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सफाई कर्मियों की सेफ्टी टैंक में मृत्यु का चक्र कब रुकेगा

प्रकाशित: 09-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
देश में ऐसा कोई बड़ा शहर नहीं जहां सफाई कर्मचारी की मृत्यु सेफ्टी टैंक की जहरीली गैस के कारण नहीं होती है। सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइड लाइन के बावजूद सेफ्टी टैंक में लोगों को उतारा जाता है और सफाई कर्मचारी काल का ग्रास बन जाते हैं। सरकारें मुआवजा देकर अपने जिम्मेदारी का निर्वाह कर लेते हैं लेकिन इनकी जीवन भर की त्रासदी का कौन जिम्मेदार है। सफाई कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी है यह वर्ग जागरूक होकर इस तरह के घृणित कार्यों में अपने आप को शामिल न करें। सरकार की लाख कोशिशें एवं स्पष्ट दिशा निर्देश के बावजूद सफाई कर्मचारी की जिंदगी की हजार दुश्वारियां से भरी होती है और सेफ्टी टैंक में काम करने को मजबूर होते हैं। गुजरात में एक ज्वेलरी फैक्ट्री के सेफ्टी टैंक में दम घुटने और जहरीली गैस के प्रभाव से चार लोगों की मौत की घटना ने एक बार फिर देश में औद्योगिक सुरक्षा और मैनुअल सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना गुजरात के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक ज्वेलरी इकाई से जुड़ी बताई जा रही है, जहां टैंक की सफाई या निरीक्षण के दौरान एक के बाद एक कई लोग अंदर उतरे और जहरीली गैस की चपेट में आ गए। ऐसे मामलों में अक्सर हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन तथा अन्य विषैली गैसें मौजूद होती हैं, जिनके कारण कुछ ही मिनटों में व्यक्ति बेहोश हो सकता है और समय पर बचाव न मिलने पर उसकी मृत्यु भी हो सकती है। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा की कमियों का उदाहरण भी है। देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर सीवर, सेप्टिक टैंक, फैक्ट्री टैंक और भूमिगत जलाशयों में सफाई या रखरखाव के दौरान श्रमिकों की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। अधिकांश मामलों में सुरक्षा उपकरणों की अनुपस्थिति, गैस की जांच न होना, प्रशिक्षित बचाव दल का अभाव और नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण बनते हैं। कई बार एक व्यक्ति को बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति बिना सुरक्षा के अंदर उतर जाता है और वह भी हादसे का शिकार हो जाता है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ जाती है। सरकारों ने औद्योगिक सुरक्षा और मैनुअल स्कैवेंजिंग पर रोक लगाने के लिए अनेक कानून और दिशानिर्देश बनाए हैं, लेकिन उनका पालन जमीनी स्तर पर पूरी तरह नहीं हो पाता। आवश्यकता इस बात की है कि किसी भी टैंक या बंद स्थान में प्रवेश से पहले गैस परीक्षण अनिवार्य किया जाए, ऑक्सीजन स्तर की जांच हो, श्रमिकों को सुरक्षा किट, ऑक्सीजन मास्क और सेफ्टी हार्नेस उपलब्ध कराए जाएं तथा हर औद्योगिक इकाई में आपातकालीन बचाव दल की व्यवस्था हो। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई और भारी आर्थिक दंड लगाया जाना चाहिए ताकि सुरक्षा को केवल औपचारिकता न समझा जाए। समाधान का एक महत्वपूर्ण पक्ष तकनीक का उपयोग भी है। आज ऐसे रोबोटिक उपकरण और मशीनें उपलब्ध हैं जो सीवर और टैंकों की सफाई बिना किसी व्यक्ति को अंदर भेजे कर सकती हैं।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।