झीरम घाटी हत्याकांड पर सियासत तेज, सीएम साय का भूपेश बघेल पर पलटवार
प्रकाशित: 01-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
रायपुर, (छत्तीसगढ़ ब्यूरो)। झीरम घाटी हत्याकांड की जांच को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच पर सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूपेश बघेल पांच साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, इसलिए उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनके कार्यकाल के दौरान झीरम घाटी मामले में क्या कार्रवाई की गई।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झीरम घाटी की घटना में कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को खोया था। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल मुख्यमंत्री रहते हुए झीरम मामले के प्रमाण अपने पास होने की बात कहते रहे हैं। यदि उन्हें वास्तव में इस मामले की चिंता थी तो उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान मामले को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल बयान देने से किसी मामले का समाधान नहीं होता। सरकार में रहते हुए संबंधित मामले में कार्रवाई करना और जांच को आगे बढ़ाना आवश्यक होता है। उन्होंने इसी आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा झीरम घाटी मामले को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए।
प्रदेश में सशस्त्र माओवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के सवाल पर भी मुख्यमंत्री साय ने प्रतित्रिढया दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए निर्धारित समिति है।मुख्यमंत्री के अनुसार, किसी व्यक्पि की सुरक्षा के लिए आवश्यकता का आकलन समिति द्वारा किया जाता है और उसकी सिफारिश के आधार पर संबंधित व्यक्पि को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी बदलाव का निर्णय निर्धारित प्रत्रिढया के तहत लिया जाता है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के लिए बस्तर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी हत्याकांड की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी पर सवाल उठाए थे।बघेल ने आरोप लगाया था कि प्राथमिकी में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने दावा किया था कि जांच घटना के पीछे कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में आगे नहीं बढ़ी।पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि वर्तमान भाजपा सरकार ने मामले की आगे जांच के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है। उनका कहना था कि इससे उन्हें लगता है कि भाजपा सरकार झीरम घाटी मामले को दबाना चाहती है।
झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। मामले की जांच और कथित षड्यंत्र से जुड़े सवालों को लेकर समय-समय पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच सामने आए ताजा बयानबाजी से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के आरोपों के बाद आने वाले दिनों में झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर सियासी विवाद और तेज होने के आसार हैं।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झीरम घाटी की घटना में कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को खोया था। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल मुख्यमंत्री रहते हुए झीरम मामले के प्रमाण अपने पास होने की बात कहते रहे हैं। यदि उन्हें वास्तव में इस मामले की चिंता थी तो उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान मामले को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल बयान देने से किसी मामले का समाधान नहीं होता। सरकार में रहते हुए संबंधित मामले में कार्रवाई करना और जांच को आगे बढ़ाना आवश्यक होता है। उन्होंने इसी आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा झीरम घाटी मामले को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए।
प्रदेश में सशस्त्र माओवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के सवाल पर भी मुख्यमंत्री साय ने प्रतित्रिढया दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए निर्धारित समिति है।मुख्यमंत्री के अनुसार, किसी व्यक्पि की सुरक्षा के लिए आवश्यकता का आकलन समिति द्वारा किया जाता है और उसकी सिफारिश के आधार पर संबंधित व्यक्पि को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी बदलाव का निर्णय निर्धारित प्रत्रिढया के तहत लिया जाता है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के लिए बस्तर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी हत्याकांड की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी पर सवाल उठाए थे।बघेल ने आरोप लगाया था कि प्राथमिकी में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने दावा किया था कि जांच घटना के पीछे कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में आगे नहीं बढ़ी।पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि वर्तमान भाजपा सरकार ने मामले की आगे जांच के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है। उनका कहना था कि इससे उन्हें लगता है कि भाजपा सरकार झीरम घाटी मामले को दबाना चाहती है।
झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। मामले की जांच और कथित षड्यंत्र से जुड़े सवालों को लेकर समय-समय पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच सामने आए ताजा बयानबाजी से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के आरोपों के बाद आने वाले दिनों में झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर सियासी विवाद और तेज होने के आसार हैं।