सुख पर नई सोच ः ऊर्जा-संपन्न होना क्यों जरूरी है
प्रकाशित: 16-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डॉ. राजेश के. पिलानिया
सुख वही है, जिसकी चाह हममें से अधिकांश लोग रखते हैं। फिर भी हममें से बहुत-से लोग सुख के बारे में अपनी गलत धारणाओं और उसके विभिन्न पक्षों को ठीक से न समझ पाने के कारण असुखी रहते हैं। उदाहरण के लिए, ऊर्जा की कमी भी असुख का एक कारण हो सकती है, लेकिन हम अक्सर इस बारे में सोचते तक नहीं। सुख के लिए ऊर्जा-सम्पन्न होना कोई व्यक्ति ऊर्जा-सम्पन्न है या ऊर्जा-विहीन, अर्थात उसके पास जीवन जीने और उसका आनंद लेने के लिए पर्याप्त ऊर्जा है या नहीं, यह बात सुख और असुख-दोनों का कारण बन सकती । ऊर्जा-सम्पन्नता सुख को बढ़ाती है, जब महत्वपूर्ण है, हममें से बहुत-से लोग उसे उतना हत्व नहीं देते। सुख के लिए ऊर्जा-सम्पन्न होना क्यों महत्वपूर्ण है ऊर्जा-सम्पन्न होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बिना व्यक्ति कुछ भी नहीं कर सकता। स्वयं को अच्छा महसूस करने और सकारात्मक भावनाओं का अनुभव करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा आवश्यक है। ऊर्जा की कमी से थकान, जड़ता और कुछ नकारात्मक भावनाओं तथा विचारों का वर्चस्व बढ़ जाता है, हालांकि ाढाsध जैसे कुछ नकारात्मक विचार ऊर्जा-सम्पन्न अवस्था में भी बने रह सकते हैं। एक सरल अभ्यास आइए, एक सरल अभ्यास करें। उन लोगों को देखिए जो निढाल महसूस करते हैं, आत्म-संदेह में रहते हैं, अपराध-बोध से घिरे रहते हैं, पछतावा करते हैं, तनाव में रहते हैं या लगातार चिंता करते हैं। अक्सर ऐसा लगता है कि यह स्थिति ऊर्जा की कमी से जुड़ी हुई है। अब उन लोगों के चेहरे देखिए जो उत्सव मना रहे होते हैं या सकारात्मक भावनाओं का अनुभव कर रहे होते हैं; उनके भीतर प्राय ऊर्जा की अच्छी मात्रा महसूस होती है। यह सरल अवलोकन बताता है कि जीवन का आनंद लेने, उत्सव मनाने और सकारात्मक भावनाओं का अनुभव करने के लिए ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है। ऊर्जा की कमी जीवन में थकान, नीरसता, रुचि-क्षय, चिंता, तनाव और अनेक अन्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। ऊर्जा-सम्पन्न कैसे बनें ऊर्जा इतनी महत्वपूर्ण है कि उसका सही ढंग से प्रबंधन होना चाहिए। ऊर्जा-विहीन अवस्था से ऊर्जा-सम्पन्न अवस्था तक पहुँचने के लिए दो मुख्य पक्षों पर ध्यान देना वश्यक है। पहला है ऊर्जा का संरक्षण और दूसरा है ऊर्जा का सृजन। शुरुआत इस बात का आकलन करने से होनी चाहिए कि हमारे पास कितनी ऊर्जा है, वह कहाँ खर्च होती है और उसका निर्माण कैसे होता है। जब यह स्पष्ट हो जाए कि ऊर्जा कहाँ खर्च हो रही है, तब यह समझना चाहिए कि उसका उपयोग कहाँ सार्थक है और कहाँ वह व्यर्थ जा रही है। ऊर्जा का संरक्षण : ऊर्जा की बर्बादी का अर्थ है ऐसी चीज़ों पर ऊर्जा खर्च करना जो हमारे व्यक्तिगत, व्यावसायिक या सामाजिक जीवन में कोई मूल्य नहीं जोड़तीं और अक्सर नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं। उदाहरण के तौर पर, पीठ पीछे बुराई करना, निरर्थक चुगली में पड़ना या अनावश्यक बहसों में उलझना। ऊर्जा की बर्बादी का एक और बड़ा कारण है ज़रूरत से ज़्यादा सोचना। मन ऊर्जा का एक बड़ा उपभोक्ता है और यह हमारी कुल ऊर्जा-खपत का लगभग पच्चीस प्रतिशत तक ले लेता है। भविष्य की लगातार चिंता करना, अत्यधिक नकारात्मक सोचना, और ाढाsध, अपराध-बोध, चिंता तथा उदासी को पकड़े रहना हमारी बहुत-सी ऊर्जा सोख लेता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि उन गतिविधियों में ऊर्जा की बर्बादी कम की जाए जो हमारे सुख में कोई वृद्धि नहीं करतीं या वास्तव में आवश्यक नहीं हैं। हमें अपनी ऊर्जा को उन नकारात्मक या विषैले लोगों से भी बचाना चाहिए जो हमारे जीवन या सुख में कोई मूल्य जोड़े बिना हमारी ऊर्जा को चूस लेते हैं। अंत में, उन चीज़ों के लिए 'न' कहना सीखना भी बहुत आवश्यक है जिनका वास्तव में कोई महत्व नहीं है। 