NATO ने खींचे हाथ तो ट्रंप ने अकेले संभाला मोर्चा, होर्मुज के रास्ते पर गिराया 5000 पाउंड के बम
प्रकाशित: 18-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मिडल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि 17 मार्च 2026 को अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के लिए एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया है. इस कार्रवाई के तहत ईरान के तटीय इलाकों में स्थित उन मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया है. जो इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए बड़ा खतरा बने हुए थे. अमेरिका का दावा है कि ये ईरानी एंटी-शिप मिसाइलें वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई को बाधित कर रही थीं.
ट्रंप ने बंकर बस्टर बमों से तबाही
इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें इस्तेमाल किए गए हथियार हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक. अमेरिका ने ‘बंकर बस्टर’ कहे जाने वाले डीप पेनिट्रेटर बमों का इस्तेमाल किया है. ये बम जमीन की गहराई में बने कंक्रीट के मजबूत ठिकानों को भी मलबे में तब्दील करने की ताकत रखते हैं. दरअसल. ईरान ने इस युद्ध के दौरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर अपना कब्जा जमा लिया था. जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन के लिए नाटो देशों से मदद मांगी थी. लेकिन ब्रिटेन और स्पेन जैसे करीबियों ने युद्ध के विस्तार के डर से हाथ पीछे खींच लिए हैं.
क्या है 5,000 पाउंड वाला हथियार और इसकी ताकत?
अमेरिकी वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किया गया यह बम तकनीकी रूप से बेहद घातक है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक के अनुसार. यह 30,000 पाउंड की कैटेगरी वाला महाशक्तिशाली हथियार है. जिसमें 5,000 पाउंड का वारहेड लगा होता है. इसे GBU-72/B के नाम से जाना जाता है. जिसका सफल परीक्षण साल 2021 में किया गया था. यह बम खास तौर पर उन सैन्य अड्डों को तबाह करने के लिए बनाया गया है. जो पहाड़ों या जमीन के काफी नीचे छिपे होते हैं. अमेरिका का मकसद साफ है कि वह ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म कर देना चाहता है. जो समुद्र में अमेरिकी दबदबे को चुनौती दे रही है.
घर में विरोध और युद्ध के विस्तार का खतरा
ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध को लेकर खुद अमेरिका के भीतर भी दरारें दिखने लगी हैं. यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है. इससे पहले जून 2025 में भी अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया था. लेकिन मौजूदा हमले के बाद नेशनल एंटी टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है. केंट का कहना है कि वे इस अंतहीन युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते. अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस रास्ते पर कब्जा कर पाएगा या फिर ईरान की जवाबी कार्रवाई पूरी दुनिया को एक तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर ले जाकर खड़ा कर देगी.
ट्रंप ने बंकर बस्टर बमों से तबाही
इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें इस्तेमाल किए गए हथियार हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक. अमेरिका ने ‘बंकर बस्टर’ कहे जाने वाले डीप पेनिट्रेटर बमों का इस्तेमाल किया है. ये बम जमीन की गहराई में बने कंक्रीट के मजबूत ठिकानों को भी मलबे में तब्दील करने की ताकत रखते हैं. दरअसल. ईरान ने इस युद्ध के दौरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर अपना कब्जा जमा लिया था. जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन के लिए नाटो देशों से मदद मांगी थी. लेकिन ब्रिटेन और स्पेन जैसे करीबियों ने युद्ध के विस्तार के डर से हाथ पीछे खींच लिए हैं.
क्या है 5,000 पाउंड वाला हथियार और इसकी ताकत?
अमेरिकी वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किया गया यह बम तकनीकी रूप से बेहद घातक है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक के अनुसार. यह 30,000 पाउंड की कैटेगरी वाला महाशक्तिशाली हथियार है. जिसमें 5,000 पाउंड का वारहेड लगा होता है. इसे GBU-72/B के नाम से जाना जाता है. जिसका सफल परीक्षण साल 2021 में किया गया था. यह बम खास तौर पर उन सैन्य अड्डों को तबाह करने के लिए बनाया गया है. जो पहाड़ों या जमीन के काफी नीचे छिपे होते हैं. अमेरिका का मकसद साफ है कि वह ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म कर देना चाहता है. जो समुद्र में अमेरिकी दबदबे को चुनौती दे रही है.
घर में विरोध और युद्ध के विस्तार का खतरा
ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध को लेकर खुद अमेरिका के भीतर भी दरारें दिखने लगी हैं. यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है. इससे पहले जून 2025 में भी अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया था. लेकिन मौजूदा हमले के बाद नेशनल एंटी टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है. केंट का कहना है कि वे इस अंतहीन युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते. अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस रास्ते पर कब्जा कर पाएगा या फिर ईरान की जवाबी कार्रवाई पूरी दुनिया को एक तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर ले जाकर खड़ा कर देगी.