SC/ST एक्ट में FIR तो पहले जांच फिर आरोपी होगा गिरफ्तार, घोषणा के बाद दलित समूहों का गुस्सा देख मंत्री की सफाई
प्रकाशित: 16-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
**मुंबई:**
महाराष्ट्र में एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून (एट्रोसिटी एक्ट) में बदलाव को लेकर हाल ही में सियासी बहस तेज हो गई। विधानसभा में इस मुद्दे पर सवाल उठने के बाद यह चर्चा फैल गई कि राज्य सरकार कानून में संशोधन कर सकती है और अब किसी मामले में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी, बल्कि पहले समिति द्वारा जांच की जाएगी। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री **संजय शिरसाट** ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है।
मंत्री शिरसाट ने स्पष्ट किया कि एट्रोसिटी एक्ट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा रहा है और जो प्रावधान पहले से लागू हैं, वही आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
उन्होंने बताया कि उनका आशय केवल यह समझाने का था कि कानून को लागू करने की प्रक्रिया कैसे काम करती है। अगर किसी दलित व्यक्ति के साथ अन्याय या अत्याचार की शिकायत मिलती है तो पुलिस तुरंत मामला दर्ज करेगी, उसकी जांच होगी और आवश्यक होने पर आरोपी को गिरफ्तार भी किया जाएगा।
शिरसाट ने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर समाज में गलतफहमियां फैला रहे हैं कि अब एट्रोसिटी के मामले दर्ज नहीं हो पाएंगे, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके अनुसार, सामाजिक न्याय विभाग का मुख्य उद्देश्य दलित समाज को न्याय दिलाना है और सरकार किसी भी तरह का अन्याय होने नहीं देगी।
उन्होंने दलित समुदाय को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगर कहीं भी अत्याचार या भेदभाव की घटना सामने आती है तो संबंधित लोग तुरंत शिकायत करें। सरकार और उनका विभाग पीड़ितों के साथ खड़ा रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महाराष्ट्र में एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून (एट्रोसिटी एक्ट) में बदलाव को लेकर हाल ही में सियासी बहस तेज हो गई। विधानसभा में इस मुद्दे पर सवाल उठने के बाद यह चर्चा फैल गई कि राज्य सरकार कानून में संशोधन कर सकती है और अब किसी मामले में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी, बल्कि पहले समिति द्वारा जांच की जाएगी। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री **संजय शिरसाट** ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है।
मंत्री शिरसाट ने स्पष्ट किया कि एट्रोसिटी एक्ट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा रहा है और जो प्रावधान पहले से लागू हैं, वही आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
उन्होंने बताया कि उनका आशय केवल यह समझाने का था कि कानून को लागू करने की प्रक्रिया कैसे काम करती है। अगर किसी दलित व्यक्ति के साथ अन्याय या अत्याचार की शिकायत मिलती है तो पुलिस तुरंत मामला दर्ज करेगी, उसकी जांच होगी और आवश्यक होने पर आरोपी को गिरफ्तार भी किया जाएगा।
शिरसाट ने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर समाज में गलतफहमियां फैला रहे हैं कि अब एट्रोसिटी के मामले दर्ज नहीं हो पाएंगे, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके अनुसार, सामाजिक न्याय विभाग का मुख्य उद्देश्य दलित समाज को न्याय दिलाना है और सरकार किसी भी तरह का अन्याय होने नहीं देगी।
उन्होंने दलित समुदाय को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगर कहीं भी अत्याचार या भेदभाव की घटना सामने आती है तो संबंधित लोग तुरंत शिकायत करें। सरकार और उनका विभाग पीड़ितों के साथ खड़ा रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।