'न' कहने की आदत विकसित करना इसलिए ज़रूरी है ताकि हम अपनी ऊर्जा उन बातों पर बचा सकें जो सचमुच महत्वपूर्ण नहीं हैं और जीवन की उन बातों पर ध्यान केंद्रित कर सकें जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं-अर्थात स्वास्थ्य, संबंध और अच्छा काम। ऊर्जा-सम्पन्न बनने का दूसरा पक्ष है अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में निवेश करना। यह काम पौष्टिक भोजन लेने, नियमित व्यायाम करने, अच्छी नींद लेने, ध्यान और श्वास-प्रश्वास की विधियों का अभ्यास करने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से किया जा सकता है। सकारात्मक भावनाओं और सकारात्मक दृष्टि का पोषण करके हम जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा का बड़ा भंडार तैयार कर सकते हैं। जो ऊर्जा हमारे पास पहले से है, उसके संरक्षण पर ध्यान देकर और नई ऊर्जा का नियमित स्रोत बनाकर हम ऊर्जा-सम्पन्न बन सकते हैं। इस ऊर्जा के साथ हम जीवन के सकारात्मक पक्षों पर अधिक ध्यान दे सकते हैं और एक बेहतर, अधिक सुखी तथा अधिक परिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।
(लेखक मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम में प्रोफेसर हैं। वे भारत के हैप्पीनेस प्रोफेसर और भारत के हैप्पीनेस गुरु के रूप में प्रसिद्ध हैं।)
सुख वही है, जिसकी चाह हममें से अधिकांश लोग रखते हैं। फिर भी हममें से बहुत-से लोग सुख के बारे में अपनी गलत धारणाओं और उसके विभिन्न पक्षों को ठीक से न समझ पाने के कारण असुखी रहते हैं। उदाहरण के लिए, ऊर्जा की कमी भी असुख का एक कारण हो सकती है, लेकिन हम अक्सर इस बारे में सोचते तक नहीं। सुख के लिए ऊर्जा-सम्पन्न होना कोई व्यक्ति ऊर्जा-सम्पन्न है या ऊर्जा-विहीन, अर्थात उसके पास जीवन जीने और उसका आनंद लेने के लिए पर्याप्त ऊर्जा है या नहीं, यह बात सुख और असुख-दोनों का कारण बन सकती । ऊर्जा-सम्पन्नता सुख को बढ़ाती है, जब महत्वपूर्ण है, हममें से बहुत-से लोग उसे उतना हत्व नहीं देते। सुख के लिए ऊर्जा-सम्पन्न होना क्यों महत्वपूर्ण है ऊर्जा-सम्पन्न होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बिना व्यक्ति कुछ भी नहीं कर सकता। स्वयं को अच्छा महसूस करने और सकारात्मक भावनाओं का अनुभव करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा आवश्यक है। ऊर्जा की कमी से थकान, जड़ता और कुछ नकारात्मक भावनाओं तथा विचारों का वर्चस्व बढ़ जाता है, हालांकि ाढाsध जैसे कुछ नकारात्मक विचार ऊर्जा-सम्पन्न अवस्था में भी बने रह सकते हैं। एक सरल अभ्यास आइए, एक सरल अभ्यास करें। उन लोगों को देखिए जो निढाल महसूस करते हैं, आत्म-संदेह में रहते हैं, अपराध-बोध से घिरे रहते हैं, पछतावा करते हैं, तनाव में रहते हैं या लगातार चिंता करते हैं। अक्सर ऐसा लगता है कि यह स्थिति ऊर्जा की कमी से जुड़ी हुई है। अब उन लोगों के चेहरे देखिए जो उत्सव मना रहे होते हैं या सकारात्मक भावनाओं का अनुभव कर रहे होते हैं; उनके भीतर प्राय