गोर के बयान से क्यों बौखलाया पाक
प्रकाशित: 23-08-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
आदित्य नरेन्द्र
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणी से पाकिस्तान बौखला गया है। उसने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स (कार्यवाहक राजदूत) को तलब करके भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान की गई टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया जिसमें उन्होंने कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा था कि यह भारत का एक अहम हिस्सा है। उनके बयान में न तो विवादित क्षेत्र जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल हुआ और न ही कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया गया। इससे पाकिस्तान को जोरदार झटका लगा है। क्योंकि गोर केवल अमेरिकी राजदूत ही नहीं हैं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत भी हैं। ऐसे में उनके बयान को भारत के लिहाज से अच्छा और पाकिस्तान के लिए खराब माना जा रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत का हिस्सा बताने के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेवल एडवाइजरी पर भी महत्वपूर्ण संकेत देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। चूंकि अमेरिका समय-समय पर अपनी यात्रा संबंधी चेतावनियों की समीक्षा करता रहता है, ऐसे में वह कोई बड़ी घोषणा तो नहीं कर सकते लेकिन मौजूदा एडवाइजरी की समीक्षा की जाएगी। अमेरिका इस बात पर विचार करेगा कि क्या मौजूदा यात्रा चेतावनी को कम किया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन में गोर की स्थिति और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनके संबंधों को देखते हुए अमेरिकी राजदूत का यह बयान पाकिस्तान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। जम्मू-कश्मीर में यदि पर्यटक बढ़े तो पाकिस्तान के लिए वहां आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को समन करने पर एक लम्बा-चौड़ा बयान जारी करते हुए जम्मू-कश्मीर पर गोर के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया है। उसने कहा है कि इस बयान ने जम्मू-कश्मीर पर लम्बे समय से चले आ रहे अमेरिका के रुख को कमजोर किया है। यह बयान यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता को कमजोर करता है। जहां तक चीन का सवाल है तो गोर के लद्दाख जाने पर उसकी ओर से यह लेख लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक यह अंदाज लगाने में जुटे हैं कि गोर के इस बयान के पीछे अमेरिका की मंशा क्या है। क्या अमेरिका तीन मुस्लिम देशों तुर्किए, सउदी अरब और पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा देना चाहता है। पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) पाकिस्तान की दुखती हुई नस है। जब वाहं के लोग जम्मू-कश्मीर के विकास को देखते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ किए बना नहीं रहते। अब वहां के लोग भारत में शामिल होने की बात कहने लगे हैं। यही कारण है कि पाक सरकार पिछले कई सप्ताह से पीओजेके में चल रहे आंदोलन को खत्म नहीं कर पा रही है। शाहवाज और मुनीर की जोड़ी यह समझ रही है कि जम्मू-कश्मीर पर गोर का यह बयान पीओजेके पर पाक की पकड़ कमजोर करेगा और अमेरिका के समर्थक देशों को यह इशारा देगा कि कश्मीर पर वह क्या सोचता है। भारत में आतंकवाद फैलाने का पाक का मुखौटा उतर चुका है। वह जानता है कि उसकी हरकतों का जवाब भारतीय सेना कैसे देगी। आपरेशन सिंदूर अभी चालू है। ऐसे में गोर का यह बयान जम्मू-कश्मीर में मोदी की नीतियों और विकास कार्यों पर मुहर लगाता है। पाकिस्तान परेशान होता है तो होता रहे।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणी से पाकिस्तान बौखला गया है। उसने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स (कार्यवाहक राजदूत) को तलब करके भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान की गई टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया जिसमें उन्होंने कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा था कि यह भारत का एक अहम हिस्सा है। उनके बयान में न तो विवादित क्षेत्र जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल हुआ और न ही कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया गया। इससे पाकिस्तान को जोरदार झटका लगा है। क्योंकि गोर केवल अमेरिकी राजदूत ही नहीं हैं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत भी हैं। ऐसे में उनके बयान को भारत के लिहाज से अच्छा और पाकिस्तान के लिए खराब माना जा रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत का हिस्सा बताने के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेवल एडवाइजरी पर भी महत्वपूर्ण संकेत देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। चूंकि अमेरिका समय-समय पर अपनी यात्रा संबंधी चेतावनियों की समीक्षा करता रहता है, ऐसे में वह कोई बड़ी घोषणा तो नहीं कर सकते लेकिन मौजूदा एडवाइजरी की समीक्षा की जाएगी। अमेरिका इस बात पर विचार करेगा कि क्या मौजूदा यात्रा चेतावनी को कम किया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन में गोर की स्थिति और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनके संबंधों को देखते हुए अमेरिकी राजदूत का यह बयान पाकिस्तान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। जम्मू-कश्मीर में यदि पर्यटक बढ़े तो पाकिस्तान के लिए वहां आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को समन करने पर एक लम्बा-चौड़ा बयान जारी करते हुए जम्मू-कश्मीर पर गोर के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया है। उसने कहा है कि इस बयान ने जम्मू-कश्मीर पर लम्बे समय से चले आ रहे अमेरिका के रुख को कमजोर किया है। यह बयान यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता को कमजोर करता है। जहां तक चीन का सवाल है तो गोर के लद्दाख जाने पर उसकी ओर से यह लेख लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक यह अंदाज लगाने में जुटे हैं कि गोर के इस बयान के पीछे अमेरिका की मंशा क्या है। क्या अमेरिका तीन मुस्लिम देशों तुर्किए, सउदी अरब और पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा देना चाहता है। पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) पाकिस्तान की दुखती हुई नस है। जब वाहं के लोग जम्मू-कश्मीर के विकास को देखते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ किए बना नहीं रहते। अब वहां के लोग भारत में शामिल होने की बात कहने लगे हैं। यही कारण है कि पाक सरकार पिछले कई सप्ताह से पीओजेके में चल रहे आंदोलन को खत्म नहीं कर पा रही है। शाहवाज और मुनीर की जोड़ी यह समझ रही है कि जम्मू-कश्मीर पर गोर का यह बयान पीओजेके पर पाक की पकड़ कमजोर करेगा और अमेरिका के समर्थक देशों को यह इशारा देगा कि कश्मीर पर वह क्या सोचता है। भारत में आतंकवाद फैलाने का पाक का मुखौटा उतर चुका है। वह जानता है कि उसकी हरकतों का जवाब भारतीय सेना कैसे देगी। आपरेशन सिंदूर अभी चालू है। ऐसे में गोर का यह बयान जम्मू-कश्मीर में मोदी की नीतियों और विकास कार्यों पर मुहर लगाता है। पाकिस्तान परेशान होता है तो होता रहे।