ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका
प्रकाशित: 09-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
कोलकाता, (भाषा)। तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी संकट सोमवार को उस समय और गहरा गया जब पार्टी की वरिष्" सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग"बंधन (राजग)का समर्थन करने का फैसला किया है। इसी के साथ पार्टी की संसदीय इकाई में फूट सार्वजनिक हो गई है और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद पार्टी पर ममता बनर्जी का निंयत्रण और कमजोर हो गया है।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जहां उसके 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी आला कमान के अनुभवी नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया और निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी को उस पद पर नामित कर दिया। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल सोमवार को उसके संसदीय खेमे में भी फैलती नजर आई, जब बागी सांसदों के एक समूह ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग"बंधन (राजग) को समर्थन दिया, जबकि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के खिलाफ अखिल भारतीय स्तर पर रणनीति तैयार करने के लिए इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) की बै"क में भाग लेने के लिए दिल्ली में थीं।काकोली ने पीटीआई-भाषा से फोन पर बताया कि सांसदों ने रागज को समर्थन देने के अपने फैसले के बारे में लोकसभा अध्यक्ष को सूचित कर दिया है। उन्होंने कहा, करीब बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राजग को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है और इनमें मैं भी शामिल हूं। हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर राजग को समर्थन देने की अपनी इच्छा व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कहा कि उनका मत है कि काकोली सदन में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे। तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य सांसद ने पीटीआई-भाषा से कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल ने काकोली को मुख्य सचेतक पद से हटाने और उनके स्थान पर कल्याण बनर्जी को नियुक्त करने का फैसला किया था, लेकिन इसकी सूचना लोकसभा सचिवालय को नहीं दी गई थी। काकोली ने दावा किया कि वह लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं और कहा कि यह निर्णय साथी सांसदों के बीच परामर्श के बाद लिया गया था। उन्होंने कहा, हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना है कि हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग राजग के अनुरूप होना चाहिए।
बागी सांसदों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बगावत करने वाले लोकसभा सदस्यों ने तत्काल तृणमूल कांग्रेस से से इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि यह रणनीति दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।सूत्रों ने बताया कि यह गणित राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तृणमूल के वर्तमान में 28 लोकसभा सदस्य हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली हुई है। 20 सदस्यों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत को आसानी से पार कर जाएगा।यह घटनाक्रम बागी सांसदों द्वारा नई दिल्ली में एक बंद कमरे में बै"क करने के एक दिन बाद सामने आया है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों पर तृणमूल नेतृत्व के अधिकार को लेकर उ"ने वाले सवाल और भी तेज होने की आशंका है। ममता बनर्जी के लिए, संकट अब संग"नात्मक असहमति से आगे बढ़कर पार्टी की संसदीय ताकत पर से नियंत्रण खोने की आशंका में तब्दील हो गया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल और विपक्षी ग"बंधन, दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जहां उसके 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी आला कमान के अनुभवी नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया और निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी को उस पद पर नामित कर दिया। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल सोमवार को उसके संसदीय खेमे में भी फैलती नजर आई, जब बागी सांसदों के एक समूह ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग"बंधन (राजग) को समर्थन दिया, जबकि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के खिलाफ अखिल भारतीय स्तर पर रणनीति तैयार करने के लिए इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) की बै"क में भाग लेने के लिए दिल्ली में थीं।काकोली ने पीटीआई-भाषा से फोन पर बताया कि सांसदों ने रागज को समर्थन देने के अपने फैसले के बारे में लोकसभा अध्यक्ष को सूचित कर दिया है। उन्होंने कहा, करीब बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राजग को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है और इनमें मैं भी शामिल हूं। हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर राजग को समर्थन देने की अपनी इच्छा व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कहा कि उनका मत है कि काकोली सदन में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे। तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य सांसद ने पीटीआई-भाषा से कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल ने काकोली को मुख्य सचेतक पद से हटाने और उनके स्थान पर कल्याण बनर्जी को नियुक्त करने का फैसला किया था, लेकिन इसकी सूचना लोकसभा सचिवालय को नहीं दी गई थी। काकोली ने दावा किया कि वह लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं और कहा कि यह निर्णय साथी सांसदों के बीच परामर्श के बाद लिया गया था। उन्होंने कहा, हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना है कि हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग राजग के अनुरूप होना चाहिए।
बागी सांसदों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बगावत करने वाले लोकसभा सदस्यों ने तत्काल तृणमूल कांग्रेस से से इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि यह रणनीति दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।सूत्रों ने बताया कि यह गणित राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तृणमूल के वर्तमान में 28 लोकसभा सदस्य हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली हुई है। 20 सदस्यों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत को आसानी से पार कर जाएगा।यह घटनाक्रम बागी सांसदों द्वारा नई दिल्ली में एक बंद कमरे में बै"क करने के एक दिन बाद सामने आया है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों पर तृणमूल नेतृत्व के अधिकार को लेकर उ"ने वाले सवाल और भी तेज होने की आशंका है। ममता बनर्जी के लिए, संकट अब संग"नात्मक असहमति से आगे बढ़कर पार्टी की संसदीय ताकत पर से नियंत्रण खोने की आशंका में तब्दील हो गया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल और विपक्षी ग"बंधन, दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।