स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करके ईरान ने मारी बाजी, यूरोपीय देशों में पड़ी फूट, अमेरिका और इजरायल पर बना दबाव
प्रकाशित: 16-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करके ईरान ने बड़ा दांव खेला है. इस रास्ते से गुजरने वाले कार्गों शिप को लेकर उसने अपना मत सामने रख दिया है. उसका कहना है कि ईरान के दुश्मन देशों के जहाजों को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा. इस फैसले के बाद से अमेरिका और इजरायल अब यूरोपीय देशों के लिए गले की फांस बन चुके हैं. दरअसल, ईरान के इस निर्णय से सबसे अधिक नुकसान यूरोपीय देशों को झेलना पड़ रहा है. खाड़ी देशों से आने वाले तेल टैंकर यहां पर अटके हुए है. तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है. इससे परेशान होकर कई देशों ने आवाजें उठानी शुरू कर दी हैं. वे खुलकर अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमले की आलोचना कर रहे हैं.
युद्ध 'अस्तित्व का संकट' है
जर्मनी और इटली दोनों देशों इस युद्ध की मुखालफत की है. जर्मनी के राजदूत डॉ फिलिप एकरमैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जर्मनी के लिए यह युद्ध 'अस्तित्व का संकट' है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हमारा युद्ध नहीं है. हम में से कोई नहीं चाहता था कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो. मगर अभी ईरान में जो हो रहा है वो समझ से परे है. जर्मनी की अर्थव्यवस्था पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रही है. ईरान के साथ युद्ध का अर्थ है कि यूरोप के लिए एनर्जी सुसाइड.
ईरान पर बिना सोचे-समझे किया हमला
वहीं इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने अपने बयान में अमेरिका को आइना दिखाया. उन्होंने कहा,"हम ये युद्ध नहीं चाहते. न तो हम इसका हिस्सा हैं, और न होंगे." उन्होंने कहा कि यह ईरान पर बिना सोचे-समझे किया गया हमला है. इसी तरह स्पेन और फ्रांस ने प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि युद्ध को लेकर जल्दबाजी की गई है. जब ईरान से बातचीत जारी थी तो इस तरह का बड़ा फैसला लेना खतरनाक था. इससे कई देशों में ईंधन का संकट उत्पन्न होगा.
यही नहीं ब्रिटेन जो अमेरिका का सबसे बड़ा हितैशी माना जाता है, वह अब कतराने लगा है. इस दौरान प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि हम ईरान पर हुए शुरुआती हमलों में शामिल नहीं थे और न ही हमारे इसमें शामिल होने की कोई योजना है. डिएगो गार्सिया के सैन्य अड्डे के उपयोग को लेकर ब्रिटेन ने तुरंत हामी नहीं भरी थी. यह इस बात के सबूत हैं कि लंदन अब वाशिंगटन के हर आदेश पर तुरंत हां नहीं करने वाला है.
ईरान के युद्ध से सबसे बड़ा फायदा रूस को
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान पर हो रहे हमलों से रूस को सबसे अधिक फायदा मिलने वाला है. इसका कारण है कि रूस से अब हर कोई तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है. भारत खुलकर उससे तेल व्यापार कर रहा है. मगर यूरोपीय देशों की हालत खस्ता है. उसने पहले ही रूस कई पाबंदियां लगाई थीं. ऐसे में वह रूस से तेल नहीं खरीद पा रहा है. रूस भी अब सस्ते में तेल देने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में यूरोपीय देश इस युद्ध में पिस चुके हैं. उनके लिए घर न घाट वाली स्थिति हो चुकी है.
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच को जोड़ने वाला है एक बेहद महत्वपूर्ण संकरा समुद्री मार्ग है. ये मार्ग विश्व के लगभग 20-30% तेल और गैस की आपूर्ति करता है. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है. वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक प्रमुख 'चोक पॉइंट' की तरह यह माना जाता है.
युद्ध 'अस्तित्व का संकट' है
जर्मनी और इटली दोनों देशों इस युद्ध की मुखालफत की है. जर्मनी के राजदूत डॉ फिलिप एकरमैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जर्मनी के लिए यह युद्ध 'अस्तित्व का संकट' है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हमारा युद्ध नहीं है. हम में से कोई नहीं चाहता था कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो. मगर अभी ईरान में जो हो रहा है वो समझ से परे है. जर्मनी की अर्थव्यवस्था पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रही है. ईरान के साथ युद्ध का अर्थ है कि यूरोप के लिए एनर्जी सुसाइड.
ईरान पर बिना सोचे-समझे किया हमला
वहीं इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने अपने बयान में अमेरिका को आइना दिखाया. उन्होंने कहा,"हम ये युद्ध नहीं चाहते. न तो हम इसका हिस्सा हैं, और न होंगे." उन्होंने कहा कि यह ईरान पर बिना सोचे-समझे किया गया हमला है. इसी तरह स्पेन और फ्रांस ने प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि युद्ध को लेकर जल्दबाजी की गई है. जब ईरान से बातचीत जारी थी तो इस तरह का बड़ा फैसला लेना खतरनाक था. इससे कई देशों में ईंधन का संकट उत्पन्न होगा.
यही नहीं ब्रिटेन जो अमेरिका का सबसे बड़ा हितैशी माना जाता है, वह अब कतराने लगा है. इस दौरान प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि हम ईरान पर हुए शुरुआती हमलों में शामिल नहीं थे और न ही हमारे इसमें शामिल होने की कोई योजना है. डिएगो गार्सिया के सैन्य अड्डे के उपयोग को लेकर ब्रिटेन ने तुरंत हामी नहीं भरी थी. यह इस बात के सबूत हैं कि लंदन अब वाशिंगटन के हर आदेश पर तुरंत हां नहीं करने वाला है.
ईरान के युद्ध से सबसे बड़ा फायदा रूस को
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान पर हो रहे हमलों से रूस को सबसे अधिक फायदा मिलने वाला है. इसका कारण है कि रूस से अब हर कोई तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है. भारत खुलकर उससे तेल व्यापार कर रहा है. मगर यूरोपीय देशों की हालत खस्ता है. उसने पहले ही रूस कई पाबंदियां लगाई थीं. ऐसे में वह रूस से तेल नहीं खरीद पा रहा है. रूस भी अब सस्ते में तेल देने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में यूरोपीय देश इस युद्ध में पिस चुके हैं. उनके लिए घर न घाट वाली स्थिति हो चुकी है.
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच को जोड़ने वाला है एक बेहद महत्वपूर्ण संकरा समुद्री मार्ग है. ये मार्ग विश्व के लगभग 20-30% तेल और गैस की आपूर्ति करता है. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है. वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक प्रमुख 'चोक पॉइंट' की तरह यह माना जाता है.