ऊर्जा की अच्छी मात्रा महसूस होती है। यह सरल अवलोकन बताता है कि जीवन का आनंद लेने, उत्सव मनाने और सकारात्मक भावनाओं का अनुभव करने के लिए ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है। ऊर्जा की कमी जीवन में थकान, नीरसता, रुचि-क्षय, चिंता, तनाव और अनेक अन्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। ऊर्जा-सम्पन्न कैसे बनें ऊर्जा इतनी महत्वपूर्ण है कि उसका सही ढंग से प्रबंधन होना चाहिए। ऊर्जा-विहीन अवस्था से ऊर्जा-सम्पन्न अवस्था तक पहुँचने के लिए दो मुख्य पक्षों पर ध्यान देना वश्यक है। पहला है ऊर्जा का संरक्षण और दूसरा है ऊर्जा का सृजन। शुरुआत इस बात का आकलन करने से होनी चाहिए कि हमारे पास कितनी ऊर्जा है, वह कहाँ खर्च होती है और उसका निर्माण कैसे होता है। जब यह स्पष्ट हो जाए कि ऊर्जा कहाँ खर्च हो रही है, तब यह समझना चाहिए कि उसका उपयोग कहाँ सार्थक है और कहाँ वह व्यर्थ जा रही है। ऊर्जा का संरक्षण : ऊर्जा की बर्बादी का अर्थ है ऐसी चीज़ों पर ऊर्जा खर्च करना जो हमारे व्यक्तिगत, व्यावसायिक या सामाजिक जीवन में कोई मूल्य नहीं जोड़तीं और अक्सर नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं। उदाहरण के तौर पर, पीठ पीछे बुराई करना, निरर्थक चुगली में पड़ना या अनावश्यक बहसों में उलझना। ऊर्जा की बर्बादी का एक और बड़ा कारण है ज़रूरत से ज़्यादा सोचना। मन ऊर्जा का एक बड़ा उपभोक्ता है और यह हमारी कुल ऊर्जा-खपत का लगभग पच्चीस प्रतिशत तक ले लेता है। भविष्य की लगातार चिंता करना, अत्यधिक नकारात्मक सोचना, और ाढाsध, अपराध-बोध, चिंता तथा उदासी को पकड़े रहना हमारी बहुत-सी ऊर्जा सोख लेता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि उन गतिविधियों में ऊर्जा की बर्बादी कम की जाए जो हमारे सुख में कोई वृद्धि नहीं करतीं या वास्तव में आवश्यक नहीं हैं। हमें अपनी ऊर्जा को उन नकारात्मक या विषैले लोगों से भी बचाना चाहिए जो हमारे जीवन या सुख में कोई मूल्य जोड़े बिना हमारी ऊर्जा को चूस लेते हैं। अंत में, उन चीज़ों के लिए 'न' कहना सीखना भी बहुत आवश्यक है जिनका वास्तव में कोई महत्व नहीं है। 'न' कहने की आदत विकसित करना इसलिए ज़रूरी है ताकि हम अपनी ऊर्जा उन बातों पर बचा सकें जो सचमुच महत्वपूर्ण नहीं हैं और जीवन की उन बातों पर ध्यान केंद्रित कर सकें जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं-अर्थात स्वास्थ्य, संबंध और अच्छा काम। ऊर्जा-सम्पन्न बनने का दूसरा पक्ष है अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में निवेश करना। यह काम पौष्टिक भोजन लेने, नियमित व्यायाम करने, अच्छी नींद लेने, ध्यान और श्वास-प्रश्वास की विधियों का अभ्यास करने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से किया जा सकता है। सकारात्मक भावनाओं और सकारात्मक दृष्टि का पोषण करके हम जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा का बड़ा भंडार तैयार कर सकते हैं। जो ऊर्जा हमारे पास पहले से है, उसके संरक्षण पर ध्यान देकर और नई ऊर्जा का नियमित स्रोत बनाकर हम ऊर्जा-सम्पन्न बन सकते हैं। इस ऊर्जा के साथ हम जीवन के सकारात्मक पक्षों पर अधिक ध्यान दे सकते हैं और एक बेहतर, अधिक सुखी तथा अधिक परिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।
(लेखक मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम में प्रोफेसर हैं। वे भारत के हैप्पीनेस प्रोफेसर और भारत के हैप्पीनेस गुरु के रूप में प्रसिद्ध हैं।)