संरोधन सिंह, एसडीएम श्रीमती अमृता गर्ग, संयुक्त विकास आयुक्त एमपी सिंह, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग आनंद सिन्हा, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक विवेक पाण्डेय, व्यापारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण गुप्ता सहित सीईओ जनपद पंचायत ममता मिश्रा, गणमान्य नागरिक, शासकीय सेवक, पत्रकार, आमजन एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। श्रीकृष्ण पाथेय नया, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन शहडोल के सहयोग से श्रीकृष्ण की लोक-स्मृतियों, भक्ति और सांस्कृतिक विविधता को समर्पित श्रीकृष्ण पर्वश् का आयोजन जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जनपद सभागार, शहडोल में पावार को किया गया। लोकगायन, कथक और भक्ति संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने वातावरण को कृष्णमय कर दिया। विंध्य की लोकपरंपरा से लेकर शास्त्राrय नृत्य और भक्ति संगीत तक, कलाकारों ने श्रीकृष्ण के विविध रूपों को अपनी कला के माध्यम से जीवंत किया।
कार्पाम का शुभारंभ रीवा की सुप्रसिद्ध बघेली लोक गायिका सुश्री मणिमाला सिंह एवं साथियों की लोक गायन प्रस्तुति से हुआ। प्रस्तुति गणेश वंदना ‘पार्वती के पुत्र गजानन झूल रहे पलना' से आरंभ हुई। लोकधुनों की इस यात्रा में बघेली लोकजीवन की सहज मिठास और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। सोहर ‘भादो रैन भयावन अति डेरवान', बधाई ‘बाजी बाजी रे बधाइयां', ‘बृज मां बजत बधाई हो', कजरी ‘हरे राम बने कन्हैया', हिंडोली ‘चारों खूटे के बने रे', झूला ‘मोहन छोड़ दे रे कलाइयां', दादरा ‘श्याम छेड़ ना हमका' एवं ‘गोकुल में बजत बधाई हो' और ‘बाजी बाजी बधाइयां यशोदा अंगना' जैसी प्रस्तुतियों ने लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। गायन में बघेली अंचल की मिट्टी की सुगंध, लोकभावनाओं की आत्मीयता और कृष्ण के प्रति सहज अनुराग मुखर हुआ। इसके पश्चात कथक नृत्यांगना डॉ.शांभवी शुक्ला मिश्रा एवं साथी, दिल्ली ने ‘कृष्ण-सुदामा मैत्री प्रसंग' को कथक के भाव, नृत्य और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।
शहडोल । संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत एवं जनश्रुतियों से आमजन को अवगत कराया गया।
कार्पाम को संबोधित करते हुए विधायक श्रीमती मनीषा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पौराणिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं एवं संस्कृति से आमजन को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन में सांस्कृतिक एवं पारंपरिक रंग देखने को मिला। कार्पाम में जनपद अध्यक्ष सोहागपुर श्रीमती हीरावती कोल, जिला योजना समिति की सदस्य श्रीमती अमिता चपरा, अपर कलेक्टर संरोधन सिंह, एसडीएम श्रीमती अमृता गर्ग, संयुक्त विकास आयुक्त एमपी सिंह, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग आनंद सिन्हा, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक विवेक पाण्डेय, व्यापारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण गुप्ता सहित सीईओ जनपद पंचायत ममता मिश्रा, गणमान्य नागरिक, शासकीय सेवक, पत्रकार, आमजन एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। श्रीकृष्ण पाथेय नया, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन शहडोल के सहयोग से श्रीकृष्ण की लोक-स्मृतियों, भक्ति और सांस्कृतिक विविधता को समर्पित श्रीकृष्ण पर्वश् का आयोजन जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जनपद सभागार, शहडोल में पावार को किया गया। लोकगायन, कथक और भक्ति संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने वातावरण को कृष्णमय कर दिया। विंध्य की लोकपरंपरा से लेकर शास्त्राrय नृत्य और भक्ति संगीत तक, कलाकारों ने श्रीकृष्ण के विविध रूपों को अपनी कला के माध्यम से जीवंत किया।
कार्पाम का शुभारंभ रीवा की सुप्रसिद्ध बघेली लोक गायिका सुश्री मणिमाला सिंह एवं साथियों की लोक गायन प्रस्तुति से हुआ। प्रस्तुति गणेश वंदना ‘पार्वती के पुत्र गजानन झूल रहे पलना' से आरंभ हुई। लोकधुनों की इस यात्रा में बघेली लोकजीवन की सहज मिठास और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। सोहर ‘भादो रैन भयावन अति डेरवान', बधाई ‘बाजी बाजी रे बधाइयां', ‘बृज मां बजत बधाई हो', कजरी ‘हरे राम बने कन्हैया', हिंडोली ‘चारों खूटे के बने रे', झूला ‘मोहन छोड़ दे रे कलाइयां', दादरा ‘श्याम छेड़ ना हमका' एवं ‘गोकुल में बजत बधाई हो' और ‘बाजी बाजी बधाइयां यशोदा अंगना' जैसी प्रस्तुतियों ने लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। गायन में बघेली अंचल की मिट्टी की सुगंध, लोकभावनाओं की आत्मीयता और कृष्ण के प्रति सहज अनुराग मुखर हुआ। इसके पश्चात कथक नृत्यांगना डॉ.शांभवी शुक्ला मिश्रा एवं साथी, दिल्ली ने ‘कृष्ण-सुदामा मैत्री प्रसंग' को कथक के भाव, नृत्य और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।