पाक-चीन को खरी-खरी
प्रकाशित: 02-09-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन यानि एससीओ से उन देशों का मुकाबला करने का आग्रह किया जो आतंकवाद का इस्तेमाल सरकार की नीति के तौर पर करते हैं। मजे की बात तो यह है कि जिस वक्त आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी ने अपना भाषण देना शुरू किया, उस वक्त वहां पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग दोनों मौजूद थे।
दरअसल पाकिस्तान आतंकी संगठन को अपनी सेना का सहयोगी संगठन मानता है। पाकिस्तान की सैन्य खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देशन में वहां के आतंकी संगठन आतंकी गतिविधियों का संचालन करते है। आतंकियों के वित्त पोषण के लिए पाकिस्तान सरकार दुर्दान्त आतंकी सरगनाओं को गैर-सरकारी संगठन यानि एनजीओ का संचालक साबित करती है। दुनिया भर में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तोयबा जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों को इस तरह पेश करती है कि यह संगठन गरीब दुखिया की सेवा कर रहे हैं। यद्यपि पाकिस्तान के इस झूठ को पूरी दुनिया समझती भी है और उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है। आतंकी वित्त पोषण के खिलाफ एफएटीएफ कई बार पाकिस्तान को निगरानी सूची में रख चुका है। लेकिन अपने कुछ मददगार देशों जैसे चीन और तुकी की मदद से फिर बाहर आ जाता है। भारत ने पाकिस्तान का कूटनीतिक बहिष्कार कर रखा है इसीलिए उससे किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। कई ऐसे अवसर आए जब पाकिस्तान की सरकार ने आईएसआई और सेना के दबाव में न आने के संकेत दिए और दोनों देशों के बीच वार्ता की तैयारी भी हुई किन्तु आईएसआई नहीं चाहती कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सहयोगात्मक हों। इसीलिए वार्ता के ठीक पहले आतंकी घटनाएं करा देती है ताकि दोनों देशों में शत्रुता का माहौल बन जाए। पाकिस्तान की सेना जानती है कि यदि भारत के साथ उसके संबंध सुधर जाएंगे तो उसकी यानि पाक सेना की प्रासंगिकता ही समाप्त हो जाएगी। इसीलिए जब कभी दोनों देशों में समझौतावादी माहौल का वातावरण बना तो पाक सेना और आईएसआई ने माहौल को शत्रुवत बनाने के उद्देश्य से भारत के खिलाफ खूनी हथकंडा अपनाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को भी खरी-खरी सुना दी। कारण कि पाकिस्तान तो आतंकियों को पालता पोषता है किन्तु चीन उनको अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर संरक्षण देकर पाकिस्तान पर एहसान जताता है ताकि पाक सेना व सरकार चीन के निवेश का पूरी तरह ध्यान रखे। जब कभी भी पाकिस्तान के इन दुर्दान्त आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव आया तो चीन वीटो के हथियार का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के नायक आतंकियों को बचा लेता है। बहरहाल भारत के प्रधानमंत्री के लिए पाक के पालित आतंकवादी विश्व शान्ति के लिए चुनौती हैं तो उन्हें जो संरक्षण देते हैं वे भी उतने ही दोषी हैं। इस तरह भारतीय प्रधानमंत्री ने चीन और पाकिस्तान दोनों की हकीकत बताई।
दरअसल पाकिस्तान आतंकी संगठन को अपनी सेना का सहयोगी संगठन मानता है। पाकिस्तान की सैन्य खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देशन में वहां के आतंकी संगठन आतंकी गतिविधियों का संचालन करते है। आतंकियों के वित्त पोषण के लिए पाकिस्तान सरकार दुर्दान्त आतंकी सरगनाओं को गैर-सरकारी संगठन यानि एनजीओ का संचालक साबित करती है। दुनिया भर में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तोयबा जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों को इस तरह पेश करती है कि यह संगठन गरीब दुखिया की सेवा कर रहे हैं। यद्यपि पाकिस्तान के इस झूठ को पूरी दुनिया समझती भी है और उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है। आतंकी वित्त पोषण के खिलाफ एफएटीएफ कई बार पाकिस्तान को निगरानी सूची में रख चुका है। लेकिन अपने कुछ मददगार देशों जैसे चीन और तुकी की मदद से फिर बाहर आ जाता है। भारत ने पाकिस्तान का कूटनीतिक बहिष्कार कर रखा है इसीलिए उससे किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। कई ऐसे अवसर आए जब पाकिस्तान की सरकार ने आईएसआई और सेना के दबाव में न आने के संकेत दिए और दोनों देशों के बीच वार्ता की तैयारी भी हुई किन्तु आईएसआई नहीं चाहती कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सहयोगात्मक हों। इसीलिए वार्ता के ठीक पहले आतंकी घटनाएं करा देती है ताकि दोनों देशों में शत्रुता का माहौल बन जाए। पाकिस्तान की सेना जानती है कि यदि भारत के साथ उसके संबंध सुधर जाएंगे तो उसकी यानि पाक सेना की प्रासंगिकता ही समाप्त हो जाएगी। इसीलिए जब कभी दोनों देशों में समझौतावादी माहौल का वातावरण बना तो पाक सेना और आईएसआई ने माहौल को शत्रुवत बनाने के उद्देश्य से भारत के खिलाफ खूनी हथकंडा अपनाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को भी खरी-खरी सुना दी। कारण कि पाकिस्तान तो आतंकियों को पालता पोषता है किन्तु चीन उनको अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर संरक्षण देकर पाकिस्तान पर एहसान जताता है ताकि पाक सेना व सरकार चीन के निवेश का पूरी तरह ध्यान रखे। जब कभी भी पाकिस्तान के इन दुर्दान्त आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव आया तो चीन वीटो के हथियार का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के नायक आतंकियों को बचा लेता है। बहरहाल भारत के प्रधानमंत्री के लिए पाक के पालित आतंकवादी विश्व शान्ति के लिए चुनौती हैं तो उन्हें जो संरक्षण देते हैं वे भी उतने ही दोषी हैं। इस तरह भारतीय प्रधानमंत्री ने चीन और पाकिस्तान दोनों की हकीकत बताई।