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भाजपा की नई टीम, उत्तर प्रदेश में योगी की हैट्रिक की तैयारी

प्रकाशित: 03-09-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
अशोक उपाध्याय
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नई टीम का गठन कर दिया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और चुनाव रणनीतिकार राम माधव की वापसी हुई है जिसे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अहम माना जा रहा है।
अगले साल फरवरी मार्च में होने वाले उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए नयी टीम का विश्लेषण होना स्वाभाविक है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई में बनी इस टीम का प्रदर्शन इस बात को तय करेगा कि नयी पीढ़ी पार्टी को आगे ले जाने में कितनी सक्षम रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सफल जोड़ी का लाभ उठाकर भाजपा की राष्ट्रीय टीम ने काम करना शुरू कर दिया है। भाजपा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने के लिये कोई कोर कसर बाकी नहीं रहने देना चाहती है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में बडा झटका लगा था और समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस राज्य में एक मजबूत गठबंधन बनकर उभरे थे।
नितिन नवीन ने अपनी टीम में कई नए चेहरों को शामिल किया है और कई ऐसे नेताओं को भी जगह दी है जो काफी समय से नजरअंदाज किए जा रहे थे। नई टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को महासचिव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक राम माधव को उपाध्यक्ष बनाया गया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम भी नवनियुक्त 13 उपाध्यक्षों में बरकरार है।
पार्टी ने युवा और अनुभवी नेताओं में संतुलन बनाने की कोशिश की है। पदाधिकारियों में 10 महिलाएं भी हैं जबकि अल्पसंख्यक समुदायों से छह नेता रखे गए हैं। यह फेरबदल 2029 तक होने वाले सभी विधान सभा चुनावों और अगले आम चुनावों को लेकर भाजपा की तैयारियों को ध्यान में रखकर किया गया है।
भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर बीएल संतोष को बरकरार रखा है। पार्टी की आठ राष्ट्रीय महासचिवों की टीम में त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री विप्लब कुमार देव तो है हीं उनके साथ 6 सदस्य नए हैं। लोक सभा सांसद डी. पुरंदेश्वरी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत उपाध्यक्ष बनाए गए हैं।
एक और महत्त्वपूर्ण बदलाव में पार्टी ने अमित मालवीय को आईटी विभाग प्रमुख के पद से हटा दिया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक महस्के को लाया गया है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल को पुन: राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर जिम्मेदारी दी गई है। इन दोनों नेताओं को उनके प्रभावशाली संगठनात्मक कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया है।
पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनावों में भाजपा की जीत में सुनील बंसल के योगदान का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया। राज्य सभा सांसद तरुण चुघ को राज्य सभा सांसद अरुण सिंह की जगह पार्टी का केंद्रीय कार्यालय प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी के सभी राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्षों को भी बदल दिया गया है। गुजरात के हेमांग जोशी को पार्टी युवा मोर्चा अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने पार्टी सांसद तेजस्वी सूर्या की जगह ली है।
अमित मालवीय को 2015 में अमित शाह के समय आईटी सेल का नेशनल हेड बनाया गया था। उनसे यह जिम्मेदारी वापस लेने का निर्णय चौंकानेवाला था। यह कदम जेन जी के कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। दरअसल उस दौरान आई टी सेल की भूमिका की कई लोगों ने आलोचना की थी जिसमें आरएसएस के विचारक रतन शारदा भी शामिल थे।
स्मृति ईरानी करीब 26 महीनों से केंद्रीय सािढय राजनीति औरकिसी आधिकारिक पद से दूर थीं और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाये जाने के निर्णय की पार्टी के भीतर और बाहर सराहना हो रही है। लंबे समय तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी अमेठी में घेर कर रखनेवाली स्मृति ईरानी को नई जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर हमलावर हैं।
भाजपा में वही ऐसी नेता हैं जिन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस के गढ अमेठी में हराया था और उनकी सटीक टिप्पणी और भाषा के लिये राहुल गांधी ही नहीं बल्कि पूरा विपक्ष दांतो तले अंगुली चबाने के लिये मजबूर दिखता है। वह लंबे अर्से से भाजपा की स्टार प्रचारक हैं और हर चुनाव में मोदी, शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी सबसे ज्यादा मांग रहती है।
फिलहाल भाजपा की सबसे बडी राजनीतिक परीक्षा उत्तर प्रदेश में होनी है जहां अगले साल के आरंभ में विधानसभा चुनाव होने हैं। योगी आदित्यनाथ के लिये इस बार हैट्रिक लगाने की बडी चुनौती है।
प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी से लोकसभा चुनाव लडते हैं इसलिये उत्तर प्रदेश पूरी पार्टी के लिये अहम हो जाता है। वैसे भी राजनीतिज्ञ कहते हैं कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर जाता है।
योगी आदित्यनाथ पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर सतर्क है और सपा एवं कांग्रेस के हर दांव की काट ढूंढने में वक्त नहीं गंवाते हैं। लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने महिलाओं के खाते में खटाखट हर महीने आठ हजार रूपये जमा करने का वादा जिस तरह किया था उससे भाजपा को निश्चित तौर पर नुकसान हुआ था।
महिला वोट बैंक की राजनीति चरम पर है और हर कोई उसे रिझाने के लिये चुनाव से पहले बडे लोकलुभावन वादे करने लगता है। दरअसल इस राजनीति की शुरूआत खुद नरेन्द्र मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुये की थी।
मोदी महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं और विपक्ष के तमाम राजनीतिक दल महिलाओं को अपने पाले में लाने के लिये बढचढकर वादे करने लगे हैं।
भाजपा और विपक्ष के इन वादों में फर्क को बडी आसानी से भांपा जा सकता है। भाजपा बाजी मार लेती है और उसकी बडी वजह है कि वह सत्ता में आते ही बिना वक्त गंवाये महिलाओं से किये गये वादों को पूरा कर देती है। अब तो नकद भुगतान की होड लग रही है और ऐसे में कौन बाजी मारेगा देखने में दिलचस्प होगा।
(लेखक पूर्व संपादक, यूनीवार्ता हैं।)