बिजली विभाग की लापरवाही पर सख्त हुई स्थायी लोक अदालत
प्रकाशित: 26-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
बांदा, (वीअ)। बिजली विभाग की लापरवाही से जुड़े मामलों में स्थायी लोक अदालत,बांदा ने सख्त रुख अपनाया है।अलग-अलग मामलों में अदालत ने जहां छह साल तक कृषि बिजली कनेक्शन न देने पर किसान को राहत देते हुए विभाग को कनेक्शन उपलब्ध कराने और 7 हजार क्षतिपूर्ति देने एवं सारा समान देने का आदेश दिया,वहीं करंट लगने से भैंस की मौत के मामले में किसान को 50 हजार मुआवजा देने का निर्देश दिया।इसके अलावा 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से प्लंबर की मौत के मामले में भी परिजनों की ओर से दायर क्षतिपूर्ति याचिका पर सुनवाई करते हुए 816000 रुपए देने का आदेश दिया दिया।नरसिंहपुर मजरा पिपरा,थाना कालिंजर निवासी लल्लू ने लोक अदालत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में 7.5 एचपी कृषि नलकूप के लिए निर्धारित शुल्क व 39,440 जमा किए थे। आरोप लगाया कि सुविधा शुल्क न देने पर उनका सीरियल नंबर पीछे कर दिया गया,जबकि बाद के आवेदकों को कनेक्शन जारी कर दिए गए।सुनवाई के बाद अदालत ने इसे सेवा में गंभीर लापरवाही मानते हुए बिजली विभाग को 45 दिन के भीतर बिना अतिरिक्त शुल्क के कनेक्शन उपलब्ध कराने और 7,000 क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।साथ ही तय समय में आदेश का पालन न होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने के निर्देश दिए।दूसरे मामले में तिंदवारी क्षेत्र के ग्राम जरिया मजरा-खौड़ा निवासी फूलचन्द्र द्विवेदी ने आरोप लगाया कि घर के सामने बिजली के पोल से लटका तार उनकी भैंस के संपर्क में आ गया, जिससे करंट लगने से उसकी मौत हो गई।विद्युत विभाग ने घटना से इनकार किया, लेकिन गवाहों, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार माना।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के स्ट्रिक्ट लाइबिलिटी सिद्धांत का हवाला देते हुए विभाग को 30 दिन के भीतर 50,000 मुआवजा देने तथा विलंब होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का आदेश दिया।इसी बीच शहर के जरैली कोठी क्षेत्र में वर्ष 2022 में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर प्लंबर अंसार मंसूरी की मौत के मामले में भी स्थायी लोक अदालत में सुनवाई हुई।मृतक के पिता रहीम बख्श उर्फ शेख रहीम और माता सहिदिया ने विद्युत विभाग की लापरवाही का आरोप लगाते हुए आरोप लगाया था,जिस पर 816000 रूपए की क्षतिपूर्ति दी गई हैं।उनका कहना है कि मकान की छत से सटी हाईटेंशन लाइन के ढीले तारों के संपर्क में लोहे का पाइप आने से हादसा हुआ।इन मामलों की सुनवाई स्थायी लोक अदालत,बांदा के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता,वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह तथा सदस्या शिवांगी शुक्ला की पीठ ने की।लगातार आए इन मामलों में अदालत के रुख से स्पष्ट संकेत मिला है कि किसी भी विभाग की लापरवाही से उपभोक्ताओं और आम नागरिकों को होने वाली क्षति पर जवाबदेही तय की जाएगी।वही लोक अदालत के इस फैसले से उपभोक्ता,अधिवक्ता सहित आम जनमानस में खुशी की लहर दौड़ रही हैं।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के स्ट्रिक्ट लाइबिलिटी सिद्धांत का हवाला देते हुए विभाग को 30 दिन के भीतर 50,000 मुआवजा देने तथा विलंब होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का आदेश दिया।इसी बीच शहर के जरैली कोठी क्षेत्र में वर्ष 2022 में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर प्लंबर अंसार मंसूरी की मौत के मामले में भी स्थायी लोक अदालत में सुनवाई हुई।मृतक के पिता रहीम बख्श उर्फ शेख रहीम और माता सहिदिया ने विद्युत विभाग की लापरवाही का आरोप लगाते हुए आरोप लगाया था,जिस पर 816000 रूपए की क्षतिपूर्ति दी गई हैं।उनका कहना है कि मकान की छत से सटी हाईटेंशन लाइन के ढीले तारों के संपर्क में लोहे का पाइप आने से हादसा हुआ।इन मामलों की सुनवाई स्थायी लोक अदालत,बांदा के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता,वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह तथा सदस्या शिवांगी शुक्ला की पीठ ने की।लगातार आए इन मामलों में अदालत के रुख से स्पष्ट संकेत मिला है कि किसी भी विभाग की लापरवाही से उपभोक्ताओं और आम नागरिकों को होने वाली क्षति पर जवाबदेही तय की जाएगी।वही लोक अदालत के इस फैसले से उपभोक्ता,अधिवक्ता सहित आम जनमानस में खुशी की लहर दौड़ रही हैं।