एम.के. स्टालिन का डीएमके संगठनात्मक पुनर्गठन
प्रकाशित: 24-08-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में पराजय के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने अपने संगठन में बड़े पैमाने पर सुधार करने का निर्णय लिया है। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में 22 अगस्त 2026 को चेन्नई स्थित अन्ना अरिवालयम में कार्यकारी समिति की बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी को नई ऊर्जा देने और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
स्टालिन ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव हारने के कई कारण थे, जिनमें पदाधिकारियों का प्रदर्शन भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है। उनके अनुसार ये बदलाव “कड़वी दवा'' की तरह हैं, जो कुछ लोगों को असुविधाजनक लग सकते हैं, लेकिन पार्टी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। स्टालिन ने जोर दिया कि इन सुधारों से डीएमके अगली शताब्दी तक जीवंत और मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने युवाओं और महिलाओं का विश्वास पुन हासिल करने पर विशेष बल दिया तथा कहा कि डीएमके वापसी की विशेषज्ञ पार्टी है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाने का है। मौजूदा 77-78 जिलों को बढ़ाकर 110 कर दिया गया है। अब प्रत्येक संगठनात्मक जिले में सामान्यत दो विधानसभा क्षेत्र शामिल होंगे। बड़े शहरों में “सिटी सेक्रेटरी'' पद को समाप्त कर शहरी इकाइयों को मतदाता संख्या के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा।
आयु और कार्यकाल सीमा भी सख्ती से तय की गई है। शाखा सचिवों की अधिकतम आयु 45 वर्ष और कार्यकाल अधिकतम दो बार होगा। वार्ड स्तर पर आयु सीमा 50 वर्ष तथा यूनियन, टाउन और एरिया सचिवों के लिए 60 वर्ष निर्धारित की गई है। जिला सचिवों की अधिकतम आयु 70 वर्ष रखी गई है और उन्हें तीन कार्यकाल तक पद पर रहने की अनुमति दी गई है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और सेलम जैसे बड़े नगर निगम क्षेत्रों में नई शाखा इकाइयां बनाने का भी निर्णय लिया गया है।
पार्टी जल्द ही नया सदस्यता अभियान शुरू करेगी और सभी स्तरों पर चुनाव कराने की योजना है। यह पुनर्गठन डीएमके को नई ऊर्जा देने तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
-आदित्य नरेन्द्र
स्टालिन ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव हारने के कई कारण थे, जिनमें पदाधिकारियों का प्रदर्शन भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है। उनके अनुसार ये बदलाव “कड़वी दवा'' की तरह हैं, जो कुछ लोगों को असुविधाजनक लग सकते हैं, लेकिन पार्टी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। स्टालिन ने जोर दिया कि इन सुधारों से डीएमके अगली शताब्दी तक जीवंत और मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने युवाओं और महिलाओं का विश्वास पुन हासिल करने पर विशेष बल दिया तथा कहा कि डीएमके वापसी की विशेषज्ञ पार्टी है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाने का है। मौजूदा 77-78 जिलों को बढ़ाकर 110 कर दिया गया है। अब प्रत्येक संगठनात्मक जिले में सामान्यत दो विधानसभा क्षेत्र शामिल होंगे। बड़े शहरों में “सिटी सेक्रेटरी'' पद को समाप्त कर शहरी इकाइयों को मतदाता संख्या के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा।
आयु और कार्यकाल सीमा भी सख्ती से तय की गई है। शाखा सचिवों की अधिकतम आयु 45 वर्ष और कार्यकाल अधिकतम दो बार होगा। वार्ड स्तर पर आयु सीमा 50 वर्ष तथा यूनियन, टाउन और एरिया सचिवों के लिए 60 वर्ष निर्धारित की गई है। जिला सचिवों की अधिकतम आयु 70 वर्ष रखी गई है और उन्हें तीन कार्यकाल तक पद पर रहने की अनुमति दी गई है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और सेलम जैसे बड़े नगर निगम क्षेत्रों में नई शाखा इकाइयां बनाने का भी निर्णय लिया गया है।
पार्टी जल्द ही नया सदस्यता अभियान शुरू करेगी और सभी स्तरों पर चुनाव कराने की योजना है। यह पुनर्गठन डीएमके को नई ऊर्जा देने तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
-आदित्य नरेन्द्र