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राज्यपाल ने किसान-केंद्रित तकनीक और ‘सिंगल विंडो' समाधान पर दिया जोर

प्रकाशित: 14-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में दिनांक 12 सितम्बर, 2026 को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर एवं जनभवन, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘एआई मंथन 2026' के अंतर्गत कृषि, जीनोमिक्स एवं डिजिटल खेती के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर मंथन हुआ। राज्यपाल जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित सम्मेलन के पहले दिन देश के शीर्ष कृषि वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने किसानों की आय बढ़ाने, फसलों के नुकसान को रोकने तथा सटीक खेती को लेकर विभिन्न स्वदेशी एआई मॉडल प्रस्तुत किए। सत्र के दौरान राज्यपाल जी ने वैज्ञानिकों के समक्ष जमीनी चुनौतियां रखते हुए स्पष्ट किया कि तकनीक सरकारी एजेंसियों के बजाय सीधे किसान-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक ऐसी हो, जिससे किसान को यह भरोसा हो कि फसल क्षति का सटीक आकलन होकर उसे वास्तविक मुआवजा मिल रहा है। राज्यपाल जी ने बीज व कीटनाशक दवाओं की शुद्धता जांच, फसल निगरानी और मौसम की जानकारी के लिए ‘एक ही छत के नीचे' (सिंगल विंडो) समाधान तैयार करने पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने खेती में बहुतायत में काम कर रहीं महिला एवं सीमांत किसानों के लिए तकनीक को बेहद किफायती और सुलभ बनाने की अपील की। तकनीकी सत्र में आईआईटी रोपड़ के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ंददंउ.ंप के सह-परियोजना निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सैनी ने पूरी तरह स्वदेशी ‘कृषि इंटेलिजेंस' प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह मॉडल फसलों के नुकसान को 20 से 30 प्रतिशत तक कम कर सकता है। इसका कंप्यूटर विज़न मॉडल मात्र 3 सेकंड में 99.8 प्रतिशत सटीकता के साथ 20 प्रमुख फसलों की पहचान कर लेता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा स्पष्ट फोटो न खींच पाने की समस्या के समाधान के रूप में उन्होंने ‘संकेत' ऐप का उल्लेख किया, जो फसल के चरण, मौसम और क्षेत्र के आधार पर संभावित कीटों का पहले ही अनुमान लगाकर पीन पर मिलान के लिए तस्वीर दिखा देता है।