एपस्टीन विवाद पर एक्शन: दिल्ली हाई कोर्ट ने हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी से जुड़े पोस्ट हटाने का दिया आदेश
प्रकाशित: 18-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे विवादित कंटेंट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जोड़ने वाली सभी पोस्ट 24 घंटे के भीतर हटाई जाएं।
हिमायनी पुरी ने इन पोस्ट्स को झूठा और मानहानिकारक बताते हुए अदालत का रुख किया था। उन्होंने न केवल इन्हें हटाने की मांग की, बल्कि 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी ठोका है।
कोर्ट का सख्त आदेश
मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की सामग्री को न सिर्फ हटाया जाए, बल्कि भविष्य में इसके प्रसार पर भी रोक लगाई जाए। अदालत ने कहा कि अगर संबंधित यूजर्स पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो प्लेटफॉर्म्स खुद इसे ब्लॉक करें या हटाएं।
‘प्रतिष्ठा को नुकसान’ पर चिंता
अदालत ने शुरुआती तौर पर माना कि हिमायनी पुरी के पक्ष में मामला बनता है। साथ ही कहा कि यदि तुरंत राहत नहीं दी गई, तो उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय नुकसान हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में तय की गई है।
वकील ने बताया आरोप बेबुनियाद
हिमायनी की ओ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की वित्त पेशेवर हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं।
‘साजिश के तहत चलाया गया अभियान’
याचिका में कहा गया है कि फरवरी 2026 से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—जैसे X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन—पर उनके खिलाफ एक संगठित तरीके से गलत जानकारी फैलाई गई।
हिमायनी पुरी का कहना है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके जेफ्री एपस्टीन से किसी भी प्रकार के संबंध होने के दावे पूरी तरह निराधार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने संबंधित पक्षों से बिना शर्त माफी और सभी पोस्ट वापस लेने की मांग भी की है।
हिमायनी पुरी ने इन पोस्ट्स को झूठा और मानहानिकारक बताते हुए अदालत का रुख किया था। उन्होंने न केवल इन्हें हटाने की मांग की, बल्कि 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी ठोका है।
कोर्ट का सख्त आदेश
मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की सामग्री को न सिर्फ हटाया जाए, बल्कि भविष्य में इसके प्रसार पर भी रोक लगाई जाए। अदालत ने कहा कि अगर संबंधित यूजर्स पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो प्लेटफॉर्म्स खुद इसे ब्लॉक करें या हटाएं।
‘प्रतिष्ठा को नुकसान’ पर चिंता
अदालत ने शुरुआती तौर पर माना कि हिमायनी पुरी के पक्ष में मामला बनता है। साथ ही कहा कि यदि तुरंत राहत नहीं दी गई, तो उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय नुकसान हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में तय की गई है।
वकील ने बताया आरोप बेबुनियाद
हिमायनी की ओ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की वित्त पेशेवर हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं।
‘साजिश के तहत चलाया गया अभियान’
याचिका में कहा गया है कि फरवरी 2026 से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—जैसे X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन—पर उनके खिलाफ एक संगठित तरीके से गलत जानकारी फैलाई गई।
हिमायनी पुरी का कहना है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके जेफ्री एपस्टीन से किसी भी प्रकार के संबंध होने के दावे पूरी तरह निराधार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने संबंधित पक्षों से बिना शर्त माफी और सभी पोस्ट वापस लेने की मांग भी की है।