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निष्पक्ष जांच जरूरी

प्रकाशित: 30-08-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
निष्पक्ष जांच जरूरी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में पाटी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभास्थल के शुद्धिकरण जैसे घिनौने कृत्य की आलोचना और ऐसा करने वालों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज करके कठोर दण्ड देने की मांग बिल्कुल सही है।
दरअसल गत 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे ने एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद यानि 10 अगस्त को ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' नामक दक्षिणपंथी संगठन ने शुद्धिकरण अनुष्ठान किया था। ऐसे अनुष्ठान का समर्थन कोई भी नहीं कर सकता। भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ और भारतीय संस्कृति पुरातन काल से इस देश के लोगों की पहचान है। वर्णाश्रम की व्यवस्था कर्म के अनुसार जो निर्धारण महर्षि मनु ने मनुस्मृति में किया था उसका आधार कर्म था न कि छुआछूत की भावना। मध्यकालीन खिलजी वंश के शासकों द्वारा भारत में धर्म परिवर्तन करने का दबाव डाला गया और जब अनुसूचित जाति से संबंधित लोगें ने इनकार कर दिया तो उनके खिलाफ अत्याचार शुरू हो गया। धर्म परिवर्तन से मना करने का दण्ड उन्हें यह मिला कि सफाई का कार्य सौंपा गया। भारतीय वर्ण व्यवस्था में स्पृश्यता का कलंक भाव कब जुड़ा इस पर समाजशास्त्रियों के तमाम शोध प्रबंध मौजूद हैं। लगभग सभी शोध यही तथ्य स्थापित करते हैं कि भारत में पौराणिक युग हो या प्राचीन युग अस्पृश्यता का भाव जातियों के बीच थी ही नहीं। भारत में इस्लाम के आने के बाद ही इस दुर्भावना का प्रादुर्भाव हुआ है। राहुल गांधी के दावे के अनुसार यदि शुद्धिकरण अनुष्ठान करने वाले अज्ञानी मनुस्मृति का बैनर लगाए हुए थे तो उनके खिलाफ इस अपराध के लिए भी कार्रवाई होनी चाहिए कि जिस वक्त मनुस्मृति की रचना हुई, उस वक्त तो भारत में कोई ऊंच-नीच था ही नहीं। अनुष्ठान के आयोजकों ने न सिर्फ अनुसूचित जाति-जनजाति का अनादर किया है बल्कि मनुस्मृति को बदनाम करके करोड़ों सनातनी जन की भावनाओं को भी आहत किया है।
सबसे बड़ा सवाल इस बात का है कि वह संगठन कौन सा है और उसका तर्क क्या है जिसके कारण उसने शुद्धिकरण का अनुष्ठान किया। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शुद्धिकरण किस लिए? पहले सवाल का जवाब तो यह है कि इस संगठन का नाम है ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' जिसका संबंध सीधे किसी राजनीतिक पाटी विशेष से स्थापित नहीं हो सका है। लेकिन यह भी सच है कि इस संगठन का पक्ष उत्तराखण्ड भाजपा के अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट द्वारा रखे जाने के कारण यह जरूर कहा जा सकता है कि ‘भगवान श्री राम,' ‘धर्मार्थ सेवा' इत्यादि शब्दों से जुड़े संगठनों को सीधे भाजपा से ही जोड़ा जाता है और भाजपा भी उसे स्वीकार कर लेती है। भाजपा अध्यक्ष भट्ट का कहना है कि 10 अगस्त को जो शुद्धिकरण अनुष्ठान हुआ वह रामलीला मैदान का इसलिए हुआ कि वहां पर एक मन्दिर है और वहां पर धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। भट्ट का यह भी कहना है कि उस स्थल पर दूसरे धर्म के नारे भी लगे थे। भट्ट ने स्पष्ट किया कि शुद्धिकरण अनुष्ठान कांग्रेस अध्यक्ष की जाति को ध्यान में रख कर नहीं किया गया।
बहरहाल एक राजनेता होने के कारण राहुल गांधी का यह कर्तव्य है कि वह अनुसूचित जाति के अपमान से संबंधित मुद्दों को उठाएं। लोकसभा में विपक्ष का नेता होने के कारण उनका अधिकार है कि वह देश में हुए किसी भी अपराध के लिए प्रधानमंत्री से सवाल पूछें। किन्तु भारतीय समाज की वास्तविकता को स्वीकार भी करना पड़ेगा। दिन-रात उपनिषदों की निन्दा से जनाधार की उम्मीद करना भी कभी-कभी निरर्थक साबित होता है।
लब्बोलुआब है कि इस मामले की राज्य सरकार निष्पक्ष जांच कराए और यदि खरगे और अनुसूचित जाति की वजह से शुद्धिकरण अनुष्ठान हुआ है तो श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ समुचित कानूनी कार्रवाई हो अन्यथा यदि मन्दिर के निकट कांग्रेस की रैली में शामिल कार्यकर्ताओं ने शराब की बोतलें बिखेरी हों तो धार्मिक भावना की उपेक्षा के आरोप में उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।