युद्ध विराम के नाम पर धोखा?
प्रकाशित: 09-06-2026 | लेखक: अनिल नरेंद्र
क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है और सीजफायर के नाम पर ईरान को बेवकूफ बना रहा है? अमेरिकी वारशिप यूएसएस त्रिपोली की तैनाती के बाद सवाल फिर यह उठ गया है कि अमेरिका की असल नीयत क्या है? त्रिपोली की तैनाती के बाद यह सवाल उठाना लाजमी है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को ईरान की ओर से लांच किए गए ड्रोन को तबाह कर देने का दावा किया। वहीं अब होर्मूज में यूएसएस त्रिपोली की तैनाती की ताजा खबर आई है। सवाल उठता है कि क्या ईरान पर अब जमीनी हमला होने जा रहा है? अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कहने को तो अभी जारी है। लेकिन जमीन और समुद्र पर जो स्थिति दिख रही है वे कुछ और ही कहानी की ओर इशारा कर रही है। पिछले 72 घंटों में हुई कई सैन्य कार्रवाईयों ने पश्चिम एशिया में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका सिर्फ ईरान पर दबाव बना रहा है या फिर होर्मूज जलडमरूमध्य पर निर्णायक बढ़त हासिल करने की तैयारी कर रहा है? क्योंकि जो तैनाती अमेरिका कर रहा है, उसे देखकर तो ऐसा लगता है कि ट्रंप अब ईरान के आइलैंड पर कब्जा करने जा रहा है? घटनाओं की शुरुआत उस खबर से हुई जिसमें बताया गया कि ईरानी झंडे वाले चार तेल टैंकर होर्मूज पार करने में सफल रहे। ये जहाज कथित तौर पर करीब 70 लाख बैरल तेल लेकर निकले थे और प्रतिबंधों के बावजूद आगे बढ़ गए। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी इंडो-पैसेफिक कमांड ने घोषणा की कि उसने हिंद महासागर में प्रतिबंधित तेल टैंकर एमटी डेविना को रोककर इस पर कब्जा कर लिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कब्जे में लिया गया जहाज उन्हीं चार टैंकरों में से एक था या नहीं। लेकिन टाइमिंग ने कई अटकलों को जन्म दिया है। इसे मसले पर संभल ही रहा था कि उस पर अमेरिका ने हमला कर दिया। शनिवार को ही अमेरिकी सैंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने होर्मूज की ओर बढ़ रहे चार ईरानी हमलावर ड्रोन मार गिराए। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के गोसक और केशम द्वीप पर मौजूद तटीय रडार ठिकानों पर हमले किए। पहली बार नहीं है जब केशम को निशाना बनाया गया है। लेकिन मौजूदा हालात में इस द्वीप का नाम बार-बार सामने आना सैन्य विश्लेषकों का ध्यान खींच रहा है। जवाब में ईरान ने भी कुवैत और बहरीन की ओर सात मिसाइलें दागी। इनमें से 6 को अमेरिका ने रोकने का दावा किया। इस बीच अमेरिका ने यूएसएस त्रिपोली की अरब सागर और होर्मूज क्षेत्र में तैनाती की है। यूएसएस त्रिपोली कोई साधारण युद्ध पोत नहीं है। यह एक उभयचर हमलावर जहाज है, जिसका मतलब है कि ये जहाज पानी से तो हमला कर ही सकता है, जरूरत पड़ने पर जमीन के बेहद करीब जाकर सैनिकों को उतार भी सकता है। ऐसे जहाज समुद्र से सीधे सैन्य अभियान चलाए जाने के लिए बनाए जाते हैं। उधर केशम ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और होर्मूज के मुहाने पर मौजूद है। इसे न डूबने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर भी कहा जाता है। ईरान ने यहां वर्षों से रडार सिस्टम, ड्रोन बेस, एंटी शिप मिसाइलें, अंडरग्राउंड सुरंगे और नौ सैनिक अड्डे बनाए हुए हैं। अगर अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा कर लेता है तो उसे कई बड़े स्ट्रेटिजिक फायदे मिल सकते हैं। वैसे अमेरिका के लिए केशम पर कब्जा बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला है। इसका मतलब होगा सीधे अंगारों को हाथ में लेना। केशम ईरानी जमीन से बेहद करीब है। अगर अमेरिका अपने सैनिकों को यहां उतारता है तो उसे ईरान की मिसाइलों, ड्रोन, नौ सैनिक हमलों और संभावित गुरिल्ला प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यूएसएस त्रिपोली की मौजूदगी, केशम पर लगातार हमले और टैंकरों को रोकने जैसी कार्रवाईयों ने यह बहस तेज कर दी है कि अमेरिका होर्मूज पर रणनीतिक बढ़त लेने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि शांति वार्ता चलने के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की बजाए और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
-अनिल नरेन्द्र
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