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प्रधान का त्यागपत्र छात्रों और युवाओं के आंदोलन की ऐतिहासिक जीत: वाम दल

प्रकाशित: 26-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। वाम दलों के नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों एवं युवाओं के आंदोलन की ऐतिहासिक जीत करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शिक्षा क्षेत्र में सुधारों से जुड़ी मांगों में सिर्फ पहला कदम है।
माक्&सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग किया जाना चाहिए और छात्र तथा छात्र विरोधी, व्यावसायिक तथा सांप्रदायिक एनईपी 2020 को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर बर्बर हमला करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्वाई की भी मांग की। उन्होंने खेल, कला, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी हस्तियों द्वारा आंदोलन को दिए गए समर्थन का भी स्वागत किया और कहा कि इस अनुभव से पता चला है कि एकजुट संघर्ष सफल हो सकते हैं।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने कहा कि प्रधान का इस्तीफा लगातार चले संघर्ष का नतीजा है और छात्र आंदोलन ने भाजपा के अहंकार को पराजित कर दिया तथा मोदी-शाह सरकार को अपनी विफलताओं का जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया। राजा ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस लेने, पुलिस कार्रवाई के लिए बिना शर्त माफी मांगने और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के कारण अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि आंदोलन ने बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक, निजीकरण, अत्यधिक केंद्रीकरण और सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर किए जाने से जुड़ी गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि सुलभ, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष जारी रहेगा। भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने प्रधान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह पूर्व मंत्री द्वारा किया गया एकमात्र समझदारी भरा काम है।
भट्टाचार्य ने एक्स पर प्रधान के पोस्ट को टैग करते हुए कहा कि मंत्री यह स्वीकार करने में विफल रहे कि उनका इस्तीफा भारत के युवाओं ने आदेशित किया था।